China Property Crash 2026 : चीन का हाउसिंग मार्केट लंबे समय से मंदी का सामना कर रहा है. इसमें 70 शहरों में कीमतें कथित तौर पर लगभग दो दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं. इससे सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या भारत में भी इसी तरह का सुधार देखने को मिल सकता है. बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के आंकड़ों के मुताबिक, चीन में घरों की कीमतें 2021 के मुकाबले करीब 23 प्रतिशत तक गिर चुकी हैं.

रियल एस्टेट निवेश में 14.7% की गिरावट
चीन की ये गिरावट कोई अचानक होने वाली घटना नहीं है, बल्कि एनालिस्ट इसे एक ‘धीमी गति से होने वाला पतन’ या ‘स्लो डेथ’ की तरह देख रहे हैं. जो पिछले चार सालों से लगातार जारी है. 2025 के पहले दस महीनों में रियल एस्टेट निवेश में 14.7% की गिरावट आई, जबकि नए घरों की बिक्री लगातार पांच वर्षों से घट रही है. तैयार लेकिन बिना बिके घरों की इन्वेंटरी 391 मिलियन वर्ग मीटर तक पहुंच गई है. ये 2021 के बाद से 72% की ग्रोथ है.
ये गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रियल एस्टेट और उससे जुड़े क्षेत्रों का योगदान कभी चीन के GDP का लगभग 25% था. लाखों चीनी परिवारों के लिए संपत्ति उनकी कुल संपत्ति का बड़ा हिस्सा है, जबकि पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं में इक्विटी की भूमिका अधिक होती है. जैसेजैसे संपत्ति के मूल्य घट रहे हैं, घरेलू संपत्ति पर इसका बड़ा असर पड़ा है.
‘भारत के हाउसिंग मार्केट की बुनियादी स्थितियां चीन से काफी अलग हैं’
इन घटनाओं के बीच, सोशल मीडिया पर भारत को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. जहां कुछ यूजर्स ये सवाल उठा रहे हैं कि क्या इसी तरह का हाउसिंग मार्केट करेक्शन भारत में भी आने वाला है. हालांकि, कई लोग तर्क देते हैं कि भारत के हाउसिंग मार्केट की बुनियादी स्थितियां चीन से काफी अलग हैं. कई क्षेत्रों में मांग अभी भी आपूर्ति से अधिक है और आबादी का एक बड़ा हिस्सा अभी भी पर्याप्त आवास से वंचित है. चीन की ओवरसप्लाई संकट के विपरीत, भारत का बाजार एंडयूजर मांग, शहरीकरण और जनसांख्यिकीय रुझानों द्वारा संरचनात्मक रूप से समर्थित माना जाता है.
हालांकि, NRI निवेश और अनकाउंटेड वेल्थ जैसे कारण निकट अवधि में डिमांड को सहारा दे सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि आय ग्रोथ में धीमापन और घटती किराया आय रिटर्न पर दबाव डाल सकते हैं.



