मध्य प्रदेश के जबलपुर की पहचान बन चुकी प्राकृतिक धरोहर बैलेंसिंग रॉक के आसपास निर्माण को लेकर चिंता बढ़ गई है. मदन महल की पहाड़ियों पर स्थित यह विशाल चट्टान कई भूकंपों के झटके झेलने के बावजूद अपनी जगह पर टिकी हुई है. लेकिन अब इससे महज 20 फीट की दूरी पर बहुमंजिला इमारत का निर्माण हो रहा है. ऐसे में इस प्राकृतिक धरोहर की सुरक्षा और निर्माण की अनुमति को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. पीजी नाजपांडे ने बैलेंसिंग रॉक के आसपास जमीन के स्वामित्व को लेकर सवाल उठाए हैं. उनका दावा है कि वर्ष 1910 के राजस्व रिकॉर्ड में खसरा नंबर 194 की करीब 30 एकड़ जमीन सरकारी दर्ज थी. हालांकि, अब इस क्षेत्र में महज 0.8 हेक्टेयर सरकारी जमीन बचने की बात कही जा रही है.
नाजपांडे का आरोप है कि समय के साथ कथित अतिक्रमण और स्वामित्व में बदलाव के कारण पहाड़ी के आसपास निर्माण बढ़ता गया. उन्होंने राजस्व रिकॉर्ड, नामांतरण दस्तावेज और जमीन के सीमांकन की जांच कराने की मांग की है. इन दावों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही हो सकेगी.
शाम होते ही शराबखोरी
डॉ. नाजपांडे ने बैलेंसिंग रॉक के आसपास साफसफाई और रखरखाव पर भी सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि शाम होते ही यहां शराबखोरी होती है. आसपास डिस्पोजल, शराब की बोतलें और कचरा बिखरा रहता है. उन्होंने खराब लाइटिंग का मुद्दा उठाते हुए कहा कि परिसर की देखरेख के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आती.
छोटे आधार पर टिकी विशाल चट्टान
बैलेंसिंग रॉक की खासियत यह है कि एक विशाल गोलाकार चट्टान दूसरी चट्टान के बेहद छोटे आधार पर संतुलित दिखाई देती है. इसे देखकर लगता है कि हल्कासा धक्का लगने पर भी यह गिर सकती है, लेकिन ऐसा अब तक नहीं हुआ है.
बताया जाता है कि वर्ष 1935 के भूकंप और वर्ष 1997 में आए 6.5 तीव्रता के भूकंप के दौरान भी यह चट्टान अपनी जगह पर बनी रही. अब इसके करीब निर्माण होने से भारी मशीनों के कंपन और जमीन की स्थिति पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई जा रही है.
निर्माण से खतरे की आशंका, तकनीकी जांच जरूरी
आर्कियोलॉजिकल विशेषज्ञ मनोहर सिंह उईके के मुताबिक, निर्माण में इस्तेमाल होने वाली भारी मशीनों से पैदा कंपन और पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से आसपास की जमीन प्रभावित हो सकती है. हालांकि, चट्टान को वास्तव में कितना खतरा है, इसका पता तकनीकी और भूवैज्ञानिक जांच के बाद ही चल सकेगा.
जिम्मेदारी को लेकर विभागों के अलगअलग बयान
पर्यटन विभाग के रीजनल मैनेजर नवीन शर्मा ने संरक्षण की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की बताई. वहीं, पुरातत्व विभाग के सीनियर गाइड राजकुमार का कहना है कि बैलेंसिंग रॉक उनके विभाग के अधीन नहीं है और इसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की है.
नगर निगम के भवन अधिकारी शैलेंद्र सिंह कौरव ने कहा कि उन्हें आसपास हो रहे निर्माण की जानकारी नहीं है. शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी और निर्माण अवैध पाए जाने पर कार्रवाई होगी. पर्यटन विभाग की ओर से यह भी कहा गया कि परिसर में अवैध निर्माण नहीं हुआ है और कलेक्टर से चर्चा के बाद संरक्षण के उपाय तय किए जाएंगे.
संरक्षण के लिए जांच और कार्रवाई जरूरी
बैलेंसिंग रॉक के आसपास जमीन के स्वामित्व, भवन निर्माण की अनुमति और संभावित भूवैज्ञानिक जोखिम की जांच जरूरी है. प्रशासन को राजस्व रिकॉर्ड और निर्माण संबंधी दस्तावेजों की पड़ताल के साथ विशेषज्ञों से तकनीकी आकलन कराना चाहिए. जबलपुर की इस प्राकृतिक पहचान को बचाने के लिए साफसफाई, रोशनी और नियमित निगरानी की व्यवस्था भी जरूरी है.



