बुधवार का दिन भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए भारी निराशा लेकर आया. अमेरिका और ईरान के बीच अचानक बढ़े सैन्य तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों में ऐसी आग लगाई कि भारतीय शेयर बाजार औंधे मुंह गिर गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड उछलकर 76 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. इस एक खबर ने सेंसेक्स को 600 अंकों से ज्यादा नीचे धकेल दिया. सबसे बुरी मार उन कंपनियों पर पड़ी है जिनका सीधा वास्ता कच्चे तेल से होता है. एयरलाइन कंपनियां, पेट्रोलडीजल बेचने वाली ऑयल मार्केटिंग कंपनियां तथा पेंट बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली.

इन दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट

कच्चे तेल के महंगे होने का सीधा असर एयरलाइंस के ईंधन तथा पेंट बनाने के कच्चे माल की लागत पर पड़ता है. यही वजह है कि बुधवार को इंटरग्लोब एविएशन के शेयर में निवेशकों ने जमकर बिकवाली की.

  1. IndiGo का शेयर 2.14 फीसदी का गोता लगाकर 5,281.20 रुपये पर बंद हुआ. दिन के कारोबार में यह 5,228.85 रुपये के निचले स्तर तक भी फिसल गया था.
  2. दूसरी तरफ SpiceJet के शेयरों में भी सुस्ती रही, जो 1.04 फीसदी टूटकर 11.41 रुपये पर आ गया.
  3. BPCL का शेयर 3.87 फीसदी के बड़े नुकसान के साथ 301.80 रुपये पर आ गया.
  4. इसी तरह HPCL के निवेशकों को भी तगड़ा झटका लगा, जहां शेयर 4.13 फीसदी गिरकर 389.20 रुपये पर पहुंच गया.
  5. कच्चे माल की लागत बढ़ने के डर से पेंट सेक्टर के दिग्गज शेयर Asian Paints ने भी घुटने टेक दिए, जो 1.52 फीसदी की कमजोरी के साथ 2,689.90 रुपये पर कारोबार करता दिखा.

क्यों भड़की कच्चे तेल की कीमतों में आग

शेयर बाजार में आई इस गिरावट की असली जड़ पश्चिम एशिया में भड़का नया विवाद है. होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हुए हालिया हमलों के बाद अमेरिका ने सख्त रुख अपनाया है. जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर 80 से ज्यादा ठिकानों पर सैन्य हमले किए हैं. इस कार्रवाई ने पूरे मध्यपूर्व में युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है.

ईरान ने भी इस हमले का कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है. मिसाइल तथा ड्रोन हमलों की लगातार आ रही खबरों ने दुनियाभर में तेल की सप्लाई बाधित होने का डर पैदा कर दिया है. इसी खौफ के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 3 फीसदी का तेज उछाल दर्ज किया गया. हालात तब और बिगड़ गए जब अमेरिका ने ईरान को तेल बेचने की जो प्रतिबंध छूट दे रखी थी, उसे भी तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया. अब ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की सप्लाई कम होने की आशंका से दाम आसमान छूने लगे हैं, जिसका सीधा खामियाजा भारतीय शेयर बाजार को भुगतना पड़ रहा है.

बाजार के मौजूदा हालात पर विशेषज्ञों की राय

इस पूरी स्थिति पर बाजार के जानकारों की पैनी नजर बनी हुई है. ब्लूमबर्ग की एक ताजा रिपोर्ट में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर ग्लोबल अफेयर्स की एसोसिएट डीन कैरोलिन किसैन ने अपनी राय रखी है. उनका मानना है कि अगर यह सैन्य तनाव आगे नहीं बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में आया यह मौजूदा उछाल लंबे समय तक नहीं टिकेगा. यानी हालात शांत होने पर बाजार जल्द ही वापसी कर सकता है.

दूसरी तरफ, भारतीय बाजार के संदर्भ में जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी. के. विजयकुमार ने चिंता जाहिर की है. उनका कहना है कि अमेरिकाईरान के बीच अचानक बढ़े इस तनाव ने बाजार के गणित को बिगाड़ दिया है. ब्रेंट क्रूड का 76 डॉलर के पार जाना एक बड़े खतरे की घंटी है, जिसने शेयर बाजार को एक बार फिर से भारी अनिश्चितता के भंवर में धकेल दिया है.

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