हिमाचली खबर: Mothers Day Special: देश और प्रदेश की राजधानी से 250 किलोमीटर दूर बसा शहर बरेली के करेली इलाके में एक छोटी सी पहल आज कई जरूरतमंद बच्चों की जिंदगी बदलने का काम कर रही है. मंदिर परिसर और पेड़ों की छाया में रोज लगने वाली निशुल्क पाठशाला गरीब परिवारों के बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण बन चुकी है. इस नेक काम को आगे बढ़ा रही हैं बीएड पास ज्योति ठाकुर, जो बिना किसी फीस के बच्चों को शिक्षा देकर उन्हें बेहतर भविष्य की राह दिखा रही हैं.

बिना फीस, बिना दिखावे… मंदिर में जल रही शिक्षा की अनोखी ‘ज्योति’, 120 बच्चों का भविष्य संवार रहीं​
बिना फीस, बिना दिखावे… मंदिर में जल रही शिक्षा की अनोखी ‘ज्योति’, 120 बच्चों का भविष्य संवार रहीं​

दरअसल, ज्योति ठाकुर बीएड पास हैं. उनके मातापिता की मौत हो चुकी है. परिवार की जिम्मेदारियों और कठिन हालात के बीच भी उन्होंने हार नहीं मानी. अपने परिवार का खर्च चलाने के लिए वह एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती हैं. स्कूल की नौकरी पूरी करने के बाद वह मंदिर परिसर में जरूरतमंद बच्चों की निशुल्क कोचिंग लगाती हैं. दिनभर की भागदौड़ और थकान के बावजूद उनके चेहरे पर बच्चों को पढ़ाने का उत्साह साफ दिखाई देता है. 120 बच्चों को निशुल्क शिक्षा देती हैं.

इस काम में ज्योति ठाकुर का साथ मोहिनी भी दे रही हैं. मोहिनी इटोआ सुखदेव की रहने वाली हैं और वह बच्चों को पढ़ाने में पूरा सहयोग करती हैं. दोनों मिलकर बच्चों को पढ़ाई के साथसाथ अनुशासन और अच्छे संस्कार भी सिखाती हैं. इलाके के लोग दोनों की मेहनत और लगन की खूब सराहना करते हैं.

बिना फीस के शिक्षा, बच्चों के चेहरों पर लौट रही मुस्कान

मंदिर में चल रही इस निशुल्क पाठशाला में ऐसे बच्चे पढ़ने आते हैं, जिनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है. कई बच्चों के मातापिता मजदूरी करते हैं या छोटेमोटे काम करके घर चलाते हैं. ऐसे में महंगी ट्यूशन और कोचिंग का खर्च उठा पाना उनके लिए आसान नहीं होता. ज्योति ठाकुर ने ऐसे ही बच्चों के लिए यह कदम उठाया.

मंदिर परिसर में बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते हैं, लेकिन उनके सपने बहुत बड़े हैं. ज्योति और मोहिनी दोनों बच्चों को आसान भाषा में पढ़ाती हैं, ताकि हर बच्चा अच्छी तरह समझ सके. पढ़ाई के दौरान बच्चों को सवाल पूछने और खुलकर अपनी बात रखने के लिए भी प्रेरित किया जाता है. अब इलाके के लोगों का कहना है कि पहले कई बच्चे पढ़ाई में ध्यान नहीं देते थे, लेकिन अब उनमें बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. बच्चों की पढ़ाई में रुचि बढ़ी है और स्कूलों में उनका प्रदर्शन भी सुधरा है. कई बच्चे अब नियमित रूप से स्कूल जाने लगे हैं और अपने भविष्य को लेकर गंभीर दिखाई देते हैं.

संघर्षों के बीच समाज के लिए बनीं मिसाल

ज्योति ठाकुर की जिंदगी संघर्षों से भरी रही है. मातापिता का साया सिर से उठने के बाद उन्होंने काफी मुश्किलें देखीं, लेकिन उन्होंने अपने हालात को कमजोरी नहीं बनने दिया. उन्होंने यह तय किया कि आर्थिक तंगी को किसी भी बच्चे की पढ़ाई में रुकावट नहीं बनने देंगी. यही सोच उन्हें हर दिन बच्चों के बीच ले आती है. ज्योति बच्चों को सिर्फ किताबों का ज्ञान ही नहीं देतीं, बल्कि जिंदगी में आगे बढ़ने की सीख भी देती हैं.

वह बच्चों को मेहनत, समय की कीमत और अच्छे व्यवहार का महत्व समझाती हैं. मोहिनी भी उनके साथ पूरी लगन से इस काम में जुटी रहती हैं. मंदिर में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक भी दोनों की तारीफ करते नहीं थकते. उनका कहना है कि अगर यह निशुल्क कोचिंग न होती तो उनके बच्चे पढ़ाई में काफी पीछे रह जाते. कई परिवार ऐसे हैं, जो बच्चों की कॉपीकिताब तक मुश्किल से खरीद पाते हैं.

छोटी सी पहल बनी बड़ी उम्मीद

करेली इलाके की यह पाठशाला अब लोगों के बीच मिसाल बन चुकी है. आसपास के लोग भी इस नेक काम में सहयोग करने लगे हैं. कोई बच्चों के लिए कॉपी दे रहा है तो कोई किताब और पेन की व्यवस्था कर रहा है. ज्योति ठाकुर का मानना है कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और कोई भी बच्चा सिर्फ पैसों की कमी की वजह से पढ़ाई से दूर नहीं रहना चाहिए.

उनका सपना है कि गरीब परिवारों के बच्चे भी अच्छी शिक्षा पाकर आगे बढ़ें और अपने परिवार का नाम रोशन करें. आज के दौर में जहां लोग सिर्फ अपने कामों तक सीमित रहते हैं, वहीं ज्योति ठाकुर और मोहिनी जैसी युवतियां समाज के लिए प्रेरणा बन रही हैं. मंदिर के आंगन में जल रही शिक्षा की यह ज्योति अब कई बच्चों की जिंदगी रोशन कर रही है.