निषाद के मातापिता ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया और कभी उन्हें दूसरों से कम महसूस नहीं होने दिया। इसी हिम्मत के साथ निषाद ने अपने एक हाथ की कमी को कमजोरी नहीं बनने दिया और ऊंची कूद में अपना करियर बनाने का फैसला किया।