हिमाचली खबर: पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने सभी मदरसों में वन्दे मातरम् गाना अनिवार्य कर दिया है. यह आदेश सरकारी और निजी, दोनों ही मदरसों पर लागू किया गया है. इससे पहले राज्य सरकार ने स्कूलों में भी सुबह की प्रार्थना के समय वन्दे मातरम् गायन अनिवार्य किया. मुख्यमंत्री शुभेन्दु के ताबड़तोड़ फैसलों से पश्चिम बंगाल इन दिनों चर्चा में है. इसी वजह से मदरसों में वन्दे मातरम् के आदेश के बाद चर्चा तेज हो चली है.

आइए, सरकार के इस आदेश के बाद जानने का प्रयास करते हैं कि कैसे काम करते हैं पश्चिम बंगाल के मदरसे? यहां क्याक्या पढ़ाया जाता है? कैसा है मदरसों का एजुकेशन बोर्ड सिस्टम? क्या यहां दूसरे धर्म के बच्चे भी पढ़ते हैं? राज्य में कुल कितने मदरसे हैं और इनकी फंडिंग कैसे होती है?
पश्चिम बंगाल में मदरसा शिक्षा वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन के बैनर तले संचालित होता है. बोर्ड की वेबसाइट के अनुसार, बंगाल में मदरसा शिक्षा की जड़ें कलकत्ता मदरसा की स्थापना से जुड़ी मानी जाती है. इसकी शुरुआत साल 1780 में हुई. उस समय देश में अंग्रेजी शासन था. स्वाभाविक है कि मदरसा की स्थापना ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के समय हुई थी. तब से आज तक लगातार यह फलतीफूलती आ रही है.
1) मदरसा क्या है, और क्या यह सिर्फ धर्म की पढ़ाई है?
बोर्ड के अनुसार मदरसा अरबी शब्द है. इसका अर्थ शिक्षा संस्था या स्कूल है. पश्चिम बंगाल में मदरसों को केवल धार्मिक पढ़ाई तक सीमित मानना सही नहीं है. यहां सामान्य स्कूलों जैसे विषय भी पढ़ाए जाते हैं. उद्देश्य यह भी है कि दूरदराज, ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा मिल सके.
राज्य में कुल 850 मदरसे हैं, इनमें 614 मान्यता प्राप्त हैं. फोटो: PTI
2) बोर्ड सिस्टम कैसा है?
वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन शिक्षा बोर्ड की तरह काम करता है. वेबसाइट पर दर्ज सूचना के मुताबिक यह बोर्ड 1994 के वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट के तहत एक स्वायत्त संस्था के रूप में बना. इसके पास अकादमिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्तर पर वे अधिकार, सुविधाएं हैं, जो राज्य के अन्य शिक्षा बोर्डों को मिलती हैं. बोर्ड के कामों में मदरसों को दिशा देना, निगरानी करना, कंट्रोल करना, परीक्षा कराना, पाठ्यक्रम, पुस्तकें आदि से जुड़ा काम शामिल है.
3) पश्चिम बंगाल में कितने मदरसे हैं?
बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक राज्य में कुल 850 मदरसे हैं. इनमें 614 मान्यता प्राप्त हैं. 423 उच्च मदरसा, 89 जूनियर हाई मदरसा तथा 102 सीनियर मदरसा शामिल हैं. बाकी निजी एवं समुदाय से फंड लेकर चल रहे हैं. हाल ही में 77 सीनियर मदरसा को अपग्रेड करके 12 वीं यानी फ़ाज़िल तक बनाया गया है. 265 उच्च मदरसा को अपग्रेड करके हायर सेकंडरी यानी 10+2 योग्य बनाया गया है. 183 मदरसा में वोकेशनल कोर्सेज चलाने की सूचना दर्ज है.
मदरसों में दूसरे धर्म के बच्चे भी पढ़ते हैं. फोटो: PTI
4) क्या दूसरे धर्म के बच्चे भी पढ़ते हैं?
बोर्ड स्पष्ट रूप से कहता है कि मदरसे धर्म, जाति, पंथ, जेंडर के आधार पर नहीं हैं. वेबसाइट पर प्रेसीडेंट डेस्क के पेज पर दर्ज है कि मदरसों में लगभग 62 फीसदी छात्राएं हैं और करीब 16 फीसदी गैर मुस्लिम भी पढ़ते हैं. उच्च मदरसा में 17 फीसदी छात्र और 11 फीसदी स्टाफ के गैर मुस्लिम होने का उल्लेख किया गया है. इस तरह बोर्ड की वेबसाइट पर अलगअलग सेक्शन में गैर मुस्लिम छात्रों का अनुपात लगभग 1617 फीसद के बीच बताया गया है. इस तरह कहा जा सकता है कि मदरसों में दूसरे धर्म के बच्चे भी पढ़ते हैं.
5) मदरसों में क्याक्या पढ़ाया जाता है?
पश्चिम बंगाल में मदरसा शिक्षा के अंदर मुख्य तौर पर दो योजनाएं बताई गई हैं.एकहाई मदरसा एजुकेशन सिस्टम औरदोसीनियर मदरसा एजुकेशन सिस्टम .
- हाई मदरसा एजुकेशन सिस्टम:बोर्ड के अनुसार उच्च मदरसा में विषय और पाठ्यक्रम माध्यमिक शिक्षा जैसे ही होते हैं. फर्क यह है कि यहां दो विशेष विषय और शामिल किए गए हैं. अरेबिक और इस्लाम परिचय. बाकी सामान्य विषय भाषा, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान आदि बाकी स्कूलों की तरह चलते हैं.
- सीनियर मदरसा एजुकेशन सिस्टम:यहां सामान्य विषयों के साथ थियोलॉजी, इस्लामिक स्टडीज़ का भी मिश्रण होता है. वेबसाइट पर दर्ज है कि आलिम यानी 10 वीं स्तर पर भाषा, विज्ञान, सोशल साइंस के साथ अरेबिक, इस्लामिक थियोलॉजी भी पढ़ाई जाती है. सीनियर मदरसा में कक्षा एक से 10 तक चलने वाले मदरसे को आलिम मदरसा एवं कक्षा एक से 12 वीं तक चलने वालों को फ़ाज़िल मदरसा कहा जाता है.
उच्च मदरसा में कक्षा 10 का सर्टिफिकेट माध्यमिक के बराबर माना गया है. फोटो: PTI
6) परीक्षा और सर्टिफिकेट कैसे होते हैं?
जैसे देश के सभी शिक्षा बोर्ड अपनी परीक्षाएं कराते हैं, ठीक वैसे ही यह बोर्ड भी परीक्षाएं करता है. वेबसाइट पर दर्ज है कि उच्च मदरसा में कक्षा 10 का सर्टिफिकेट माध्यमिक के बराबर माना गया है. सीनियर सिस्टम में आलिम भी माध्यमिक के समकक्ष बताया गया है. फ़ाज़िल यानी 10+2 को वेस्ट बंगाल काउंसिल ऑफ हायर सेकेंडरी एजुकेशन के हेयर सेकेंडरी के समकक्ष बताया गया है. इसका मतलब है कि छात्र मुख्य धारा के एजुकेशन सिस्टम में आगे पढ़ाई के विकल्प पा सकते हैं.
7) पढ़ाई का मूल्यांकन कैसे होता है?
मदरसों में सीसीई सिस्टम लागू है. मतलब इनकी मॉनिटरिंग सतत होती है. टेस्ट का प्रॉसेस भी तय है. साथ ही ग्रेडिंग सिस्टम और रुचि, व्यवहार, आउटडोर गतिविधियां, सामाजिक गुण भी कोर्स में शामिल बताए गए हैं. उद्देश्य यह बताया गया है कि बच्चे का विकास केवल परीक्षा अंक से न मापा जाए.
फ़ाज़िल यानी 10+2 को वेस्ट बंगाल काउंसिल ऑफ हायर सेकेंडरी एजुकेशन के हेयर सेकेंडरी के समकक्ष बताया गया है. फोटो: PTI
8) फंडिंग कैसे होती है?
पश्चिम बंगाल में मदरसों की फंडिंग को बोर्ड की वेबसाइट पर दो स्तरों में समझाया गया है.
- कई मदरसे शुरू में समुदाय के दान से बने. बाद में इनमें से कई मदरसे बोर्ड से मान्यता पाने में कामयाब रहे और अब उन्हें सरकार से मदद भी मिलती है.
- मान्यता प्राप्त और एडेड मदरसों में सरकारी सहयोग से चलते हैं. ऐसे मदरसों के शिक्षकों एवं कर्मचारियों को सैलरी, सेवानिवृत्ति के सभी लाभ सरकार से मिलते हैं. आधारभूत ढांचों का विकास और अन्य सुविधाओ की वित्तीय जिम्मेदारी भी सरकार उठाती है. इनमें फ्री किताबें, पेयजल, सैनिटेशन आदि जैसी चीजें शामिल हैं. मान्यता प्राप्त एडेड संस्थानों में कक्षा 12 तक शिक्षा मुफ्त है. लड़कियों के लिए कॉमन रूम, टॉयलेट, हॉस्टल, मेस जैसी सुविधाओं हेतु ग्रांट का जिक्र भी वेबसाइट पर उपलब्ध है. स्टेट मदरसा स्पोर्ट्स मीट के लिए भी सरकार मदद देती है.
- कुछ मदरसे व्यक्ति, समुदाय एवं संस्थाएं भी चलाते हैं. उन्हें मखतब या खारीजी मदरसा कहा गया है. ये अलग तरह से चल सकते हैं. उनकी फंडिंग आम तौर पर निजी तौर पर या समुदाय आधारित होती है.
इस तरह कहा जा सकता है कि पश्चिम बंगाल का मदरसा सिस्टम एक बोर्डआधारित शिक्षा व्यवस्था है. यहां आधुनिक विषय और कुछ विशेष विषय साथ चलते हैं. परीक्षाएं तय ढांचे में होती हैं. सर्टिफिकेट को मुख्यधारा बोर्डों के समकक्ष बताया गया है. मदरसे सभी के लिए खुले हैं. गैरमुस्लिम बच्चे भी पढ़ते हैं. कई संस्थान सरकारी सहायता से चलते हैं. कुछ मदरसे निजी एवं समुदाय की आर्थिक मदद से भी चलते हैं.



