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साल 2014 में बिहार के रोहतास जिले में एक नहर से महिला का शव मिलने के बाद पुलिस के सामने उसकी पहचान की चुनौती थी. शव की पहचान के लिए शकुंतला देवी के भाई को बुलाया गया. उसने शव को अपनी लापता बहन का बताया. इसके बाद मामला सिर्फ गुमशुदगी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शकुंतला के पति अरुण मेहता और ससुरालवालों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हो गया. परिवार के लोगों को जेल जाना पड़ा और मामले को निपटाने के लिए पुश्तैनी जमीन तक बेचनी पड़ी.

लेकिन करीब एक दशक बाद इस कहानी में ऐसा मोड़ आया, जिसने पुराने मामले की पूरी तस्वीर पर सवाल खड़े कर दिए. पुलिस को जानकारी मिली कि जिस शकुंतला देवी को सालों पहले मृत मान लिया गया था, वह पड़ोसी राज्य झारखंड के एक गांव में जिंदा रह रही है. वहां वह अपनी पहचान बदलकर कांति देवी के नाम से रह रही थी.

10 पॉइंट्स में जानें पूरा मामला

1. शकुंतला देवी की शादी अरुण मेहता से 2002 में हुई थी. उनके वकील शाहनवाज अहमद के मुताबिक, शादी के बाद दहेज को लेकर परिवार में विवाद होते थे. आरोप है कि ससुराल पक्ष की ओर से उसे परेशान किया जाता था. 2014 में शकुंतला अपने परिवार को बिना बताए घर से चली गई थी. काफी तलाश के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला. इसके बाद 20 अगस्त 2014 को उसके भाई ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई.

2. शकुंतला की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने के दो दिन बाद देहरी मुफस्सिल थाना क्षेत्र के खांडा गांव के पास एक नहर में महिला का शव बरामद हुआ. शव की पहचान शकुंतला के भाई और स्थानीय चौकीदार ने उसकी बहन के रूप में की. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट अदालत में पेश की गई. इसके बाद शकुंतला की गुमशुदगी का मामला हत्या के केस में बदल गया.

3. शुरुआत में मामले में आईपीसी की धारा 498ए और दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत कार्रवाई की गई थी. शव मिलने के बाद हत्या से जुड़े प्रावधान भी जोड़ दिए गए. इस मामले में शकुंतला के पति अरुण मेहता, उनके पिता दिलीप मेहता और भाई गोविंद कुमार समेत अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया.

4. मेहता परिवार के अनुसार, बाद में यह मामला समझौते के जरिए खत्म हुआ. परिवार का दावा है कि समझौते के लिए शकुंतला के परिवार की ओर से 8 लाख रुपये की मांग की गई थी. समझौते के बाद परिवार ने मान लिया कि शकुंतला की मौत हो चुकी है. इसके बाद वर्षों तक यही धारणा बनी रही कि 2014 में नहर से मिला शव उसी का था.

5. करीब एक दशक बाद इस कहानी में नया मोड़ तब आया, जब दिलीप मेहता को जानकारी मिली कि उनकी बहू को झारखंड के एक गांव में देखा गया है. शकुंतला के वकील ने बताया “लगभग दो महीने पहले, दिलीप मेहता को पता चला कि उनकी बहू को झारखंड के एक गांव में देखा गया था.” इसके बाद परिवार ने रोहतास के पुलिस से संपर्क किया. पुलिस ने सूचना मिलने के बाद जांच शुरू की.

6. जांच के दौरान पुलिस ने महिला को झारखंड के गढ़वा जिले में कंडी थाना क्षेत्र के लभारी गांव में तलाश लिया. पुलिस के मुताबिक, वह वहां शकुंतला देवी के नाम से नहीं, बल्कि कांति देवी की पहचान के साथ रह रही थी.

7. एक अधिकारी ने बताया “वह शकुंतला देवी के बजाय कांति देवी बनकर रह रही थी और रत्तु सिंह नामक व्यक्ति के साथ रह रही थी.” इसके बाद पुलिस उसे रोहतास लेकर आई और सासाराम की अदालत में पेश किया गया.

8. शकुंतला के जिंदा मिलने के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल 2014 में बरामद शव की पहचान को लेकर खड़ा हो गया है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर वह शव किस महिला का था और उसकी पहचान शकुंतला के रूप में किस आधार पर हुई थी.

9. एक पुलिस अधिकारी ने कहा “मामले की अब नए सिरे से जांच की जा रही है। हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि पहले किसका शव बरामद हुआ था और उसकी पहचान शकुंतला के रूप में कैसे हुई. पूरी जांच के बाद, किसी भी प्रकार की गड़बड़ी में शामिल पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी.”

10. शकुंतला के जिंदा मिलने के बाद इस मामले की सबसे बड़ी गुत्थी अब उस अज्ञात महिला के शव की पहचान बन गई है. जिस शव को करीब 10 साल पहले शकुंतला का मानकर हत्या का मामला चलाया गया था, उसकी असली पहचान अब तक सामने नहीं आई है.