अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का अगले हफ्ते भारत दौरा है. इस दौरे से पहले अमेरिका के 6 प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक सांसदों ने लेटर लिखकर भारत में छात्रों के प्रदर्शनों का मुद्दा उठाया है. अमेरिका के 6 बड़े नेताओं प्रमिला जयपाल, इल्हान उमर, जिम मैकगवर्न, रशीदा तलीब, एलेनोर होम्स नॉर्टन और जीसस गार्सिया ने अपने विदेश मंत्री रुबियो से एक खास अपील में ये बात कही है. उन्होंने कहा है कि जब वे मुंबई में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मिलें, तो भारत में छात्रों के प्रदर्शनों का मुद्दा उठाएं.

इन सांसदों ने यहां स्थित भारतीय दूतावास और अन्य अमेरिकी शहरों में मौजूद भारतीय वाणिज्य दूतावासों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोगों की निगरानी के लिए फोटोग्राफरों को तैनात किया था. रुबियो अगले हफ्ते भारत के दौरे पर आ रहे हैं और मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगे.
As the worlds largest democracies, the U.S. and India have an obligation to promote and defend the rights to freedom of assembly and expression.
@RepMcGovern and I are urging Secretary of State Marco Rubio to prioritize those freedoms and human rights when he meets with Indian officials in the coming days.
— Rep. Pramila Jayapal October 16, 2026
लेटर में जाहिर की गई चिंता
शुक्रवार को रुबियो को लिखे एक पत्र में इन सांसदों ने कहा, “हम दिल्ली और भारत के अन्य इलाकों में छात्र प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा दमन, गलत तरीके से हिरासत में लेने और बल के अत्यधिक प्रयोग के पैटर्न को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते हैं.”
इसमें दोनों देशों के बीच संबंधों में लोकतांत्रिक सिद्धांतों के महत्व पर जोर दिया गया. लेटर में कहा गया, “दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते, और ‘नागरिक तथा राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय अनुबंध’ के पक्षकार होने के कारण, अमेरिका और भारत का यह दायित्व है कि वे सभा करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकारों को बढ़ावा दें और उनकी रक्षा करें.”
भारत की तरफ से उठाए गए कदमों की भी चर्चा
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों की चिंताओं का हवाला देते हुए, पत्र में मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया की पारदर्शिता और चुनावी भागीदारी पर इसके संभावित असर को लेकर सवाल उठाए गए. इसमें विरोधप्रदर्शनों के दौरान लोगों की गिरफ्तारी और प्रदर्शनों पर कानून लागू करने वाली एजेंसियों की कार्रवाई की रिपोर्टों का भी जिक्र किया गया. सांसदों ने परीक्षा से जुड़ी चिंताओं के बाद छात्रों की शिकायतों पर भारत सरकार की प्रतिक्रिया को संज्ञान में लिया.
पत्र में कहा गया, “हमने गौर किया है कि भारत सरकार ने परीक्षा लीक से प्रभावित छात्रों की शिकायतों को दूर करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं, जिसमें शिक्षा मंत्री प्रधान का इस्तीफा भी शामिल है.”



