उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहे जाने वाले अखिलेश के बयान पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने पलटवार किया है. सीएम धामी ने कहा, “उत्तराखंड देवभूमि भी है और वीरभूमि भी. इस पावन धरती ने देश को संत, सैनिक और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित अनेक व्यक्तित्व दिए हैं. अखिलेश यादव, उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहना देवभूमि के स्वाभिमान और हमारे संघर्ष का अपमान है.”

उन्होंने कहा, “उत्तराखंड के लोग यह भी नहीं भूले हैं कि जब अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब उत्तराखंड राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारियों पर मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा में गोलियां चली थीं. पिता के शासनकाल में उत्तराखंड के आंदोलनकारियों पर गोलियां चलीं और आज पुत्र उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कह रहे हैं! उत्तराखंड के लोग अपने संघर्ष और बलिदान को कभी नहीं भूल सकते. क्या कांग्रेस अपने राजनीतिक सहयोगी अखिलेश यादव जी के इस बयान का समर्थन करती है? क्या उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहना कांग्रेस को स्वीकार है? कांग्रेस को देवभूमि की जनता को जवाब देना चाहिए.”

अखिलेश ने क्या कहा था?

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने रविवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को “घुसपैठिया” बताया और कहा कि उन्हें वापस भेज दिया जाना चाहिए. रविवार को लखनऊ के लोहिया पार्क में राम मनोहर लोहिया की पुण्यतिथि के मौके पर पत्रकारों से बात करते हुए, अखिलेश ने कहा कि बीजेपी के आंकड़े फर्जी हैं.अगर कोई उनके आंकड़ों पर भरोसा कर ले, तो वह भटक जाएगा.

उन्होंने दावा किया, “जो लोग पलायन के आंकड़े दे रहे हैं… हमारे यूपी में भी घुसपैठिए हैं. मुख्यमंत्री उत्तराखंड से हैं. हम चाहते हैं कि उन्हें उत्तराखंड वापस भेज दिया जाए. वे अकेले घुसपैठिए नहीं हैं; वे वैचारिक दृष्टिकोण से भी एक घुसपैठिए हैं.”

अखिलेश यादव ने आगे कहा, “वे भाजपा के सदस्य नहीं थे; वे किसी दूसरी के सदस्य थे. तो फिर, इन घुसपैठियों को कब हटाया जाएगा?” अखिलेश का ये बयान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस दावे के कुछ दिनों बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कुछ राजनीतिक दल घुसपैठियों को ‘वोट बैंक’ की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. साथ ही, उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि गुजरात और राजस्थान की सीमाओं पर घुसपैठ क्यों नहीं होती है.