सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को फटकार लगाई है. ये फटकार बंधक हाथी ‘उत्तोली रमन’ की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा न देने पर लगाई गई है. कोर्ट ने केरल के इस दावे पर सवाल उठाया कि उसने 9 जून के आदेश के बाद हाथी की कस्टडी ले ली थी. SC ने पूछा कि इस बात का जिक्र हलफनामे में क्यों नहीं किया गया? सुप्रीम कोर्ट ने जून में हाथी की कस्टडी राज्य को सौंपने का आदेश दिया था.

साथ ही अधिकारियों को 12 अक्टूबर को उसकी ताज़ा मेडिकल जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने आज राज्य सरकार के इस दावे पर सवाल उठाया कि उसने 9 जून के आदेश के तुरंत बाद हाथी की कस्टडी ले ली थी.
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि इस बात का ज़िक्र हलफनामे में क्यों नहीं किया गया और हाथी की भलाई के लिए उठाए गए कदमों के बारे में कोर्ट को अंधेरे में क्यों रखा गया.
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील से पूछा
आप 9 जून से क्या कर रहे थे? जून के बाद क्या हुआ? आपके हलफनामे में यह कहां दर्ज है? वकील ने देरी की वजहों में से एक वजह केरल में विधानसभा चुनाव को बताया. सुप्रीम कोर्ट ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि यह तो बहुत बढ़िया तर्क है. तो क्या इतने महीनों तक सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन इसलिए नहीं किया गया क्योंकि चुनाव हो रहे थे?
सुप्रीम कोर्ट ने इसे अपने निर्देशों का पालन करने से बचने की कोशिश बताया. राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि उसके पास जून की मेडिकल रिपोर्ट है. सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि क्या तब से हाथी की कोई मेडिकल जांच हुई है और सरकार को अगली सुनवाई में ताज़ा रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि राज्य को 9 जून के कोर्ट के आदेश का पूरी तरह से पालन करना होगा और हाथी की उचित देखभाल करनी होगी. साथ ही अधिकारियों से 12 अक्टूबर तक मेडिकल जांच की ताज़ा रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखने को कहा.



