Atar Singh Bhadana Murder Case: बीजेपी के पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की हत्या के बाद राजस्थान की कानूनव्यवस्था पर सावल उठने लगे हैं. भरतरपुर के भौंडा गांव में रविवार शाम को खनन विवाद के बीच अगर सिंह भड़ाना पर हमला कर दिया, जिसमें उनकी मौत हो गई. चश्मदीदों के अनुसार, हमलावरों ने पहले अतर सिंह भड़ाना पर पत्थरों से हमला किया. फिर सरियों से अटैक कर दिया.

यही नहीं कमरे में जलती लकड़ियां फेंककर उनको जिंदा जलाने का भी प्रयास किया गया. इस मामले में पुलिस की कार्यशैली पर भी गंभाीर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि 27 सितंबर को भड़ाना ने एफआईआर दर्ज कराई थी कि उनको खान पर फायरिंग करके जान से मारने की धमकी दी गई है. उन्होंने पुलिस को बताया था कि उनको धमकी मिली है कि अगर वो खान पर रहे तो उनको जिंदा नहीं छोड़ा जाएगा.
94 से अधिक लोगों के खिलाफ केस
हैरानी की बात तो ये है कि एफआईआर दर्ज कराने के बाद भी पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया. रविवार शाम करीब सात बजे पुलिस को भड़ाना पर हमले की जानकारी मिली, लेकिन घटनास्थल पर पहुंचने में पुलिस को सवा घंटे लग गए, जबकि घटनास्थल से पुलिस महज तीन किमी दूर थी. इस मामले में 94 से अधिक लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. 25 टीमें छापेमारी कर रही हैं.
वहीं सोमवार को जयपुर के एसएमएस अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद अतर सिंह भड़ाना का शव उनके परिजनों को सौंप दिया गया. अतर सिंह भड़ाना का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव पाली में किया गया. परिजनों ने उनकी हत्या की सीबीआई जांच की मांग की है. हमले के कुछ घंटे पहले भड़ाना ने कहा था, ‘अब तो मरूं या मारूं खान ही चलाऊंगा.’
शरीर पर 40 जगह गंभीर चोटें
पोस्टमार्टम में भड़ाना के शरीर पर 40 जगह गंभीर चोटें थीं. सिर पर भारी और नुकिली चीज से चोट के निशान मिले. हड्डी टूट गई थी. सिर में चोट और अधिक खून बहने से मौत की बात सामने आई है. मामले में कई सवाल उठ रहे हैं. असमाजिक तत्वों ने चालू खनन पट्टे के मुख्य रास्ते को अवरुद्ध कर दिया था. 2024 से पट्टे पर खनन बंद है.
पुलिस आंख क्यों मूंदे रही?
ग्रामीणों और खनन मालिक के बीच रास्ते को लेकर विवाद, धरना प्रदर्शन और कानून व्यवस्षा बिगड़ने की आंशका जताई गई थी. भड़ाना ने 27 लोगों के खिलाफ खान से समान चोरी करने, एक आरोपी को पकड़ने के बाद फायरिंग करके उसको छुड़ाने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी.
जनवरी में ग्रामीणों ने एसडीएम को 14 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा था. ज्ञापन में ग्रामीणों ने चारागाह भूमि से माल ढुलाई रोकने और लीजधारक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी. बता दें कि भड़ाना ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था.



