भारत में अक्सर कहा जाता है कि गांव की हवा, साफ पानी और सादा खाना इंसान को लंबी उम्र देते हैं. वहीं, शहरों में बेहतर अस्पताल, इलाज की सुविधाएं और मॉर्डन लाइफ स्टाइल को लंबी उम्र की वजह माना जाता है. लेकिन, जब बात आंकड़ों की आती है तो तस्वीर कुछ अलग नजर आती है. भारत में गांव के मुकाबले शहरों में पैदा होने वाले बच्चों की औसत उम्र करीब तीन साल ज्यादा होती है. यानी लंबी जिंदगी के मामले में शहर गांवों से आगे हैं.

इस बात की जानकारी डेटा फॉर इंडिया की लाइफ एक्सपेक्टेंसी से जुड़ी रिपोर्ट में सामने आई है. रिपोर्ट बताती है कि भारत में लोगों की औसत उम्र पिछले कई दशकों में तेजी से बढ़ी है. आजादी के बाद के शुरुआती सालों में जहां एक नवजात बच्चे की औसत उम्र करीब 41 साल मानी जाती थी, वहीं 2024 तक ये बढ़कर करीब 72 साल हो गई. इसका मतलब है कि स्वास्थ्य सेवाओं, इलाज और जीवन स्तर में सुधार की वजह से भारतीय अब पहले के मुकाबले ज्यादा लंबा जीवन जी रहे हैं.
सभी की स्थिति एक जैसी नहीं होती
लेकिन इस कहानी का एक दूसरा पहलू भी है, जो ये बताता है कि भारत के हर हिस्से में लोगों की उम्र एक जैसी नहीं है. कहीं बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और जीवन स्तर की वजह से लोग ज्यादा साल तक जी रहे हैं, तो कहीं गरीबी, इलाज की कमी और दूसरी परेशानियां औसत उम्र को कम कर रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, केरल में पैदा होने वाले बच्चे की लाइफ एक्सपेक्टेंसी छत्तीसगढ़ में पैदा होने वाले बच्चे के मुकाबले करीब 10 साल ज्यादा हो सकती है.
- भारत में औसत उम्र: 2024 में जन्म लेने वाले बच्चे की लाइफ एक्सपेक्टेंसी करीब 72 साल है.
- गांव और शहर का अंतर: शहर में पैदा होने वाले बच्चे की औसत उम्र ग्रामीण बच्चे से करीब 3 साल ज्यादा है.
- सबसे बड़ा बदलाव: 1950 में भारत की लाइफ एक्सपेक्टेंसी करीब 41 साल थी, जो अब ज्यादा है.
- राज्यों में अंतर: केरल और छत्तीसगढ़ के बीच लाइफ एक्सपेक्टेंसी का अंतर करीब 10 साल है.
- महिलाओं की उम्र: 2024 में जन्मी बच्चियों की औसत लाइफ एक्सपेक्टेंसी लड़कों से 3 साल से ज्यादा है.
शहरों में रहने वाले लोग क्यों जीते हैं ज्यादा?
रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में शहरों में पैदा होने वाले बच्चों की लाइफ एक्सपेक्टेंसी गांवों में पैदा होने वाले बच्चों से करीब तीन साल ज्यादा है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह शहरों में मिलने वाली बेहतर सुविधाएं मानी जाती हैं. शहरों में बड़े अस्पताल, डॉक्टर, जांच केंद्र और गंभीर बीमारियों के इलाज की सुविधाएं आसानी से मिल जाती हैं.
किसी बीमारी का समय पर पता चलने और सही इलाज मिलने से जान बचने की संभावना बढ़ जाती है. इसके अलावा शहरों में शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता भी ज्यादा होती है. लोगों को टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों के पोषण और बीमारियों से बचाव के बारे में जानकारी मिलने की संभावना ज्यादा रहती है.
राज्यों के बीच भी दिखा बड़ा अंतर
भारत में लाइफ एक्सपेक्टेंसी के मामले में राज्यों के बीच भी बड़ा अंतर दिखाई देता है. रिपोर्ट के मुताबिक, केरल में पैदा होने वाले बच्चे की औसत लाइफ एक्सपेक्टेंसी छत्तीसगढ़ में पैदा होने वाले बच्चे के मुकाबले करीब 10 साल ज्यादा है. इसके पीछे दोनों राज्यों के सामाजिक और आर्थिक हालात का अंतर अहम हो सकता है.
केरल में शिक्षा का स्तर, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और लोगों में स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बेहतर रही है. वहीं, कई दूसरे राज्यों में गरीबी, कुपोषण, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और ग्रामीण इलाकों में इलाज तक पहुंच जैसी चुनौतियां मौजूद हैं.
सात दशकों बदल गया आंकड़ा
भारत में लाइफ एक्सपेक्टेंसी के आंकड़ों में पिछले सात दशकों के दौरान बड़ा सुधार हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, 1950 में भारत में जन्म लेने वाले बच्चे की औसत लाइफ एक्सपेक्टेंसी करीब 41 साल थी. वहीं, 2024 तक ये बढ़कर लगभग 72 साल हो गई. इस बदलाव के पीछे कई वजहें हैं. आजादी के बाद देश में अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार हुआ.
टीकाकरण अभियान मजबूत हुए और कई संक्रामक बीमारियों पर नियंत्रण पाने में सफलता मिली. कोरोना महामारी के दौरान दुनिया के कई देशों की तरह भारत में भी लाइफ एक्सपेक्टेंसी में गिरावट आई थी. लेकिन 2022 तक ये महामारी से पहले के स्तर पर लौट आई और इसके बाद फिर बढ़ने लगी.
महिलाएं पुरुषों से ज्यादा जीती हैं, लेकिन क्यों?
रिपोर्ट में महिलाओं और पुरुषों की लाइफ एक्सपेक्टेंसी को लेकर भी अहम जानकारी दी गई है. दुनिया के ज्यादातर देशों में महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा लंबा जीवन जीती हैं. भारत में भी अब यही स्थिति देखने को मिल रही है. 1950 के दशक में भारत में पुरुषों की औसत उम्र महिलाओं से ज्यादा थी. लेकिन 1980 के शुरुआती सालों में ये स्थिति बदल गई. अब महिलाओं की लाइफ एक्सपेक्टेंसी पुरुषों से ज्यादा है.
2024 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में जन्म लेने वाली बच्चियां लड़कों के मुकाबले तीन साल से ज्यादा लंबा जीवन जीने की उम्मीद रख सकती हैं. इसके पीछे जैविक कारणों के साथसाथ लाइफस्टाइल भी जिम्मेदार है. पुरुषों में दुर्घटनाओं से मौत का खतरा अधिक रहता है. वहीं, उम्र बढ़ने के साथ कुछ गंभीर बीमारियों से मृत्यु का जोखिम भी पुरुषों में ज्यादा देखा जाता है.



