हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और हाईस्पीड डीजल इस्तेमाल करने वालों को अब थोड़ा ज्यादा पैसा खर्च करना होगा. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने पेट्रोल और हाईस्पीड डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर का ‘अनाथ और विधवा सेस’ लगाने का फैसला किया है. राज्य सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, यह नया सेस 11 अगस्त की आधी रात से लागू हो गया है.

राज्य के टैक्स और आबकारी विभाग की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, राज्य में पेट्रोल और हाईस्पीड डीजल की पहली बिक्री के समय प्रति लीटर 60 पैसे का सेस लगाया गया है. इसका मतलब है कि पेट्रोल पंपों पर बिक्री के हर चरण पर अलग से सेस नहीं लिया जाएगा, बल्कि इसे ‘पहली बिक्री के बिंदु’ पर वसूला जाएगा. इस नए सेस से मिलने वाले रेवेन्यू का इस्तेमाल सीधे राज्य की कल्याणकारी योजनाओं के लिए किया जाएगा.
‘अनाथ और विधवा कल्याण कोष’ में जमा होगी रकम
कानून यह भी स्पष्ट करता है कि इस सेस से इकट्ठा होने वाला रेवेन्यू ‘अनाथ और विधवा कल्याण कोष’ में जमा किया जाएगा और अनाथों व विधवाओं के कल्याण के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. गवर्नर की मंज़ूरी के बाद यह अधिनियम अप्रैल 2026 में लागू हुआ.
The Himachal Pradesh government has officially imposed a Widow and Orphan Cess of 60 paise per litre on petrol and highspeed diesel, with the levy coming into force from midnight on August 11, 2026.
According to the notification, the Orphan and Widow Cess will be charged at Re pic.twitter.com/STG5CrxSGO
— ANI August 11, 2026
बता दें कि हिमाचल प्रदेश में ‘अनाथ और विधवा सेस’ का प्रावधान इस साल की शुरुआत में विधानसभा द्वारा पारित ‘हिमाचल प्रदेश वैल्यू एडेड टैक्स अधिनियम, 2026’ के माध्यम से लाया गया था. कानून पेट्रोल और हाईस्पीड डीजल पर अधिकतम ₹5 प्रति लीटर तक सेस लगाने की अनुमति देता है. लेकिन सरकार ने 60 पैसे की बढ़ोतरी नोटिफिकेशन जारी किया है.
जानें क्या बोलीं हिमाचल सरकार
हिमाचल प्रदेश सरकार का कहना है कि हालांकि राज्य में अनाथ बच्चों और आर्थिक रूप से कमजोर विधवाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं पहले से ही चल रही हैं, लेकिन उन्हें सहारा देने के लिए एक समर्पित और स्थायी वित्तीय स्रोत की जरूरत महसूस की जा रही थी। ईंधन पर यह सेस लगाने का फैसला इसी मकसद से लिया गया है.
जरूरतमंदों को मिलेगी मदद
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सेस से मिलने वाले संसाधनों का इस्तेमाल इन योजनाओं को मजबूत करने और जरूरतमंदों को मदद पहुंचाने के लिए किया गया है. सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस उपाय का मकसद उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं है.



