
कानपुर से साइबर ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां शातिर ठग खुद को डीसीपी क्राइम बताकर लोगों को फोन करते थे और उनके मोबाइल पर पोर्न वीडियो देखने का झूठा आरोप लगाकर गिरफ्तारी का डर दिखाते थे। इसी बहाने वे यूपीआई और ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए हजारों रुपये ऐंठ लेते थे। पुलिस ने इस संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो सगे भाइयों समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
जंगल और खेतों से चल रहा था ठगी का कॉल सेंटर
जांच में सामने आया कि आरोपी शहर से दूर जंगलों और खेतों में बैठकर कॉल करते थे ताकि उनकी लोकेशन ट्रेस न हो सके। गिरोह का एक सदस्य खुद को पुलिस अधिकारी बताकर बात करता था, जबकि दूसरा मोबाइल में पहले से सेव पुलिस सायरन और गाड़ियों के हॉर्न की आवाज चलाता था, जिससे पीड़ित को लगता था कि पुलिस वाकई उसके घर पहुंचने वाली है।
प्रमोद को आई कॉल से खुला राज
श्रावस्ती जिले के प्रमोद कुमार को भी इसी तरह की एक कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को कानपुर साइबर क्राइम का अधिकारी बताते हुए कहा कि उसके मोबाइल डेटा में अश्लील वीडियो देखने के सबूत मिले हैं और उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज हो चुका है। कहा गया कि अगर तुरंत पैसे नहीं भेजे तो पुलिस टीम उसे गिरफ्तार करने घर पहुंच जाएगी।
डर के मारे प्रमोद घबरा गया। बाद में उसने यह बात एक परिचित को बताई, जिसने समझाया कि यह साइबर ठगी हो सकती है। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे हैं। इसके बाद प्रमोद ने कानपुर साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई।
डर दिखाकर 46 हजार रुपये ऐंठे
डीसीपी क्राइम अतुल श्रीवास्तव के मुताबिक, ठगों ने प्रमोद से पहले 50 हजार रुपये मांगे। जब उसने इतनी रकम न होने की बात कही, तो जितने पैसे हो सकें उतने ट्रांसफर करने को कहा गया। घबराए प्रमोद ने यूपीआई के जरिए 46 हजार रुपये भेज दिए।
शिकायत के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई
17 दिसंबर को मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की। कॉल करने वालों की कानपुरिया बोली और लहजे से अहम सुराग मिला। इसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने कानपुर देहात के गजनेर इलाके में छापेमारी कर पांच आरोपियों को धर दबोचा।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मन्नहापुर निवासी सगे भाई सुरेश और दिनेश, दुर्गापुरवा-नारायणपुर का पंकज सिंह और बर्रा-2 इलाके के अमन विश्वकर्मा व विनय सोनकर शामिल हैं। सभी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
पढ़ाई और जानकारी का किया गलत इस्तेमाल
पुलिस के अनुसार पंकज सिंह बीए पास है और गिरोह में सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा है। बाकी आरोपी आठवीं से इंटर तक पढ़े हैं। ये लोग अखबारों और सोशल मीडिया से पुलिस अफसरों की तैनाती और गतिविधियों की जानकारी जुटाते थे और उसी के आधार पर खुद को कमिश्नरेट का अधिकारी बताकर लोगों को कॉल करते थे।
पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने अधिकारियों के नाम का भी दुरुपयोग किया। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गिरोह तक पहुंचा गया है, जबकि कुछ अन्य लोगों की तलाश अभी जारी है।