हवाई जहाज के साथ कोई हादसा होता है, तो जांच एजेंसियां ब्लैक बॉक्स की मदद से दुर्घटना की वजह समझने की कोशिश करती हैं. अब कारों में भी ऐसा सिस्टम अहम होने जा रहा है. सरकार ने गाड़ियों के सुरक्षा मानकों में बदलाव किए हैं, जिनमें इवेंट डेटा रिकॉर्डर यानी EDR से जुड़े नियम भी शामिल हैं. इसे कार का ब्लैक बॉक्स कहा जाता है. इसके अलावा पैदल चलने वालों की सुरक्षा, टक्कर के दौरान यात्रियों की हिफाजत और कार चोरी रोकने के लिए भी नए प्रावधान किए गए हैं.

कार का ब्लैक बॉक्स कैसे करता है काम?
EDR सुनने में किसी अलग मशीन जैसा लग सकता है, लेकिन यह गाड़ी के कंट्रोल सिस्टम से जुड़ा होता है. इसी सिस्टम का संबंध एयरबैग खुलने जैसी सुरक्षा प्रक्रियाओं से भी होता है. जब कार को जोरदार टक्कर लगती है या एयरबैग खुलते हैं, तो EDR हादसे के आसपास के कुछ पलों की जानकारी सेव कर सकता है.
स्पीड से लेकर सीट बेल्ट तक की जानकारी
गाड़ी की स्पीड, ब्रेक इस्तेमाल किए जाने, सीट बेल्ट लगी होने और एयरबैग खुलने जैसी जानकारियां रिकॉर्ड कर सकता है. यह आमतौर पर हादसे से जुड़े कुछ सेकंड का डेटा रखता है. इसका मतलब यह नहीं कि कार हर दिन की पूरी ड्राइविंग रिकॉर्ड करती रहती है. यह सिस्टम गाड़ी में बैठे लोगों की बातचीत या आवाज भी रिकॉर्ड नहीं करता.
एक्सीडेंट की जांच में मिलेगी मदद
मान लीजिए किसी कार की दूसरी गाड़ी से टक्कर हो जाती है. ऐसे में जांच के दौरान यह पता लगाना जरूरी होता है कि हादसे से पहले कार की रफ्तार कितनी थी और ड्राइवर ने ब्रेक लगाया था या नहीं. EDR का डेटा इन सवालों के जवाब खोजने में मदद कर सकता है.
हालांकि, सिर्फ इस डेटा से हादसे की पूरी वजह पता नहीं चलती. सड़क की स्थिति, मौसम और दूसरी गाड़ी की भूमिका जैसी बातों की भी जांच करनी होगी.
पैदल चलने वालों और यात्रियों की सेफ्टी पर जोर
बदले गए सुरक्षा मानकों का मकसद सिर्फ हादसे के बाद जांच आसान बनाना नहीं है. इनमें ऐसे प्रावधान भी शामिल हैं, जिनसे कार की टक्कर लगने पर पैदल चलने वालों को कम चोट पहुंचे. साथ ही सामने और साइड से होने वाली टक्कर के दौरान कार में बैठे लोगों की सुरक्षा बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया गया है.
कार चोरी रोकने के लिए भी नए प्रावधान
नियमों में अलार्म और जैसे सिस्टम से जुड़े प्रावधान भी हैं. इमोबिलाइजर सही चाबी या अधिकृत तरीके के बिना इंजन स्टार्ट होने से रोकता है. इससे चोरी करने वालों के लिए गाड़ी को गलत तरीके से स्टार्ट करना मुश्किल हो सकता है.
कब लागू होंगे नए सुरक्षा नियम?
सभी बदलाव एक ही तारीख से लागू नहीं होंगे. कुछ नियमों के लिए अक्टूबर 2027 की समयसीमा तय है, जबकि कुछ 2028 और 2029 से लागू होंगे. अन्य प्रावधानों की समयसीमा 2031 और 2032 तक रखी गई है. इससे कार कंपनियों को जरूरी बदलाव करने के लिए समय मिलेगा.
दूसरे देशों में पहले से इस्तेमाल हो रहा EDR
चीन में 1 जनवरी 2022 से पैसेंजर कारों में EDR जरूरी किया गया था. यूरोप में भी 2022 से नई कारों के लिए यह अनिवार्य है. अमेरिका की एजेंसी NHTSA के अनुमान के मुताबिक, 2013 मॉडल की करीब 96 फीसदी कारों में पहले से EDR मौजूद था.
डेटा की प्राइवेसी पर भी उठते हैं सवाल
EDR से जुड़ा डेटा किसकी पहुंच में होगा, यह भी अहम मुद्दा है. अमेरिका में प्राइवेसी को लेकर चिंता जताई गई है, क्योंकि हादसे से जुड़ी जानकारी अदालत में सबूत के तौर पर इस्तेमाल हो सकती है. वहां इस डेटा को कार मालिक की संपत्ति माना जाता है और उसकी मंजूरी के बिना इसे देखने पर पाबंदी है. भारत में इस डेटा को कौन और किन परिस्थितियों में देख सकेगा, यह स्पष्ट होना जरूरी है.
भारत NCAP की रेटिंग भी होगी सख्त
सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक, भारत NCAP का दूसरा चरण अक्टूबर 2027 से लागू होगा. इसमें 100 में से 20 अंक पैदल चलने वालों और दूसरे कमजोर सड़क यूजर्स की सुरक्षा के लिए रखे गए हैं. ध्यान रहे कि भारत NCAP कारों की सुरक्षा जांचने वाला रेटिंग प्रोग्राम है, जबकि EDR और अन्य सुरक्षा मानक गाड़ियों पर लागू होने वाले नियमों का हिस्सा हैं.
कुल मिलाकर, सरकार की कोशिश कारों को ज्यादा सुरक्षित बनाने की है. इससे हादसे की जांच में मदद मिलने के साथसाथ कार में बैठे लोगों और सड़क पर चलने वालों की सुरक्षा बेहतर करने पर भी जोर रहेगा.



