
साहिल और मुस्कान को होगी फांसी
उत्तर प्रदेश के मेरठ में बहुचर्चित नीले ड्रम वाली मुस्कान रस्तोगी और उसके आशिक साहिल शुक्ला को भले ही निचली अदालत ने फांसी की सजा सुना दी है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि उसे फांसी कब होगी? कोर्ट ने तो अपने फैसले में मामले को जघन्य बताया है. इसी के साथ दोनों के साथ किसी भी तरह की रियायत देने से इनकार किया है. हालांकि कोर्ट ने अपने फैसले में दोनों को अपील के लिए 90 दिन की मोहलत भी दी है.
इस अवधि में साहिल और मुश्कान चाहें तो फांसी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर सकते हैं. हाईकोर्ट में अपील स्वीकार होने के बाद निचली अदालत का फैसला अपने आप होल्ड हो जाएगा. वहीं हाईकोर्ट में यदि निचली अदालत का फैसला बरकरार रहता है तो दोनों के पास सुप्रीम कोर्ट और आखिर में राष्ट्रपति के पास दया याचिका लगाने का विकल्प रहेगा. वहीं यदि हाईकोर्ट ही निचली अदालत के फैसले को बदल देता है तो यह सवाल ही खत्म हो जाएगा.
51 साल पहले हुई फांसी
मेरठ की चौधरी चरण सिंह जिला जेल में बीते 50 साल में कोई फांसी नहीं हुई है. मेरठ के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक यहां आखिरी बार फांसी 1975 में हुई थी. यह फांसी मुजफ्फरनगर के रहने वाले करम सिंह को हुई थी. अब यदि साहिल और मुस्कान को फांसी की सजा दी जाती है तो मेरठ जेल में फांसी पाने वाला साहिल दूसरा पुरुष होगा. वहीं इस जेल में फांसी पाने वाली मुस्कान इकलौती महिला होगी.
सुरेंद्र कोली की टल गई थी फांसी
वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा के मुताबिक मेरठ की जेल में साल 2014 में नोएडा के निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली को फांसी दी जानी थी. इसके लिए सभी तैयारियां भी कर ली गईं, लेकिन ऐन वक्त पर फांसी टल गई. इसके बाद मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां से सुरेंद्र कोली बरी हो गई. हालांकि जेल से छूट कर जाने के बाद संदिग्ध परिस्थिति में हरिद्वार में उसकी मौत हो गई.
क्या है साहिल-मुस्कान का मामला?
मेरठ का नीला ड्रम कांड पिछले साल दुनिया भर में सुर्खियां बना था. इसमें मर्चेंट नेवी के अफसर सौरभ राजपूत की हत्या उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी ने अपने आशिक साहिल शुक्ला के साथ मिलकर की थी. सौरभ ने मुस्कान के साथ लव मैरिज किया था. लेकिन बाद में मुस्कान अपने कॉलेज के दोस्त साहिल के संपर्क में आ गई. वहीं जब दोनों के मिलन में सौरभ बाधा बनने लगा तो दोनों उसकी हत्या कर दी.
नजीर बन गई वारदात
साहिला और मुस्कान ने सौरभ की हत्या के बाद उसे तीन टुकड़ों में काट दिया था. इसके बाद तीनों टुकड़ों को नीले ड्रम में डालकर उसमें सीमेंट का घोल डाल दिया था. इससे सौरभ के शव के टुकड़े सीमेंट में जम गए थे. वारदात को अंजाम देने के बाद साहिल और मुस्कान हनीमून मनाने हिमाचल प्रदेश चले गए. हालांकि वापस लौटते ही मामले का खुलासा हो गया और पुलिस ने इन्हें अरेस्ट कर जेल भेज दिया था.
सौरभ सिंह
सौरभ सिंह को सक्रिय पत्रकारिता में करीब 16 साल का अनुभव है. शुरूआती 13 साल तक प्रिंट मीडिया में नोएडा, गुरुग्राम, अलवर, धौलपुर, भरतपुर और गाजियाबाद में बतौर क्राइम रिपोर्टर काम किया. इस दौरान प्रशासन और स्वास्थ्य से जुड़ी खबरों पर भी लीक से हटकर काफी काम किया. अब करीब दो साल से डिजीटल पत्रकारिता में हैं. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से प्राचीन इतिहास और दर्शन शास्त्र से ग्रेजुएशन की और पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद कानून में स्नातक की उपाधि हासिल की. वह संस्कृत और संस्कृति में रुचि होने की वजह से उनकी भारतीय दर्शन, धर्म और अध्यात्म में भी गहरी पकड़ है. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ही पत्रकारिता में डिप्लोमा लेने के बाद साल 2007 में अमर उजाला के साथ कैरियर की शुरूआत की. साल 2010 में दैनिक भास्कर में सीनियर रिपोर्टर बने. इस दौरान अलवर सिटी चीफ और बाद में धौलपुर ब्यूरोचीफ की जिम्मेदारी निभाई. फिर साल 2015 में दिल्ली लौटकर लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े. साल 2022 तक इस कार्यकाल में साढ़े तीन साल गुरुग्राम और बाकी समय गाजियाबाद में क्राइम रिपोर्टिंग की. अब अगस्त 2022 से टीवी9 भारतवर्ष में बतौर चीफ सब एडिटर डिजिटल पत्रकारिता को समझने की कोशिश कर रहे हैं.



