Gorakhpur News: एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता के निजी अस्पताल में इलाज कराने की खबर सामने आई थी. इसके बाद एम्स की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे. इन सबके बीच अब डॉ. विभा दत्ता का आधिकारिक पक्ष सामने आया है. Tv9 भारतवर्ष से बात करते हुए कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने स्पष्ट किया कि डॉक्टर्स को दिल से जुड़ी किसी गंभीर समस्या का वहम हो गया था, जिसके चलते उन्हें एहतियातन ले जाया गया था.

डॉ. विभा दत्ता ने बताया कि अचानक तबीयत बिगड़ने पर सहकर्मियों को लगा कि कहीं दिल की गंभीर समस्या न हो और कैथ लैब की जरूरत न पड़ जाए. चूंकि एम्स में कैथ लैब निर्माणाधीन है, इसलिए एहतियातन वे लोग उन्हें निजी अस्पताल ले गए थे.
उन्होंने कहा, “प्राइवेट अस्पताल में डॉक्टर्स ने मेरी टेस्ट रिपोर्ट देखी, जो बिल्कुल सामान्य थी. उन्होंने कोई इलाज या भर्ती नहीं किया और हम महज आधे घंटे के भीतर वहां से वापस आ गए.” वहीं. एम्स में अतिआवश्यक ‘कैथ लैब’ की अनुपलब्धता और निर्माण प्रक्रिया पर निदेशक ने विस्तार से जानकारी दी. डॉ. विभा दत्ता ने बताया कि कैथ लैब कोई छोटा सेटअप नहीं है, इसमें इस्तेमाल होने वाले उपकरण बेहद महंगे और अत्याधुनिक होते हैं. इसके लिए उन्होंने मंत्रालय से 14 से 15 करोड़ का विशेष बजट मांगा और मंजूरी ली.
‘गोरखपुर में किसी भी सरकारी अस्पताल में कैथ लैब नहीं’
उन्होंने दावा किया कि गोरखपुर में किसी भी सरकारी अस्पताल में कैथ लैब नहीं है, लेकिन एम्स में इसकी स्थापना की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और दिसंबर 2026 तक यह पूरी तरह शुरू हो जाएगी. इसके बाद एंजियोप्लास्टी, स्टंट और पेसमेकर लगाने जैसे सभी काम एम्स में ही होंगे. निदेशक ने कहा कि कार्डियोलॉजी से जुड़ी बाकी सभी जरूरी जांचों की व्यवस्था एम्स गोरखपुर में पहले से पूरी तरह उपलब्ध है.



