बिहार में ‘ऑपरेशन लोटस’ की आहट! अनंत के बागी तेवर और ललन सिंह की टेढ़ी चाल से हिला नीतीश का किला

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण अनंत सिंह पर कार्रवाई क्या हुई, पूरी जदयू जड़ से हिल गई। मोकामा के विधायक अनंत सिंह का ये कहना कि नीतीश जी के बिना पार्टी समाप्त हो गई है, ये कितना सच है, ये तो समय बताएगा। मगर, जिस ‘ ऑपरेशन लोटस ‘ की बात चर्चा में थी, जो ‘ऑपरेशन लोटस’ हाल के दिनों में शिव सेना के दिग्गजों ने झेली, क्या इसी तरह का ‘ऑपरेशन’ करने में बीजेपी नेतृत्व सफल हो गया? क्या मान लिया जाए कि जिसकी चर्चा एमएलसी चुनाव में हो रही थी कि अनंत सिंह के विरोध के सहारे केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने क्या ठोक दी जदयू की ताबूत में अंतिम कील?

12 सीटें भी नहीं मिलेगी: अनंत
विधायक अनंत सिंह के निलंबन के बाद भी जिस तरह से अपना विरोध पार्टी नेतृत्व के प्रति व्यक्त किया, उससे तो साफ लगता है कि उनके लिए पार्टी कोई मायना नहीं रखती। साफ-साफ कहा कि हम तो पूछने भी नहीं जाएंगे कि काहे हमको पार्टी से निकाले। नीतीश जी के बाद इस पार्टी में कोई कुछ नहीं है। आने न दीजिए चुनाव 12 सीटें भी नहीं मिलेगी। विधायकी चले जाने पर भी अनंत सिंह ने कहा चला जाएगा तो फिर चुनाव होगा। चुनाव होगा तो फिर जीतेंगे।

सबसे चौंकाने वाली बात तो ये कह दी कि किसी पार्टी में नहीं जाएंगे, अपनी पार्टी बनाएंगे। जिस तरह से निलंबन को लेकर पटना, मोकामा या फिर अन्य जगह विरोध होना शुरू हुआ है, उससे तो साफ लगता है कि सवर्ण विरोध का जो अध्याय भारत तिवारी एनकाउंटर से शुरू हुआ था उस अग्नि को और भी भड़का जाएंगे अनंत सिंह।

नीतीश से नहीं मिल पाए ललन सिंह
पार्टी विरोधी गतिविधियों के हवाले से जदयू नेतृत्व ने कार्रवाई को हरी झंडी दी, मगर आश्चर्यजनक ये है कि अपने ही किए गए निर्णय का सामना करने से प्रदेश का शीर्ष नेतृत्व अपने ही नेताओं से मिलने से कतराने लगे? क्या कोई सोची-समझी रणनीति तो नहीं कि जब कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा बाहर थे तो कार्रवाई हुई! तो क्या केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने ‘ऑपरेशन लोटस’ को अंजाम दे दिया?