भारत निर्वाचन आयोग , CEC ज्ञानेश कुमार और दो निर्वाचन आयुक्तों ने सुप्रीम कोर्ट में एक संयुक्त हलफनामा दायर किया है. इसमें कहा गया है कि CEC के कामकाज में रुकावट डालने की कोई भी कोशिश कानून के खिलाफ होगी. ECI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि CEC को केवल सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह ही हटाया जा सकता है. यह हलफनामा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज को चुनौती देने वाली याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया गया है.

ECI, CEC ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्तों संधू और जोशी की ओर से दायर इस संयुक्त हलफनामे में कहा गया है कि CEC के कामकाज में रुकावट डालने की कोशिश 2023 के कानून के खिलाफ है. सोमवार देर रात सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए लगभग 250 पन्नों के इस हलफनामे में कहा गया है कि CEC को उनके पद से उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को हटाया जाता है.
‘मीडिया रिपोर्ट को अदालत में सबूत नहीं माना जा सकता’
हलफनामे में कहा गया है कि CEC के भीतर के मतभेदों और उनके कथित एकतरफा या तानाशाहीपूर्ण कामकाज को लेकर आई मीडिया रिपोर्ट को अदालत में सबूत नहीं माना जा सकता. मीडिया रिपोर्टों के आधार पर दायर की गई याचिकाओं को अदालत में सुनवाई के योग्य भी नहीं माना जाना चाहिए.
ज्ञानेश कुमार के कामकाज को दी गई चुनौती
यह हलफनामा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज को चुनौती देने वाली याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया गया है. CEC के कामकाज को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेता शामिल हैं. वहीं याचिकाकर्ताओं में राकेश कुमार सिंह और वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी भी शामिल हैं.
‘एकतरफा फैसले लेने की कोई गुंजाइश नहीं’
इस हलफनामे से पता चलता है कि CEC और दोनों निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी एक ही राय रखते हैं. इसमें कहा गया है कि आयोग ने किसी भी समाचार एजेंसी को कोई आंतरिक नोट या फाइल न तो जारी की है और न ही जारी करने की अनुमति दी है. उन्होंने बताया कि अगर आयोग के सदस्यों के बीच कोई मतभेद होता है, तो ‘मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023’ की धारा 18 के अनुसार, बहुमत के नियम का पालन करते हुए फैसले लिए जाएंगे. हलफनामे में बताया गया है कि ECI में एकतरफा फैसले लेने की कोई गुंजाइश नहीं है. फैसलों की जांच कई स्तरों पर की जाती है.
हलफनामे में कहा गया है कि फैसले पहले एक चुनाव आयुक्त के पास भेजे जाते हैं, फिर दूसरे चुनाव आयुक्त के पास, और अंत में CEC के पास जाते हैं. चुनाव आयोग द्वारा मंजूर किए गए इन फैसलों को संबंधित फाइलों में दर्ज किया जाता है, जिन पर चुनाव आयुक्तों और CEC के हस्ताक्षर होते हैं. इसके बाद, चुनाव आयोग सचिवालय द्वारा इस फैसले की अधिसूचना जारी की जाती है और इसे लागू किया जाता है.
आपातकालीन स्थितियों में क्या होता है
हालांकि, ECI ने अपने हलफनामे में एक जगह यह माना है कि आपातकालीन स्थितियों में और खासकर जब तुरंत उचित आदेश जारी करना जरूरी हो, और जब CEC या किसी भी चुनाव आयुक्त का व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहना संभव न हो तब ECI के सदस्यों की मंजूरी इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से ली जाती है और बाद में इसे आधिकारिक फ़ाइल में दर्ज कर लिया जाता है. हलफनामे में कहा गया है कि महत्वपूर्ण कार्य सीधे पूरे आयोग के अधीन होते हैं. EC की बैठकों में लिए गए निर्णय या फ़ाइलों में दर्ज किए गए फैसलों पर चुनाव आयुक्तों और CEC के हस्ताक्षर होते हैं.



