विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद बिहार की राजनीति में एक नए समीकरण की चर्चा तेज हो गई है. राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने कहा कि MLC चुनावों ने बिहार में बीजेपी की अनुवाई वाले NDA गठबंधन को हराने का फॉर्मूला दे दिया है. उनके मुताबिक, आरजेडी और जन सुराज पार्टी एक साथ आ जाए तो NDA साफ हो जाएगा.

रोहिणी आचार्य ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, ‘बिहार में हुए MLC चुनावों ने बिहार में BJP/NDA को हराने का फार्मूला दे दिया है. TJ + PK = BJP/ NDA ZERO. राजद और जन सुराज को मिले वोट को अगर जोड़ दिया जाए तो BJP/NDA सभी 8 सीटों पर प्रथम चरण में ही हार जाएगी. PS: आगे आगे देखिए होता है क्या.’ यहां TJ का मतलब तेजस्वी यादव और PK यानी प्रशांत किशोर है.

‘विपक्ष के बिखरने से हमेशा BJP को फायदा मिला’

तेजस्वी यादव की बड़ी बहन रोहिणी आचार्य ने एक दूसरे पोस्ट में लिखा, ‘विपक्ष के बिखरने से हमेशा बीजेपी को फायदा मिला है. अगर विपक्ष एकजुट होकर, सही रणनीति और मजबूत जनाधार के साथ चुनाव लड़े और वोटों का बिखराव रोके, तो बीजेपी को हराना पूरी तरह संभव है, क्योंकि एकजुट विपक्ष के पास अधिक मजबूत सामाजिक और राजनीतिक समीकरण हैं.’

बिहार में आट सीटों पर हुए स्नातकशिक्षक MLC चुनावों में बीजेपी और आरजेडी को 22 सीटों पर जीत मिली है. वहीं, 2 सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई, जबकि एकएक सीट पर जन सुराज पार्टी और जनता दल यूनाईटेड को जीत मिली है. इन आठों सीट में एक पर भी आरजेडी का कब्जा नहीं था, पार्टी को चुनाव में दो सीटों का फायदा हुआ है.

तेजस्वीPK के साथ आने से बदलेंगे समीकरण?

रोहिणी आचार्य के इस फॉर्मूले का विशलेषण करने से क्या सच में NDA को हराना मुश्किल है? पटना स्नातक MLC सीट पर JDU को मिली जीत से समझते हैं. इस सीट पर जेडीयू के नीरज कुमार ने जीत हासिल की है. चुनाव में नीरज कुमार को प्रथम वरियता में कुल 16,267 वोट मिले. जबकि RJD को 14,125 और जन सुराज को 11,038 वोट मिले.

इस हिसाब से रोहिणी आचार्य के बताए फॉर्मूला पर इसे बैठाए तो, तेजस्वी यादव को मिले 14,125 वोट प्लस जन सुराज के 11,038 वोट मिलाकर कुल 25,163 वोट हो जाते हैं, जो जेडीयूNDA गठबंधन को मिले वोट से काफी ज्यादा है.

फिलहाल, रोहिणी आचार्य के बयान ने बिहार की राजनीति में विपक्षी एकता और वोटों के बंटवारे पर बहस को जरूर हवा दे दी है. हालांकि, इसपर आरजेडी या प्रशांत किशोर की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फॉर्मूले पर दूसरे विपक्षी नेता क्या प्रतिक्रिया देते हैं.