भारत में ट्रैफिक चालान कटने के बाद कई लोग सोचते हैं कि इसे बाद में भर देंगे. लेकिन यही बाद में कई बार हफ्तों और महीनों में बदल जाता है. लोगों को लगता है कि कुछ समय बाद चालान अपने आप खत्म हो जाएगा. ऐसा नहीं होता. ट्रैफिक चालान को नजरअंदाज करना कोई ऐसा मामला नहीं है जो समय के साथ अपने आप खत्म हो जाए. अगर चालान का भुगतान नहीं किया जाता है तो आगे चलकर मामला कोर्ट तक पहुंच सकता है और वाहन से जुड़े कई कामों में परेशानी हो सकती है.

चालान रिकॉर्ड में बना रहता है

ईचालान का सबसे पहला असर यह होता है कि वह आपके वाहन के रिकॉर्ड में बना रहता है. चालान आपके वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर से जुड़ा होता है. सामान्य तौर पर सिर्फ समय गुजरने से चालान खत्म नहीं होता. कुछ राज्यों और कुछ तरह के ट्रैफिक उल्लंघनों में देर से भुगतान करने पर ज्यादा जुर्माना भी लग सकता है. इसके अलावा वाहन से जुड़ी जानकारी चेक करने पर पेंडिंग चालान सामने आ सकता है.

मामला कोर्ट तक पहुंच सकता है

हर चालान हमेशा सिर्फ ऑनलाइन भुगतान तक सीमित नहीं रहता. अगर तय समय के अंदर चालान का भुगतान नहीं किया गया तो ट्रैफिक अथॉरिटी मामले को ट्रैफिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में भेज सकती है. इसके बाद वाहन मालिक को कोर्ट में पेश होने के लिए नोटिस मिल सकता है. यह नोटिस रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भी भेजा जा सकता है. अगर आपका मोबाइल नंबर पुराना है या आपने नोटिस नहीं देखा, तो आपको सुनवाई की जानकारी समय पर नहीं मिल पाएगी.

कोर्ट में नहीं पहुंचे तो क्या होगा?

अगर कोर्ट की तारीख पर वाहन मालिक मौजूद नहीं होता और न ही तारीख आगे बढ़ाने के लिए आवेदन करता है, तो कुछ मामलों में कोर्ट उसकी गैरमौजूदगी में फैसला कर सकती है. इसे Exparte कार्रवाई कहा जाता है. इसके बाद कोर्ट की ओर से समन जारी हो सकता है. इसका मतलब है कि मामला अब सिर्फ मोबाइल पर आए एक चालान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बन गया है.

लाइसेंस और RC पर भी असर

लंबे समय तक चालान का मामला हल नहीं होने पर वाहन को सरकारी वाहन रिकॉर्ड सिस्टम में फ्लैग किया जा सकता है. इससे भविष्य में RC से जुड़े काम या रिन्यूअल के समय परेशानी हो सकती है. गंभीर मामलों में, जैसे खतरनाक ड्राइविंग, बहुत ज्यादा स्पीड या नशे में गाड़ी चलाने जैसे उल्लंघनों में कोर्ट लाइसेंस को सस्पेंड या रद्द करने की कार्रवाई की सिफारिश भी कर सकती है.

कार बेचते समय भी आएगी परेशानी

पेंडिंग चालान का असर कार बेचने के समय भी पड़ सकता है. खरीदार या कार खरीदने वाला प्लेटफॉर्म वाहन का रिकॉर्ड चेक कर सकता है. अगर कई चालान पेंडिंग हैं तो खरीदार कीमत कम करने की कोशिश कर सकता है या डील करने से पीछे भी हट सकता है. इंश्योरेंस के समय भी वाहन का रिकॉर्ड कुछ मामलों में चेक किया जा सकता है. हालांकि इसका प्रभाव पॉलिसी और इंश्योरेंस कंपनी के नियमों पर निर्भर करेगा.

चालान पेंडिंग है तो क्या करें?

अगर आपको लगता है कि आपके वाहन पर कोई पुराना चालान हो सकता है, तो सबसे अच्छा तरीका है कि पहले उसका स्टेटस चेक करें. ऑनलाइन चालान का भुगतान जल्दी किया जा सकता है, जबकि कोर्ट में भेजे गए चालान के लिए अलग प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है. कई मामलों में Virtual Court की सुविधा भी उपलब्ध होती है. अगर मामला कोर्ट में पहुंच चुका है, तो संबंधित कोर्ट की प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करनी होगी.

सीधी बात यह है कि चालान को नजरअंदाज करने से समस्या खत्म नहीं होती, बल्कि समय के साथ मामला ज्यादा जटिल हो सकता है. इसलिए अगर कोई चालान पेंडिंग है तो उसे जल्द चेक करके निपटाना बेहतर है.