Maulana Qari Ishaq Gora Statement News: इस्लामी विद्वानी मौलाना कारी इसहाक गोरा ने मुस्लिम लड़कियों के धर्म बदलने के चलन पर चिंता जताई है। इसका कारण परवरिश की कमी करार दिया है।

सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के देवबंद में मुस्लिम स्कॉलर ने लड़कियों के धर्म परिवर्तन का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया है। जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक और प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान मौलाना कारी इसहाक गोरा ने मुस्लिम समाज में बढ़ते एक नए रुझान पर बड़ा बयान दिया है। बेटियों के इस्लाम छोड़कर दूसरा मजहब अपनाने को लेकर उन्होंने गंभीर चिंता जताई है। गुरुवार को जारी एक वीडियो बयान में उन्होंने कहा कि यह मसला बेहद संवेदनशील है, लेकिन इसकी वजह तालीम नहीं बल्कि परवरिश और घरों के माहौल की कमी है।
रोकाने, दबाने से बचने की सलाह
मौलाना इसहाक गोरा ने कहा कि कुछ परिवार बेटियों में इस तरह के बदलाव को देखकर उनकी पढ़ाई रोक देने या उन पर पाबंदियां लगाने लगे हैं, जबकि यह तरीका बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा कि बेटियों को तालीम देना खतरा नहीं है। असली खतरा है कि हम उन्हें सही संस्कार, सही माहौल और सही तर्बियत नहीं दे पा रहे। रोकना या दबाना हल नहीं, बल्कि उनसे दोस्ताना रिश्ता बनाना, मोहब्बत का माहौल रखना और उनकी बात समझना जरूरी है।
इस्लामी तालीमात की वकालत
मौलाना इसहाक गोरा ने इस्लामी तालीमात की वकालत की। उन्होंने कहा कि आजकल घरों में इस्लामी तालीम कम हो रही है। दीनदार माहौल कमजोर पड़ रहा है। माता-पिता दुनियावी शिक्षा पर तो मेहनत करते हैं, लेकिन अखलाक और ईमान की तर्बियत पीछे छूट जाती है। कारी इसहाक गोरा के अनुसार इसी कमी का फायदा बाहरी ताकतें उठाती हैं और बेटियां गलत रास्तों पर चली जाती हैं।
बच्चों पर ध्यान देने का संदेश
मौलाना गोरा ने कहा कि समाज में तरह-तरह की राय दी जा रही है। कुछ लोग इसे ज्यादा तालीम का नतीजा बता रहे हैं। कुछ अति-आजादी को जिम्मेदार मान रहे हैं, लेकिन उनकी नजर में यह दोनों बातें गलत हैं। उन्होंने कहा कि मुद्दा तालीम का नहीं, बल्कि परवरिश के उस हिस्से का है जिसे हम भूलते जा रहे हैं। असली जिम्मेदारी हमारी अपनी है।
कारी गोरा ने कहा कि अक्सर परिवार बेटियों की भावनाओं को समझने की कोशिश नहीं करते हैं। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे हैं। भाई बहन को गुस्से में समझाते हैं। घर में बात सुनने का माहौल नहीं होता। उन्होंने कहा कि अगर कोई सिर्फ गुस्से से समझा सकता है तो इसका मतलब है कि उसमें मोहब्बत और हिकमत से समझाने की सलाहियत नहीं है।
घरों का माहौल ठीक करने पर जोर
मौलाना गोरा ने मुस्लिम परिवारों से भावुक अपील करते हुए कहा कि घर में दीन की रोशनी हो। बात सुनने और समझने का माहौल हो। बेटियां अपने घर में भरोसा, इज्जत और इत्मीनान महसूस करें। उनके अनुसार, जब तर्बियत मजबूत होगी तो कोई बाहरी ताकत बेटियों को बहका नहीं सकेगी। कारी इसहाक गोरा के बयान के बाद देवबंद और सहारनपुर के धार्मिक महकमे में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है।