Mokama Munger Four Lane Project: बिहार में सड़क और बुनियादी ढांचे के विकास की योजनाओं के बीच मोकामामुंगेर ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना जमीन अधिग्रहण और मुआवजे की धीमी प्रक्रिया में उलझ गई है. 4,447 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 82.2 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण के लिए एजेंसी का चयन हो चुका है, लेकिन बड़ी संख्या में प्रभावित भूस्वामियों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है. ऐसे में निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही परियोजना की रफ्तार प्रभावित हो रही है. वहीं, जमीन और मकान खोने की आशंका से स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है.

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस परियोजना के लिए 23 मार्च 2026 को मेसर्स जीआर इंफ्रा का चयन किया था. 82.2 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क पटना, लखीसराय, मुंगेर और शेखपुरा जिलों से होकर गुजरेगी. परियोजना के तहत लखीसराय में 54.1 किलोमीटर, मुंगेर में 17.2 किलोमीटर, पटना में 8.5 किलोमीटर और शेखपुरा में 2.6 किलोमीटर सड़क का निर्माण होना है. हालांकि, निर्माण एजेंसी तय होने के बावजूद जमीन का कब्जा सौंपने और मुआवजा बांटने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है.

मुंगेर में 542 करोड़ का बजट, मुआवजा सिर्फ 11.75 करोड़

मुंगेर जिले में सड़क निर्माण के लिए करीब 1,400 रैयतों की जमीन अधिग्रहित की जानी है. इसके लिए जिला भूअर्जन कार्यालय को 542 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन किया गया है. इसके बावजूद अब तक केवल 35 रैयतों को 11.75 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया है.

दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 97 प्रतिशत से अधिक प्रभावित भूस्वामियों को अब भी मुआवजे का इंतजार है. मुआवजा वितरण की धीमी गति के कारण जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है. इसका सीधा असर परियोजना के निर्माण की तैयारी पर पड़ रहा है.

सफियासराय में 300 मकानदुकानों पर कार्रवाई का डर

मुंगेर के सफियासराय इलाके में फोरलेन के प्रस्तावित एलायमेंट की जद में करीब 300 पक्केकच्चे मकान, दुकानें और चारदीवारियां आ रही हैं. इन्हें हटाने की योजना है. ऐसे में प्रभावित परिवारों के सामने घर और कारोबार छिनने का डर बना हुआ है.

स्थानीय लोगों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि उन्हें उचित मुआवजा मिलने से पहले ही कहीं उनके आशियाने न उजाड़ दिए जाएं. मुआवजे को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से लोगों में असमंजस है.

बाढ़ का पानी और अमीनों की हड़ताल बनी बाधा

प्रशासन ने सफियासराय, इंद्रुख और चौरदीगर में विशेष शिविर लगाकर जमीन से जुड़े दस्तावेज, एलपीसी और दावों से संबंधित कागजात जमा करने की अपील की थी. हालांकि, जानकारी की कमी और अविश्वास के कारण कई रैयत शिविरों तक नहीं पहुंचे.

दूसरी ओर, दियारा और निचले इलाकों में बाढ़ का पानी जमा होने से जमीन की मापी प्रभावित हुई है. 6 अक्टूबर से अमीनों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने भी एलपीसी के सत्यापन और नापी का काम रोक दिया है.

प्रशासन का दावा, जल्द बांटा जाएगा मुआवजा

जिला भूअर्जन पदाधिकारी पंकज गुप्ता के मुताबिक, जलभराव और अमीनों की हड़ताल से तकनीकी दिक्कतें आई हैं. उन्होंने बताया कि पानी उतरने के साथ रैयतवार अधिसूचना जारी करने और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया तेज की जा रही है.

प्रशासन का कहना है कि जल्द मुआवजा बांटकर जमीन का भौतिक कब्जा निर्माण एजेंसी को सौंपा जाएगा. अब देखना होगा कि मुआवजे और जमीन अधिग्रहण की अड़चनें कब दूर होती हैं और 4,447 करोड़ रुपये की यह परियोजना धरातल पर कब गति पकड़ती है.