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निर्वस्त्र होकर कभी नहीं करने चाहिए ये 4 काम, आती है द्ररिद्रता, चरित्र में पहुंचती है बडी हानि

हमारे सनातन धर्म में कई सारे पुारण और उपनिषद है, जो कि व्यक्ति को सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते है। वह हमें जीवन जीने का ढंग बताते है। इन शास्त्रों और पुराण के अनुसार बताया जाता है कि इंसान को क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए।

 

हिंदू धर्म में विष्णु पुराण को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। उसमें बताई गई सभी बातें व्यकित को माननी चाहिए। आप और हम आधुनिक युग में आ चूके है, ऐसे में काफी कम लोग है जो धर्म, पुराण आदि सब बातों में इतना रस लेते हो। सभी लोग अपनी तरक्की करने पर ध्यान देते है। ऐसे में कुछ लोग ऐसे भी है जो कि धर्म-कर्म में भरोसा करते है।

निर्वस्त्र होकर भूलसे भी नही करने चाहिए ये 4 काम

आप को जानकारी के लिए बता दें कि विष्णु पुराण के अनुसार माना गया है कि निर्वस्त्र होकर स्नान करना हमेंशा पाप के समान माना गया है। कहा जाता है कि जब भी आप स्नान करें तब आप के शरीर पर कपडे अवश्य होने चाहिए। निर्वस्त्र होकर नहाने से जल देवता अपमान होता है।

विष्णु पुराण के अनुसार व्यकित को भूलवश भी निर्वस्त्र होकर कभी नहीं सोना चाहिए। क्योंकि निर्वस्त्र होकर सोना, निर्वस्त्र होकर नहाने जितना बडा पाप होता है।

पुराणो में कहा जाता है कि रात्रि काल में मनुष्य से मिलने उसके पूर्वज और पितृजन आते है, ऐसे में अगर वे आप को निर्वस्त्र अवस्था में देखेंगे तो उन्हें बुरा लगेगा और वे आपसे बिना मिले चले जाएंगे। इसलिए निर्वस्त्र सोने को स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक माना गया है।

हमारे सनातन धर्म में स्नान करने के बाद अपने हाथों में जल लेकर देवताओं को अर्पित किया जाता है। लेकिन आप को बता दें कि निर्वस्त्र होकर अगर आप देवताओं को जल अर्पित करते है तो इससे देवताओं का अपमान होता है।

ऐसा करने वाले व्यक्ति के चरित्र की हानि भी होती है। पुराण के अनुसार कहा गया है कि ईश्वर की आराधना करते समय हमेंशा बिना सिले हुए कपडे पहनने चाहिए।

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