सुप्रीम कोर्ट में ECI के कामकाज की जांच की मांग को लेकर नई याचिका दायर की गई है. साथ ही याचिका में जांच के लिए पूर्व CJI की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग भी शामिल है. याचिका में कहा गया है कि ECI के कामकाज में मौजूद कमियों की जांच के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की जाए. इस याचिका को वकील विशाल तिवारी ने दायर किया है.

याचिका में चुनाव प्रचार के दौरान धार्मिक पहचान, धार्मिक प्रतीकों, सांप्रदायिक अपील, संप्रदायआधारित पहचान या भड़काऊ भाषण के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करने के लिए ECI को निर्देश देने को कहा गया है. इसके पीछे की वजह बताई गई है कि इसका उद्देश्य निष्पक्ष रहना और भविष्य के लिए सुधार करना है.
सौर के पार दिखाई गई वोटर्स की उम्र
याचिकाकर्ता किसी राजनीतिक दल या किसी पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ कोई फैसला नहीं चाहता है और न ही यह किसी चुनाव के नतीजों को चुनौती देता है. याचिका में एक और रिपोर्ट का हवाला दिया गया है, जिसके अनुसार महाराष्ट्र की मतदाता सूची के मसौदे में जन्म वर्ष से जुड़ी एक तकनीकी खराबी के कारण 270313 मतदाताओं की उम्र 101 से 150 वर्ष के बीच दिखाई गई थी.
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में मांग की गई है कि चुनाव आयोग की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की तकनीक, काम करने के तरीके और नियमों की पूरी तरह से जांच की जाए. ये देखा जाए कि क्या हमारी EVM अंतरराष्ट्रीय नियमों और ऊंचे मानकों पर खरी उतरती हैं या नहीं.
ये मामला ऐसे समय में सामने आया है जब चुनाव आयोग खुद विवादों में है. खबरें आई हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त कुमार और बाकी दोनों चुनाव आयुक्तों के बीच चुनाव से जुड़े फैसलों को लेकर आपसी असहमति या मतभेद चल रहे हैं.
याचिका में चिंता जताई गई है कि बिना ठोस नियमों और सुरक्षा उपायों के जब वोटर लिस्ट में बड़े बदलाव या सुधार किए जाते हैं, तो कई असली और योग्य मतदाताओं के नाम लिस्ट से छूट जाने या कट जाने का खतरा रहता है.



