अस्पताल के लेबर रूम में दाखिल होने से पहले जब नर्स या डॉक्टर आपसे गहने उतारने और मेकअप साफ करने को कहती हैं, तो अक्सर मन में सवाल उठता है कि इसका मेडिकल प्रोसीजर से क्या लेनादेना? क्या यह सिर्फ एक पुरानी परंपरा है या इसके पीछे कोई गंभीर वैज्ञानिक कारण है? दरअसल, डिलीवरी के दौरान आपका नेचुरल लुक आपकी और आपके बच्चे की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा लाइफसेविंग टूल साबित होता है।

सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट Dr Shafali Dadhich Tungaria ने हाल ही इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया कि डिलीवरी या किसी भी सर्जरी के लिए अस्पताल में भर्ती होते समय किन चीजों से बचना चाहिए। डॉक्टर ने बताया जब आप डिलीवरी या सर्जरी के लिए आएं तो मेकअप या किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल न करें। नाखून काट लें। अच्छे से नहाकर आएं और बाल भी धो लें। ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें। चूड़ियां, अंगूठियां और नेकलेस न पहनें। इन्हें आप डिलीवरी के 45 दिन बाद दोबारा पहन सकती हैं। अब सवाल ये उठता है कि डिलीवरी से पहले ऐसा हुलिया क्यों मायने रखता है,इसकी पुष्टि डॉक्टर से बातचीज करके करते हैं।
डिलीवरी से पहले महिला की सादगी दिखना क्यों है जरूरी?
मुंबई सेंट्रल स्थित वोकहार्ट हॉस्पिटल्स की कंसल्टेंट प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. ऋचा भारद्वाज ने बताया डिलीवरी के दौरान साफसफाई और सादगी बनाए रखना बेहद जरूरी है। एक्सपर्ट ने बताया नाखून छोटे कटे होने चाहिए और उन पर नेल पॉलिश या एक्सटेंशन नहीं लगे होने चाहिए। डॉक्टर अक्सर प्रक्रियाओं के दौरान उंगलियों पर पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन का स्तर जांचते हैं। अस्पताल पहुंचने से पहले ठीक से स्नान करने से संक्रमण का खतरा कम होता है। ढीले और आरामदायक कपड़े पहनने और सिर्फ जरूरी सामान लाने से प्रक्रिया आसान हो जाती है।
मेकअप, गहने और परफ्यूम से बचने की सलाह क्यों दी जाती है?
डॉ. भारद्वाज के मुताबिक चेहरे और नाखूनों पर लगाया गया मेकअप ट्रीटमेंट के दौरान स्किन के रंग और ऑक्सीजन लेवल जैसे जरूरी संकेतों को समझने में बाधा डाल सकता है। एक्सपर्ट ने बताया गहनों को हटाना जरूरी होता है ताकि सर्जरी के दौरान मेडिकल उपकरणों से जलने जैसे किसी भी जोखिम से बचा जा सकता है। तेज परफ्यूम या डियोड्रेंट का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि अस्पताल के माहौल में इससे एलर्जी या असहजता हो सकती है।
डिलीवरी के दौरान क्या खानेपीने को लेकर भी कुछ सावधानियां जरूरी हैं?
डॉक्टर ने बताया कि ज्यादातर सर्जरी और प्लान्ड डिलीवरी से पहले कुछ घंटों तक खाली पेट रहने की सलाह दी जाती है। डॉक्टर ने बताया एनेस्थीसिया के दौरान जटिलताओं से बचने के लिए यह जरूरी होता है। कब तक खानापीना बंद करना है, इस बारे में डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना सबसे बेहतर होता है।
लोग अक्सर कौनसी गलतियां करते हैं?
डॉ. भारद्वाज के अनुसार, कई लोग डॉक्टर को अपनी नियमित दवाओं या सप्लीमेंट्स के बारे में बताना भूल जाते हैं। एक्सपर्ट ने बताया कुछ लोग बिना डॉक्टर की सलाह के ब्लड थिनर या हर्बल प्रोडक्ट्स लेते रहते हैं, जिससे ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है। वहीं कुछ लोग पर्याप्त आराम किए बिना अस्पताल पहुंचते हैं या बहुत ज्यादा तनाव में रहते हैं, जिसका असर रिकवरी पर पड़ सकता है।
आसान और सुरक्षित डिलीवरी के लिए ये नियम है जरूरी
डॉक्टर का कहना है कि शांत रहना, डॉक्टर के निर्देशों का पालन करना और किसी भी बात को लेकर भ्रम होने पर सवाल पूछना पूरी प्रक्रिया को आसान बना सकता है। डॉक्टर ने बताया घर से थोड़ीसी तैयारी सुरक्षा और आराम दोनों को बेहतर बना सकती है, जिससे सर्जरी या डिलीवरी और उसके बाद की रिकवरी ज्यादा सहज हो जाती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक स्रोतों और विशेषज्ञों से मिली जानकारी पर आधारित है। किसी भी मेडिकल प्रक्रिया या स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।



