दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित 100 साल से ज्यादा पुरानी रेस कोर्स मस्जिद को लेकर विवाद बढ़ गया है. मस्जिद को खाली करने का नोटिस दिया गया है. पहले मस्जिद की बिजली और पानी की सप्लाई बंद की गई और अब अधिकारियों ने बताया है कि आसपास के घरों के कनेक्शन भी काटे गए हैं. NDMC के अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई सिर्फ मस्जिद तक सीमित नहीं है, बल्कि इलाके में रहने वाले कई परिवार भी इससे प्रभावित हुए हैं.

जमीन केंद्र सरकार के भूमि एवं विकास कार्यालय यानी L&DO की बताई जा रही है, जबकि मस्जिद NDMC की विरासत सूची में ग्रेड2 स्मारक के रूप में दर्ज है. उधर, आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान ने दावा किया है कि मस्जिद पूरी तरह सुरक्षित है और उन्होंने संबंधित अधिकारियों से बात की है. वहीं जमीयत उलेमाएहिंद ने भी केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है. सवाल है कि मस्जिद को लेकर विवाद क्या है और आगे क्या होगा?
मस्जिद के साथ आसपास के घरों की बिजलीपानी भी बंद
दिल्ली में प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास के पास स्थित रेस कोर्स मस्जिद को खाली करने का नोटिस दिए जाने के बाद कार्रवाई का दायरा आसपास के घरों तक पहुंच गया है. अधिकारियों के मुताबिक, ध्वस्तीकरण अभियान के तहत मस्जिद के आसपास के इलाके में भी बिजली और पानी की सुविधाएं बंद कर दी गई हैं. NDMC के अधिकारियों ने बताया कि कार्रवाई सिर्फ मस्जिद तक सीमित नहीं है… आसपास रहने वाले कई परिवार भी बिजली और पानी की आपूर्ति बंद होने से प्रभावित हुए हैं.
अधिकारियों के अनुसार, मस्जिद प्रबंधन को 19 अक्टूबर के आसपास परिसर खाली करने का नोटिस दिया गया था. इसके लिए छह दिन का समय दिया गया. नोटिस में कहा गया कि जमीन केंद्र सरकार के भूमि एवं विकास कार्यालय यानी L&DO की है. साथ ही अनधिकृत कब्जे और निर्माण को लेकर चेतावनी दी गई. बताया गया है कि NDMC ने 7 अक्टूबर को ही मस्जिद की बिजली और पानी की सप्लाई काट दी थी. अब अधिकारियों का कहना है कि L&DO के आदेश के बाद मस्जिद के अलावा आसपास की कई संपत्तियों के कनेक्शन भी काटे गए हैं.
100 साल से ज्यादा पुरानी मस्जिद, विरासत सूची में दर्ज
रेस कोर्स मस्जिद आजादी से पहले की बताई जाती है. यह नई दिल्ली नगरपालिका परिषद यानी NDMC की विरासत सूची में ग्रेड2 स्मारक के रूप में दर्ज है. वहीं भूमि एवं विकास कार्यालय का कहना है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और वह इस ढांचे को अतिक्रमण मानता है.
अमानतुल्लाह खान बोले मस्जिद पूरी तरह सुरक्षित है
रेस कोर्स मस्जिद के मामले में आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान का भी बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि दिल्ली की ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद पूरी तरह सुरक्षित है और आगे भी सुरक्षित रहेगी. अमानतुल्लाह खान के मुताबिक, उन्होंने मस्जिद के मामले में दिल्ली वक्फ बोर्ड के CEO, L&DO और NDMC के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की है.
इस बीच मस्जिद के इमाम मोहम्मद हारून ने भी वक्फ बोर्ड की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. उनके मुताबिक, वह पिछले छह महीने से इस मामले को लेकर दिल्ली वक्फ बोर्ड से संपर्क कर रहे थे, लेकिन उनकी शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई. इमाम ने दावा किया कि बिजली और पानी की आपूर्ति बंद होने से मस्जिद में पीने के पानी तक की समस्या पैदा हो गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि मस्जिद तक पहुंचने का रास्ता बाधित होने से लोगों के आनेजाने में परेशानी हो रही है.
इमाम का कहना है कि मस्जिद को बचाने के लिए कानूनी कार्रवाई की जरूरत थी, लेकिन वक्फ बोर्ड ने न तो अदालत का रुख किया और न ही उन्हें ऐसा करने की अनुमति दी.
जमीयत उलेमाएहिंद ने केंद्र सरकार से मांगा हस्तक्षेप
रेस कोर्स मस्जिद और उससे सटे कब्रिस्तान को लेकर जमीयत उलेमाएहिंद ने भी केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है. संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को ज्ञापन सौंपकर मस्जिद और कब्रिस्तान की सुरक्षा के लिए कदम उठाने का अनुरोध किया है. संगठन की ओर से मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी ने कहा कि यह स्थल NDMC की विरासत सूची में दर्ज है.
ज्ञापन में 1977 के दिल्ली गजट और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की संशोधित सूची का भी हवाला दिया गया है. जमीयत ने दिल्ली वक्फ बोर्ड और NDMC से रिपोर्ट मांगे जाने की बात भी कही है. संगठन ने मांग की है कि कानूनी विवाद का निपटारा होने तक मस्जिद को गिराने की कोई कार्रवाई नहीं की जाए.
ध्वस्तीकरण अभियान से 700 परिवारों के विस्थापन की आशंका
रेस कोर्स मस्जिद का विवाद उस बड़े अभियान से भी जुड़ा है, जिसके तहत प्रधानमंत्री आवास के आसपास के इलाके में अतिक्रमण हटाने और लोगों को दूसरी जगह बसाने की कार्रवाई की जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक, इस अभियान के कारण करीब 700 परिवारों के विस्थापित होने की आशंका है. इलाके के निवासियों को परिसर खाली करने के लिए कहा गया है. अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित परिवारों के लिए कुछ किलोमीटर दूर वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की गई है.
दिल्ली हाईकोर्ट ने 19 अक्टूबर को इलाके में झुग्गी बस्तियों से जुड़े निवासियों को हटाने की कार्रवाई को मंजूरी दी और पुनर्वास स्थल पर शिक्षा, परिवहन तथा स्वच्छता जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई. प्रभावित लोगों को सावदा घेवरा पुनर्वास कॉलोनी में बसाए जाने की जानकारी सामने आई है, जो इलाके से करीब 45 किलोमीटर दूर बताई गई है.



