वैश्विक अनिश्चितता के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है. देश के औद्योगिक उत्पादन में मई महीने के दौरान शानदार 5.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. अप्रैल में यह आंकड़ा 4.9 प्रतिशत पर था. कारखानों में बढ़ती गतिविधियां और बिजली उत्पादन में आए जोरदार उछाल ने इस विकास को नई ऊर्जा दी है. फैक्ट्रियों में बढ़ता उत्पादन इस बात का संकेत है कि बाजार में मांग पूरी तरह से बरकरार है. उत्पादन में यह तेजी अर्थव्यवस्था के पहिए को तेजी से घुमाती है, जिससे आने वाले समय में रोजगार और कारोबार के नए अवसर पैदा होते हैं.

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का शानदार प्रदर्शन

आईआईपी इंडेक्स में 76 फीसदी का भारीभरकम वजन रखने वाला मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अर्थव्यवस्था की रीढ़ साबित हो रहा है. मई में इस सेक्टर ने 5.5 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्ज की है. सबसे ज्यादा 20.8 प्रतिशत का उछाल इलेक्ट्रिकल उपकरणों के निर्माण में देखा गया है. इसके अलावा, मेटल से बने उत्पादों में 15.5 प्रतिशत, मोटर वाहनों में 14.5 प्रतिशत तथा कंप्यूटरइलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में 11.4 प्रतिशत की जबरदस्त तेजी दर्ज की गई है. भारी मशीनरी और पूंजीगत वस्तुओं के क्षेत्र में हो रहा यह विस्तार इस बात की गवाही देता है कि देश में निवेश की मांग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च लगातार ऊंचे स्तर पर बना हुआ है.

भीषण गर्मी में बिजली उत्पादन की भारी मांग

मई महीने की तपती गर्मी ने भी औद्योगिक आंकड़ों को एक बड़ा सहारा दिया. बिजली और गैस सप्लाई इस महीने ओवरऑल ग्रोथ के सबसे बड़े ड्राइवर बनकर उभरे, जिसमें 9.9 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि देखी गई. अगर सिर्फ बिजली उत्पादन की बात करें तो यह 11.1 प्रतिशत तक बढ़ गया. दरअसल, गर्मियों में एसी, कूलर तथा अन्य उपकरणों के इस्तेमाल से बिजली की मांग अपने चरम पर होती है, जिसका सीधा असर इन शानदार आंकड़ों के रूप में सामने आया है.

शहरी इलाकों में बढ़ी खरीदारी की ताकत

निवेश से जुड़े कैपिटल गुड्स के उत्पादन में 12.9 प्रतिशत का तगड़ा उछाल आया है, जो एक साल पहले इसी अवधि में 9.5 प्रतिशत था. इसी तरह, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 7.2 फीसदी की वृद्धि हुई है. यह मजबूती दिखाती है कि शहरों में लोगों के हाथ में पैसा है और वे अपनी पसंद की चीजों पर खुलकर खर्च कर रहे हैं. हालांकि, रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली चीजों की ग्रोथ 3.6 प्रतिशत रही.

खनन क्षेत्र में थोड़ी सुस्ती

जहां एक तरफ अर्थव्यवस्था के कई हिस्से दौड़ रहे हैं, वहीं माइनिंग सेक्टर थोड़ा पीछे छूटता दिखा. मई में यह सेक्टर 1.6 प्रतिशत सिकुड़ गया. कच्चा तेल, गैस तथा नॉनमैटेलिक मिनरल के कम उत्पादन की वजह से खनन क्षेत्र दबाव में रहा. इसके साथ ही, कपड़ों के उत्पादन और रिफाइंड पेट्रोलियम जैसे उपभोक्ता से जुड़े कुछ अन्य सेक्टर्स में भी फिलहाल नरमी देखी गई है.