उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के नाम बदलने का आरोप लगा है. कांग्रेस का दावा है कि वोटर का EPIC नंबर, उम्र और लिंग वही है, लेकिन नाम और पिता का नाम बदल गया. पार्टी का आरोप है कि प्रभावित सभी 13,150 मतदाता मुस्लिम हैं. इसके अलावा 804 वोटरों के नाम काटने और करीब 2,600 नए नाम जोड़ने का भी दावा किया गया है.

मामला सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने संबंधित अधिकारियों और ऑपरेटर को मतदाता सूची के काम से हटा दिया है. अब पूरे यूपी की वोटर लिस्ट की जांच के आदेश दिए गए हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि इस पूरे मामले का खुलासा कैसे हुआ? इसकी कहानी काफी रोचक है. पीलीभीत सीट से कांग्रेस के दावेदार कुमुद गंगवार के पास वोटरों का नाम बदलने की शिकायत आई. इसके बाद उन्होंने सभी 419 बूथों की वोटर लिस्ट खंगाली, फिर ये खुलासा हुआ.

एक वीडियो से शुरू हुई वोटर लिस्ट की जांच

पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ी का मामला 13 अक्टूबर को सामने आया. कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार के मुताबिक, पीलीभीत के एकएक व्यक्ति अपना EPIC नंबर बताकर वोटर आईडी कार्ड निकलवाने पहुंचा था. वोटर आईडी कार्ड को देखते ही उसके होश उड़ गए, क्योंकि उसमें नाम और पिता का नाम बदला था. 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में उसी EPIC नंबर पर उस व्यक्ति का नाम सही दर्ज था.

इसका उसने एक वीडियो बनाया. इसी वीडियो के आधार पर कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने स्क्रूटनी शुरू की. इसके बाद कई वोटरों के नाम में गलती मिलने लगी. कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार के मुताबिक, शुरुआती गड़बड़ियां सामने आने के बाद 53 लोगों की टीम बनाई गई. इस टीम ने लगातार 96 घंटे काम किया. पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र के सभी 419 बूथों पर दर्ज 3 लाख 48 हजार 937 मतदाताओं के EPIC नंबरों की जांच की गई.

कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार का दावा है कि इस पड़ताल में कुल 16,554 मतदाताओं से जुड़ी तीन तरह की विसंगतियां सामने आईं. पहला और सबसे बड़ा मामला 13,150 वोटरों का था. कांग्रेस का आरोप है कि इन मतदाताओं के EPIC नंबर और मतदाता सूची में क्रम संख्या वही रहे, लेकिन नाम और पिता का नाम बदल गया. पार्टी का यह भी दावा है कि इन सभी प्रभावित मतदाताओं का संबंध मुस्लिम समुदाय से है.

दूसरी श्रेणी में 804 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का दावा है. तीसरी श्रेणी में करीब 2,600 नए नाम जोड़े जाने की बात कही गई है. कांग्रेस इन तीनों आंकड़ों को जोड़कर कुल 16,554 मतदाताओं से जुड़ी कथित अनियमितताओं का दावा कर रही है. कांग्रेस का कहना है कि 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में संबंधित वोटरों के नाम सही दर्ज थे. पार्टी के मुताबिक, जुलाई से सितंबर के बीच कई मतदाताओं के रिकॉर्ड में बदलाव किए गए.

कुमुद गंगवार ने दावा किया कि कुछ रिकॉर्ड में 2 सितंबर 2026 को रात 9 बजकर 26 मिनट पर बदलाव दर्ज होने का विवरण मिला. उन्होंने सवाल उठाया कि मतदाताओं की जानकारी और सहमति के बिना उनके नाम और पिता के नाम में बदलाव कैसे हो गया? गंगवार ने कहा कि 600 से ज्यादा प्रभावित मतदाताओं ने शपथपत्र देकर कहा है कि उन्होंने नाम या अन्य विवरण बदलवाने के लिए फॉर्म8 नहीं भरा… जिन लोगों के नाम सूची से हटाए गए, उनमें से कुछ ने फॉर्म7 के जरिए नाम हटाने का अनुरोध करने से इनकार किया है.

कांग्रेस कुमुद गंगवार का दावा है कि चुनाव आयोग की वेबसाइट पर कुछ मतदाताओं के रिकॉर्ड में अब बदले हुए नाम दिखाई दे रहे हैं. पार्टी ने सवाल उठाया है कि अगर बदलाव के लिए बाकायदा आवेदन किए गए थे, तो उन आवेदनों का रिकॉर्ड कहां है? कांग्रेस नेता ने कुछ मामलों में EPIC नंबर से जुड़े मोबाइल नंबर में भी बदलाव होने का दावा किया है. गंगवार के मुताबिक, ऑनलाइन रिकॉर्ड में मोबाइल नंबर के आखिरी चार अंक अलग दिखाई दिए.

कांग्रेस कुमुद गंगवार ने सवाल उठाया कि अगर मतदाता के विवरण में बदलाव के लिए मोबाइल पर OTP की जरूरत होती है, तो संबंधित लोगों के फोन पर कोई संदेश क्यों नहीं आया? उन्होंने आशंका जताई कि प्रशासनिक लॉगिन के जरिए भी रिकॉर्ड में बदलाव संभव हो सकता है. कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मांग की है कि 13,150 मतदाताओं के नाम बदलने से जुड़े फॉर्म8 और अन्य रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बदलाव किसके आवेदन पर और किस स्तर पर किए गए.

804 नाम हटे, 2,600 नए नाम जुड़े

कांग्रेस ने सिर्फ नाम बदलने के मामलों पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि मतदाता सूची से नाम हटाने और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया पर भी आरोप लगाए हैं. कुमुद गंगवार का दावा है कि 804 जिन लोगों के नाम हटाए गए, वे एक खास समुदाय से हैं और भाजपा को वोट नहीं देते. वहीं, करीब 2,600 नए नाम उन बूथों पर जोड़े जाने का आरोप है, जहां भाजपा समर्थक मतदाताओं की संख्या ज्यादा है. गंगवार के मुताबिक, कुछ बूथों पर नए नाम जोड़ने की संख्या 100 से अधिक बताई गई, जबकि बूथ नंबर 57 पर अधिकतम 88 नए नाम जोड़े जाने का मामला सामने आया.

उन्होंने यह भी दावा किया कि करीब 2,600 जोड़े गए नामों में से 500 लोगों की जांच की गई, लेकिन वे बताए गए गांवों में नहीं मिले. दूसरी ओर, हटाए गए 804 नामों में से करीब 25 प्रतिशत लोगों से संपर्क करने की बात कही गई. कांग्रेस का कहना है कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए, उनके नाम 10 अप्रैल की अंतिम सूची में मौजूद थे और उन्होंने खुद नाम हटाने के लिए आवेदन नहीं किया था. गंगवार ने कहा कि किसी दूसरे व्यक्ति की आपत्ति पर नाम हटाने के मामले में संबंधित मतदाता को अपनी बात रखने का अवसर देने की प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए.

FIR से हाईकोर्ट तक जाने की तैयारी

कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने कहा है कि पार्टी इस मामले को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ेगी. उन्होंने तत्कालीन एसडीएम, जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ मौजूदा डीएम को तहरीर दी है. गंगवार के मुताबिक, अगर पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो कांग्रेस इस मामले को सत्र न्यायालय और फिर हाईकोर्ट तक ले जाएगी. उन्होंने कहा कि पार्टी संगठन के स्तर पर भी इस तरह की विसंगतियों की जांच का अभियान बढ़ाएगी.

चुनाव आयोग का एक्शन, पूरे यूपी में जांच के निर्देश

21 अक्टूबर की देर रात उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में गड़बड़ी सामने आई है… संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी यानी ERO और मतदाता पंजीकरण केंद्र के ऑपरेटर को मतदाता सूची के काम से हटा दिया गया है… दोनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई की बात भी कही है.

इसके साथ ही प्रदेश के सभी जिलों में इसी तरह की गड़बड़ियों की जांच कर दो दिन के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं. अब जांच का दायरा सिर्फ पीलीभीत सदर तक सीमित नहीं है. दूसरे जिलों की मतदाता सूचियों में भी EPIC नंबर, नाम और अन्य विवरणों में विसंगतियों की पड़ताल की जाएगी.