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इस उम्र के बाद बच्चों के साथ सोना बंद कर दे मां बाप, वरना बाद में पछताना पड़ेगा.

इस उम्र के बाद बच्चों के साथ सोना बंद कर दे मां बाप, वरना बाद में पछताना पड़ेगा.

इस उम्र के बाद बच्चों के साथ सोना बंद कर दे मां बाप, वरना बाद में पछताना पड़ेगा.

हर बच्चा अपने मां बाप की जान होता है। उनकी यही कोशिश होती है कि वह अपने बच्चों का अच्छे से ध्यान रखे। उन्हें कोई तकलीफ न होने दे। उन्हें सुरक्षित महसूस कराए। इसलिए कई पेरेंट्स अपने बच्चों को साथ सुलाना पसंद करते हैं। खासकर भारत में तो बच्चों के बड़े हो जाने के बाद भी माता पिता उनके साथ बेड शेयर करते हैं।

लेकिन ये सही नहीं है। एक्सपर्ट्स की माने तो एक उम्र के बाद मां बाप को बच्चों संग बेड शेयर करना छोड़ देना चाहिए। ऐसा न करना पेरेंट्स और बच्चों दोनों के लिए नुकसानदायक साबित होता है। तो वह आखिर कौन सी स्टेज है जब आपको अपने बच्चों को सोने के लिए अलग बेड दे देना चाहिए? चलिए जानते हैं।
इस उम्र में बच्चों के साथ न सोए मां बाप

विशेषज्ञों की माने तो मां बाप को बच्चों की प्यूबर्टी या प्री-प्यूबर्टी स्टेज में उनके साथ सोना बंद कर देना चाहिए। यह वह स्टेज होती है जब बच्चों की बॉडी यौन रूप के लिए परिपक्व होना शुरू कर देती है। इस दौरान बच्चों के शरीर और हार्मोन्स में कई बदलाव होते हैं। उसके सोच विचार बदलने लगते हैं। वह इमोशनल अप्स एंड डाउन से होकर गुजरता है।

प्यूबर्टी लड़कियों में 11 साल की उम्र में तो लड़कों में 12 साल की उम्र में आती है। हालांकि 8 से 13 साल की उम्र के बीच लड़कियों में प्यूबर्टी का आना सामान्य होता है। इस दौरान उनका मासिक धर्म शुरू होता है। स्तन बड़े होते हैं। दूसरी ओर लड़कों में 9 से 14 साल की उम्र के बीच प्यूबर्टी आ सकती है। इस दौरान इनके प्राइवेट पार्ट पर बाल उगने लगते हैं। किसी किसी की हल्की मूँछें भी आ जाती है।
पर्सनल स्पेस देना है जरूरी

प्यूबर्टी में बच्चों को पर्सनल स्पेस देना बेहद जरूरी होता है। इससे वह सहज महसूस करते हैं। अपने शारीरिक और मानसिक बदलावों को अच्छे से हैंडल कर पाते हैं। उन्हें इसे लेकर शर्मिंदा नहीं होना पड़ता है। इसके अलावा नींद को लेकर हर किसी की अलग-अलग जरूरतें होती है। ऐसे में बच्चों के साथ सोना आपकी और बच्चों की दोनों की नींद की क्वालिटी खराब कर सकता है।

यदि आपका बच्चा अकेले या आपके बिना नहीं सो पाता तो आप उसे एक अलग बेड दे। उसे अलग कमरे में सोने में डर लगे तो अपने ही कमरे में उसका अलग बिस्तर लगा दे। इससे वह अच्छे से और खुलकर नींद ले पाएगा। वहीं छोटे बच्चों को अलग सुलाना हो तो आप कुछ देर उनके पास सो सकते हैं। फिर वहां से जा सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि 12 महीने से कम उम्र के बच्चों को कभी एक बेड पर नहीं सुलाना चाहिए। इससे उसकी दम घूँटने स मौत हो सकती है। इसे टेक्निकल भाषा में SIDS यानि सडन इंफेंट डेथ सिंड्रोम भी कहते हैं।

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