हिमाचली खबर: खानेपीने में की गई लापरवाही, तनाव और खराब लाइफस्टाइल की वजह से लिवर में गंदगी और टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं। अगर लिवर फंक्शन सही न हो तो पेट की समस्याएं, गैसे और एसिड ज्यादा बनने लगता है। ऐसा होना लिवर की सुस्त सेहत की ओर इशारा है। इसके लिए दवा के साथसाथ आपको लिवर डिटॉक्स भी करना चाहिए। लिवर में जमा टॉक्सिन्स को जड़ से निकालने में इससे मदद मिलती है।

आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा ने बताया कि आयुर्वेद में लिवर को डिटॉक्स करने के लिए मई का महीना बेस्ट माना जाता है। मई का महीना वसंत और भयंकर ग्रीष्म ऋतु के बीच का समय होता है। जिसे ऋतु संधि कहते हैं। इस मौसम में सर्दियों और वसंत के वक्त जो शरीर में भारीपन और कफ जमा होता है, वह पिघलने लगता है और इसी समय शरीर में पित्त बढ़ना शुरू होता है। लिवर बॉडी का मुख्य पित्त केंद्र है। इसलिए अगर लिवर को इस वक्त डिटॉक्स कर लिया जाए तो शरीर में जमा पूरा ज़हरीला ‘आम’ बाहर निकल जाएगा। इससे गर्मी में होने वाली पेट की बीमारियां, मुंहासे और आलस दूर रहेगा।
लिवर डिटॉक्स करने के आयुर्वेदिक उपाय
कुटकी लिवर को साफ करने के लिए इसे आयुर्वेद में सबसे असरदार और अचूक माना जाता है। ये जड़ीबूटी लिवर में जमा हो रहे पुराने ज़हरीले तत्वों को काटकाटकर बाहर निकालती है।
कालमेघ खून में जमा हो रखे आम को साफ करने में ये जड़ी बूटी असरदार है। इससे लिवर की अग्नि को मजबूत करने में मदद मिलती है और लिवर अपना काम बेहतर कर पाता है।
भूमि आंवला लिवर के मरीज के लिए आंवला बहुत फायदेमंद है, लेकिन इसमें भी भूमि आंवला और भी ज्यादा फायदेमंद है। इससे लिवर की डैमेज कोशिकाओं की मरम्मत होती है। पीलिया और फैटी लिवर कम होता है।
पुनर्नवा लिवर को साफ करने के लिए और अगर लिवर में कहीं सूजन आ गई है उसे ठीक करने के लिए पुनर्नवा का उपयोग करें। इससे लिवर की भयंकर सूजन भी कम होती है। शरीर में जमा खराब पानी भी बाहर निकल जाता है।
पंचकर्मा आयुर्वेद में लिवर और खून को साफ करने के लिए पंचकर्म चिकित्सा भी है। इसमें प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, लिवर को ‘रीसेट’ करने का काम किया जाता है।



