सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि ब्रेकअप के बाद अगर लड़की सुसाइड कर लेती है तो उसके प्रेमी यानी लड़के पर उकसाने का केस नहीं चलाया जा सकता है. सुसाइड के लिए उकसाने का केस तभी चल सकता है, जब इसका साक्ष्य हो. कोर्ट ने आगे कहा कि ब्रेकअप का नतीजा आत्महत्या हो सकता है, लेकिन यह कैसे पता चलेगा कि ऐसा होगा ही?

मामला तेलंगाना से जुड़ा हुआ है. यहां पर एक लड़की ने तब सुसाइड कर लिया, जब उसके प्रेमी ने शादी से इनकार कर दिया. इसके बाद सुसाइड के लिए उकसाने से संबंधित केस में प्रेमी और उसके परिवार के 5 अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज की.

तेलंगाना हाई कोर्ट ने गवाह और सबूतों के आधार पर लड़के के परिवार को दोषी माना. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां पर जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने अपना फैसला सुनाया.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले में क्या है?

लाइव लॉ के मुताबिक सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि सबूत और गवाह सब कुछ यह कहता है कि ब्रेकअप के बाद लड़की ने सुसाइड किया, लेकिन यह इससे साबित नहीं होता है कि लड़के ने इसके लिए उसे उकसाया?

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा शादी के लिए मना करना और ब्रेकअप करना एक चीज है. सुसाइड के लिए उकसाना दूसरी चीज है. ब्रेकअप को स्वतः ही आत्महत्या के लिए उकसाने के रूप में नहीं माना जा सकता है.

बेंच ने फैसले में कहा कि यह सबूत नहीं पेश किया गया कि लड़के ने ब्रेकअप के बाद लड़की को सुसाइड के लिए उकसाया था. इसके बाद लड़के और उसके परिवार के खिलाफ दर्ज केस को सर्वोच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया.

3 महीने तक दोनों रिलेशनशिप में रहे थे

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह गौर किया कि सुसाइड से पहले मृतक लड़की अपने प्रेमी के साथ करीब 3 महीने तक रिलेशनशिप में थी. प्रेमी के मां ने बाद में शादी को नहीं स्वीकार किया, जिसके बाद लड़की ने सुसाइड कर लिया.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ब्रेकअप के वक्त प्रेमी लड़के को यह नहीं पता था कि लड़की सुसाइड कर लेगी. NCRB के मुताबिक 2024 में भारत में कुल 1,70,746 आत्महत्याएं दर्ज हुईं. इनमें 7,850 आत्महत्याएं प्रेम संबंधों से जुड़ी हुई थीं.