हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में आर्थिक तंगी और पारिवारिक परेशानियों से जुड़ी एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां बैंक के कर्ज और पत्नी की गंभीर बीमारी से परेशान एक व्यक्ति ने जंगल में जाकर फंदा लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। इस घटना से पूरे इलाके में शोक का माहौल है और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
मृतक की पहचान 56 वर्षीय रमेश कुमार के रूप में हुई है, जो दाड़लाघाट क्षेत्र के टुईरू गांव का रहने वाला था। बताया जा रहा है कि वह एक निजी कंपनी में नौकरी करता था और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी।
परिजनों के अनुसार परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही ज्यादा मजबूत नहीं थी। इसी बीच रमेश की पत्नी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थी। लंबे समय से चल रहे इलाज के कारण परिवार पर खर्च का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा था, जिससे रमेश मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगा था।
बताया जा रहा है कि रमेश ने शिमला के विकास नगर इलाके में एक फ्लैट भी लिया हुआ था, जिसकी बैंक किस्तें नियमित रूप से चुकानी पड़ती थीं। एक तरफ पत्नी के इलाज का भारी खर्च और दूसरी ओर बैंक लोन की किस्तों ने उसे गहरे तनाव में डाल दिया था।
परिजनों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से वह काफी चिंतित और परेशान दिखाई दे रहा था। बताया जाता है कि 5 मार्च को उसने काफी शराब पी ली थी। उसकी हालत को देखते हुए अगले दिन उसका भाई उसे शिमला से पैतृक गांव टुईरू ले आया, ताकि वह परिवार के बीच रहकर सामान्य हो सके।
लेकिन गांव लौटने के अगले ही दिन रमेश चुपचाप घर से निकल गया। काफी देर तक जब वह वापस नहीं लौटा तो परिवार के लोग उसे तलाशने लगे। कुछ समय बाद गांव के पास जंगल में एक पेड़ से उसका शव लटका हुआ मिला। यह दृश्य देखकर परिजनों और ग्रामीणों के होश उड़ गए।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में मृतक के गले पर रस्सी के निशान के अलावा शरीर पर किसी अन्य तरह की चोट के निशान नहीं मिले हैं।
पुलिस के अनुसार परिजनों ने इस मामले में किसी पर भी किसी तरह का शक जाहिर नहीं किया है। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे हैं। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है और पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।
यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि आर्थिक दबाव और गंभीर बीमारियां कई बार परिवारों के लिए असहनीय मानसिक तनाव का कारण बन जाती हैं।