Dehradun News: उत्तराखंड में अब हर महीने की 9 तारीख को सुबह ठीक 11 बजे भूकंप का सायरन बजेगा. अगर इस दौरान आपको सायरन की आवाज सुनाई दे तो घबराने की जरूरत नहीं है. यह किसी वास्तविक भूकंप की चेतावनी नहीं होगी, बल्कि राज्य में लागू भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के नियमित परीक्षण का हिस्सा होगा. सरकार ने यह व्यवस्था इसलिए शुरू की है, ताकि सिस्टम में लगे सेंसर और सायरन की कार्यक्षमता की जांच की जा सके. साथ ही लोग भी सायरन की आवाज से परिचित हो सकें और वास्तविक भूकंप आने पर इसे पहचानकर तुरंत सावधानी बरत सकें.

9 तारीख को हर महीने होगा सिस्टम का टेस्ट
सरकार के मुताबिक, हर महीने की 9 तारीख को सुबह 11 बजे प्रदेश में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के तहत लगाए गए सायरन का परीक्षण किया जाएगा. इस दौरान बजने वाला सायरन सिर्फ सिस्टम टेस्ट का हिस्सा होगा. इसका मतलब यह नहीं होगा कि उस समय भूकंप आने वाला है. सरकार का मानना है कि नियमित परीक्षण से तकनीकी व्यवस्था की कमियों का समय रहते पता लगाया जा सकेगा. साथ ही सायरन खराब होने या सेंसर में किसी तरह की समस्या होने पर उसे ठीक किया जा सकेगा.
169 सेंसर और 112 सायरन लगाए गए
उत्तराखंड भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील राज्य है. राज्य का बड़ा हिस्सा भूकंपीय जोन चार और पांच में आता है. ऐसे में भूकंप आने से पहले मिलने वाली कुछ सेकंड की चेतावनी भी काफी अहम हो सकती है. फिलहाल प्रदेश में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के तहत 169 सेंसर और 112 सायरन लगाए गए हैं. सेंसर लगातार भूकंपीय गतिविधियों पर नजर रखते हैं. भूकंप की हलचल का पता चलने पर सिस्टम संबंधित क्षेत्रों में चेतावनी पहुंचाने का काम करता है.
भूदेव ऐप पर भी सुनाई देगा सायरन
सिर्फ सायरन ही नहीं, बल्कि जिन लोगों के मोबाइल में भूदेव ऐप डाउनलोड है, उन्हें भी टेस्ट के दौरान अलर्ट और सायरन की आवाज सुनाई देगी. इसके लिए मोबाइल में इंटरनेट और लोकेशन ऑन रखना जरूरी होगा. सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे भूदेव ऐप को अपने मोबाइल में डाउनलोड कर उसे अपडेटेड रखें, ताकि वास्तविक भूकंप की स्थिति में समय पर चेतावनी मिल सके.
लोगों को सायरन की आवाज से परिचित कराना मकसद
सरकार का मकसद सिर्फ तकनीकी सिस्टम की जांच करना नहीं है. इसके जरिए लोगों को भी भूकंप की चेतावनी प्रणाली से जोड़ने की कोशिश की जा रही है. आमतौर पर लोगों को यह पता नहीं होता कि वास्तविक भूकंप आने से पहले चेतावनी मिलने पर किस तरह का सायरन बजेगा. ऐसे में हर महीने होने वाले टेस्ट से लोग इसकी आवाज को पहचान सकेंगे. वास्तविक आपदा के समय सायरन सुनकर लोग घबराने के बजाय तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाने और जरूरी सावधानी बरतने की कोशिश कर सकेंगे.
6 अक्टूबर के भूकंप में मिला था अलर्ट
इस व्यवस्था की उपयोगिता 6 अक्टूबर की रात आए भूकंप के दौरान भी देखने को मिली. आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के मुताबिक, चमोली जिले में थराली के पास आए भूकंप की तीव्रता 4.9 थी और इसका केंद्र करीब 13 किलोमीटर की गहराई में था. इस दौरान IIT रुड़की के सहयोग से संचालित भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के जरिए भूकंपीय तरंगों के लोगों तक पहुंचने से पहले ही चेतावनी मिली. भूदेव मोबाइल ऐप और लगाए गए सायरन के माध्यम से लोगों को अलर्ट किया गया.
कुछ सेकंड की चेतावनी भी बचा सकती है जान
भूकंप जैसी अचानक आने वाली आपदा में कुछ सेकंड की चेतावनी भी बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है. इस दौरान लोग सुरक्षित जगह जाने, गैस और बिजली के उपकरण बंद करने और जरूरी सावधानी बरतने का समय पा सकते हैं. उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और IIT रुड़की के सहयोग से इस सिस्टम को आगे और मजबूत करने की तैयारी है. भविष्य में प्रदेश में और सेंसर लगाए जाने की योजना है, ताकि ज्यादा से ज्यादा इलाकों तक भूकंप की पूर्व चेतावनी पहुंचाई जा सके.



