हिमाचली खबर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को मंत्रिमंडल की बैठक हुई. इस दौरान 12 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. बैठक में सबसे बड़ा फैसला पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को लेकर रहा. सरकार ने ग्रामीण स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों को आनुपातिक आरक्षण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है. कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है. यह फैसला न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में लिया गया है.

आयोग का मुख्य उद्देश्य राज्य की त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में पिछड़ेपन की प्रकृति, उसके सामाजिकआर्थिक प्रभावों तथा वर्तमान स्थिति का अध्ययन करना है. इसके आधार पर OBC वर्ग को निकायवार आनुपातिक आरक्षण प्रदान करने की सिफारिश की जाएगी.
आयोग का स्वरूप और कार्यकाल
जानकारी के मुताबिक आयोग में पांच सदस्य होंगे, जिनकी नियुक्ति राज्य सरकार पिछड़े वर्गों से संबंधित मामलों का विशेष ज्ञान रखने वाले व्यक्तियों में से करेगी. इनमें से एक सदस्य उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे, जिन्हें आयोग का अध्यक्ष बनाया जाएगा. आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों का कार्यकाल सामान्य रूप से नियुक्ति से 6 महीने का होगा.
प्रदेश में फिलहाल उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1947 और उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 के तहत त्रिस्तरीय पंचायतों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान है. इनके लिए अलगअलग नियमावलियां भी लागू हैं.
अधिकतम 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान
संविधान के अनुच्छेद 243 घ के अनुरूप राज्य सरकार इन आरक्षणों को जनसंख्या अनुपात के आधार पर तय करती है. पिछड़े वर्गों के लिए अधिकतम 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है. हालांकि, उच्चतम न्यायालय के हालिया फैसलों के मद्देनजर अब अधिक सटीक, डेटा आधारित और आयोग की सिफारिशों पर आधारित आरक्षण व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है.
जातिवार आंकड़ों की समीक्षा
उत्तर प्रदेश त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव ओबीसी आयोग सभी 75 जिलों में बैठक, जातिवार आंकड़ों की समीक्षा के बाद ही आरक्षण संबंधी अपनी रिपोर्ट सौंपेगा. इसमें 6 महीनों का समय लगेगा है. ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनाव आरक्षण की जो सिफारिशें आएंगी, उस पर फिर राजनीतिक दलों और अन्य संबंधित पक्षों से आपत्तियां मांगी जाएगी, जिनके निस्तारण करने में भी एक महीने का वक्त लग सकता है.
पंचायत चुनाव का कार्यकाल
रिपोर्ट सितंबर अक्टूबर महीने में आएगी है. लेकिन अगले साल मार्च में विधानसभा चुनाव को देखते हुए चार महीने पहले पंचायत चुनाव कराना सरकार के लिए राजनीतिक जोखिम भरा फैसला हो सकता है. संभावना है कि चुनाव 2027 विधानसभा चुनाव के बाद हो. जबकि पंचायत चुनाव का कार्यकाल में मई महीने में ख़त्म हो रहा. ऐसे में सरकार ग्राम पंचायत प्रधान को प्रशासक बना सकती है या फिर ADO पंचायत को.



