CJP Jantar Mantar Protest Celebration : शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर मिलते ही दिल्ली के जंतरमंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच एक तरफ राहत तो दूसरी तरफ गजब का उत्साह देखने को मिला। हफ्तों से सड़क पर डटे छात्रों ने ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ के गगनभेदी नारे लगाए। हालांकि, जीत के इस माहौल के बीच एक भावुक क्षण भी आया, जब सभी छात्रों ने नीट पेपर लीक विवाद के तनाव में अपनी जान गंवाने वाले साथी छात्रों की याद में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

‘झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए’
सीजेपी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्रों की एकता की जीत बताया। ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। उन्होंने कहा कि झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए। इसे लोकतंत्र की जीत बताते हुए दिपके ने कहा कि लोकतंत्र का मतलब डरना नहीं बल्कि बोलना है।
सड़क पर संग्राम और लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले
इस इस्तीफे से ठीक पहले शनिवार दोपहर जंतरमंतर के पास माहौल बेहद हिंसक और तनावपूर्ण हो गया था।
प्रदर्शन और पथराव
दोपहर लगभग 1:30 बजे LIC बिल्डिंग के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हो गई। इस दौरान पथराव हुआ और कुछ गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई।
पुलिस की कार्रवाई
स्थिति को बेकाबू होता देख पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। इस भीषण टकराव में कई पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारी छात्रों को चोटें आईं। इसी चौतरफा दबाव के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। विपक्षी दलों और आंदोलनकारी समूहों का स्पष्ट कहना था कि महज ‘मंत्रालय बदलना’ कोई समाधान नहीं है, मंत्री को पद छोड़ना ही होगा।
आंदोलनकारी छात्रों का दर्द और बुलंद आवाज
सड़क पर संघर्ष कर रहे छात्रों का कहना है कि यह लड़ाई केवल एक मंत्री के इस्तीफे की नहीं, बल्कि तंत्र में बैठे उन लोगों को यह याद दिलाने की है कि लोकतंत्र में जनता और छात्र ही सबसे बड़े हैं।।जो खुद को बादशाह समझने लगे हैं, उन्हें यह अहसास होना ज़रूरी है कि वे हमारी ही बदौलत वहां बैठे हैं। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। पिछले एक महीने से हमसे कहा जा रहा था कि यह सरकार किसी की नहीं सुनती, लेकिन आज साबित हो गया कि अगर आवाज़ बुलंद हो तो सरकार को झुकना ही पड़ता है। हमने लाठियां खाई हैं, पर हम पीछे हटने वालों में से नहीं हैं।
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छात्रों की प्रमुख मांगें
इस्तीफे के बाद भी छात्रों ने अपना धरना पूरी तरह खत्म नहीं किया है और सरकार के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखी हैं। जिसमें..
1 करोड़ रुपये का मुआवजा: नीट पेपर लीक कांड के कारण जान गंवाने वाले और प्रभावित हुए सभी पीड़ित छात्रों के परिवारों को 11 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।
सारे मुकदमे वापस हों: आंदोलन के दौरान जिन भी छात्रों पर पुलिस केस दर्ज किए गए हैं, उन्हें बिना शर्त तुरंत वापस लिया जाए।
दोषियों पर कार्रवाई: 20 जुलाई को प्रदर्शनकारी छात्रों पर बर्बरता करने वाले असामाजिक तत्वों और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
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