इसके आधार पर पंचायतें जलस्रोतों को सुरक्षित रखने और पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए योजनाएं तैयार करने में सहयोग कर सकेंगी। इस प्रक्रिया में छोटे स्तर पर जल पुनर्भरण और संरक्षण से जुड़े कार्यों के रखरखाव को भी शामिल किया गया है।