देश की संसद में जनता के मुद्दों पर चर्चा होती है, कानून बनाए जाते हैं और देश को चलाने के लिए बड़े फैसले लिए जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी संसद में बड़ी संख्या में ऐसे सांसद भी बैठे हैं, जिन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी है?

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की दो रिपोर्टों ने इस तस्वीर को सामने रखा है. इन आंकड़ों के मुताबिक, लोकसभा में करीब 46 फीसदी सांसदों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं, जबकि राज्यसभा में यह आंकड़ा 31 फीसदी है. आपराधिक मामलों का सामना कर रहे सांसदों का प्रतिशत लोकसभा में राज्यसभा के मुकाबले काफी ज्यादा है.

गंबीर आपराधिक मामलों में भी सांसदों के नाम

दोनों सदनों के आंकड़े देखने पर एक और बात सामने आती है कि केवल सामान्य आपराधिक मामले ही नहीं, बल्कि गंभीर अपराधों से जुड़े मामले घोषित करने वाले सांसदों की संख्या भी काफी है. ADR की रिपोर्ट में केवल सांसदों की संख्या ही नहीं, बल्कि उनके खिलाफ दर्ज मामलों की गंभीरता, पार्टी के हिसाब से आंकड़े और राज्यों की स्थिति भी बताई गई है.

लोकसभा के आंकड़े 2024 में चुने गए 543 सांसदों के हलफनामों पर आधारित हैं, जबकि राज्यसभा की नवंबर 2026 की रिपोर्ट में 233 में से 230 मौजूदा सांसदों का विश्लेषण किया गया है. इन आंकड़ों में हत्या, हत्या की कोशिश, महिलाओं के खिलाफ अपराध और अन्य गंभीर मामलों से जुड़ी जानकारियां भी शामिल हैं.

  • लोकसभा के 543 सांसदों में से 251 यानी 46% पर आपराधिक मामले हैं.
  • लोकसभा के 170 सांसदों यानी 31% ने गंभीर मामले घोषित किए हैं.
  • राज्यसभा के 230 सांसदों में से 72 यानी 31% पर आपराधिक मामले हैं.
  • राज्यसभा के 37 सांसदों यानी 16% पर गंभीर आपराधिक मामले हैं.
  • राज्यसभा में तेलंगाना के 71% सांसदों ने आपराधिक मामले घोषित किए हैं.

लोकसभा में 46 फीसदी सांसदों पर आपराधिक मामले

ADR की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा के 543 सांसदों में से 251 ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं. यानी हर 100 सांसदों में करीब 46 ऐसे हैं, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें 170 सांसद ऐसे हैं, जिन्होंने गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं. यह कुल सांसदों का 31 फीसदी है. रिपोर्ट में कुछ चौंकाने वाले आंकड़े भी सामने आए हैं. आंकड़े दिखाते हैं कि लोकसभा में आपराधिक मामलों का सामना कर रहे सांसदों की संख्या काफी बड़ी है.

  • 27 सांसदों ने अपने खिलाफ दोषसिद्धि की जानकारी दी है.
  • 4 सांसदों ने हत्या से जुड़े मामले घोषित किए हैं.
  • 27 सांसदों ने हत्या की कोशिश से जुड़े मामले घोषित किए हैं.
  • 15 सांसदों ने महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़े मामले घोषित किए हैं.
  • इनमें 2 सांसदों पर दुष्कर्म से जुड़े मामले हैं.
  • 43 सांसदों ने नफरत फैलाने वाले भाषण से जुड़े मामले घोषित किए हैं.

राज्यसभा में कितने सांसदों पर आपराधिक मामले?

राज्यसभा की नवंबर 2026 की रिपोर्ट में ADR ने 233 में से 230 सांसदों के हलफनामों का विश्लेषण किया है. तीन सांसदों के हलफनामे उपलब्ध नहीं होने की वजह से उनका विश्लेषण नहीं किया गया. इनमें 72 सांसद यानी 31% ऐसे हैं, जिन्होंने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं. इस तरह लोकसभा में गंभीर आपराधिक मामलों वाले सांसदों का प्रतिशत राज्यसभा के मुकाबले लगभग दोगुना है.

  • 72 सांसदों यानी 31 फीसदी पर आपराधिक मामले हैं.
  • 37 सांसदों यानी 16 फीसदी पर गंभीर आपराधिक मामले हैं.
  • 1 सांसद ने हत्या से जुड़ा मामला घोषित किया है.
  • 4 सांसदों ने हत्या की कोशिश से जुड़े मामले घोषित किए हैं.
  • 4 सांसदों ने महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़े मामले घोषित किए हैं.

पार्टी के हिसाब से राज्यसभा के आंकड़े

ADR की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यसभा में BJP के 31 में से 11 सांसदों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं. वहीं, कांग्रेस के 29 में से 12 सांसदों , TMC के 9 में से 2 , DMK के 8 में से 2 और समाजवादी पार्टी के 5 में से 2 सांसदों पर आपराधिक मामले हैं. TDP के 4 में से 3 सांसदों ने ऐसे मामले घोषित किए हैं. वहीं, BRS और CPI के सभी 33 सांसदों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं.

क्या बताते हैं लोकसभा के आंकड़े

ADR की 2024 लोकसभा रिपोर्ट के मुताबिक, BJP के 240 सांसदों में से 94 ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं. वहीं, कांग्रेस के 99 में से 49 , समाजवादी पार्टी के 37 में से 21 , TMC के 29 में से 13 , DMK के 22 में से 13 और TDP के 16 में से 8 सांसदों पर आपराधिक मामले हैं. CPI के 4 में से 2 सांसदों ने भी ऐसे मामले घोषित किए हैं. शिवसेना के 7 में से 5 सांसदों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले बताए हैं.

किस राज्य के सांसदों पर ज्यादा केस

ADR की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यसभा में तेलंगाना के 7 सांसदों में से 5 ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं. इसके बाद दिल्ली के 3 में से 2 सांसदों , महाराष्ट्र के 19 में से 10 , आंध्र प्रदेश के 11 में से 5 , बिहार के 16 में से 7 और केरल के 9 में से 4 सांसदों पर आपराधिक मामले हैं. वहीं, उत्तर प्रदेश के 31 राज्यसभा सांसदों में से 10 ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं. इस तरह प्रतिशत के हिसाब से तेलंगाना सबसे ऊपर है, जबकि संख्या के लिहाज से उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में ऐसे सांसदों की संख्या ज्यादा है.