सोलन/शिमला। हिमाचल प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव में अभी समय शेष है, लेकिन सत्ता के गलियारों में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर घमासान अभी से चरम पर पहुंच चुका है। राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के भीतर जारी गुटबाजी एक बार फिर सरेआम उजागर हो गई है। पूर्व महासचिव रजनीश किमटा द्वारा कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह को प्रदेश का ‘अगला मुख्यमंत्री’ बताए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति में एक नया सियासी तूफान खड़ा हो गया है। इस बयान ने मौजूदा सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार के भीतर अंदरूनी कलह और महत्वाकांक्षाओं की जंग को हवा दे दी है।

किमटा के बयान से शुरू हुई मुख्यमंत्री पद की चर्चा
पूरा मामला चौपाल में आयोजित एक सांस्कृतिक और खेल कार्यक्रम के दौरान सामने आया, जहां कांग्रेस के पूर्व महासचिव रजनीश किमटा ने विक्रमादित्य सिंह को प्रदेश का भविष्य बताते हुए उन्हें अगला मुख्यमंत्री करार दिया। किमटा ने विक्रमादित्य की राजनीतिक सक्रियता और दूसरे राज्यों में उनकी भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान के नेता सचिन पायलट के बाद दूसरे राज्यों में चुनाव प्रचार के लिए विक्रमादित्य सिंह की भी मांग रहती है। उन्होंने विक्रमादित्य को एक परिपक्व नेता बताते हुए उनके नेतृत्व की संभावनाओं की ओर इशारा किया।
किमटा का यह बयान ऐसे समय आया है, जब हिमाचल में कांग्रेस की सरकार मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में चल रही है। ऐसे में किसी मौजूदा कैबिनेट मंत्री को अगले मुख्यमंत्री के रूप में पेश करना राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया। बयान को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग अर्थ निकाले जाने लगे हैं। हालांकि, किमटा की टिप्पणी को उनका राजनीतिक आकलन माना जा रहा है और इसे कांग्रेस हाईकमान की ओर से किसी आधिकारिक घोषणा के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
विक्रमादित्य बोले- अभी सफर बहुत लंबा है
किमटा के बयान के बाद सबकी नजरें विक्रमादित्य सिंह की प्रतिक्रिया पर थीं। उन्होंने इस टिप्पणी को किमटा की व्यक्तिगत भावना बताते हुए कहा कि इसे किसी दूसरे नजरिये से देखने की जरूरत नहीं है। विक्रमादित्य के मुताबिक, अभी सफर बहुत लंबा है और इस दौरान कई उतार-चढ़ाव आएंगे। उन्होंने कहा कि वह वर्तमान में मिली जिम्मेदारियों को निभाने का प्रयास कर रहे हैं और जिस स्थान पर हैं, वहां खुश हैं।
विक्रमादित्य की इस प्रतिक्रिया में मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई स्पष्ट दावा नहीं किया गया। उन्होंने न तो खुद को भावी मुख्यमंत्री घोषित किया और न ही भविष्य की संभावनाओं पर कोई अंतिम टिप्पणी की। उनके बयान को मौजूदा विवाद से दूरी बनाए रखने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, उनके राजनीतिक परिवार की विरासत और प्रदेश की राजनीति में उनकी भूमिका को देखते हुए किमटा की टिप्पणी के बाद उनके नाम पर चर्चा तेज हो गई है।
सुक्खू खेमे की आपत्ति, सुरिंदर शर्मा ने बताया निंदनीय
किमटा के बयान पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबी माने जाने वाले HPMC के उपाध्यक्ष सुरिंदर शर्मा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला पार्टी हाईकमान करता है। शर्मा ने किमटा के बयान को निंदनीय बताते हुए नेतृत्व तय करने में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
सुरिंदर शर्मा की इस प्रतिक्रिया से साफ है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर सार्वजनिक बयानबाजी पार्टी के भीतर सभी को स्वीकार्य नहीं है। मौजूदा मुख्यमंत्री के रहते किसी दूसरे नेता को अगला मुख्यमंत्री बताने पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, शर्मा की प्रतिक्रिया को सुक्खू खेमे के सभी नेताओं का आधिकारिक रुख नहीं माना जा सकता, लेकिन इससे नेतृत्व के सवाल पर पार्टी के भीतर मतभेदों की चर्चा को जरूर बल मिला है।
वीरभद्र और सुक्खू खेमे के पुराने मतभेद फिर चर्चा में
हिमाचल कांग्रेस में वीरभद्र सिंह और सुखविंदर सिंह सुक्खू के राजनीतिक खेमों के बीच मतभेदों की चर्चा पुरानी रही है। वीरभद्र सिंह के राजनीतिक दौर में भी संगठन और नेतृत्व को लेकर अलग-अलग धारणाएं सामने आती रही थीं। वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह और उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह की राजनीतिक भूमिका को लेकर भी समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं।
वीरभद्र सिंह का समय हो या सुखविंदर सिंह सुक्खू के मुख्यमंत्री बनने के बाद की बात हो। होलीलॉज और सुक्खू गुट के बीच मतभेद समय समय पर उजागर होते ही रहते हैं। यहां तक कि प्रतिभा सिंह भी कई बार सीएम सुक्खू की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती रही हैं। ऐसे में अब विक्रमादित्य सिंह अगले मुख्यमंत्री के बयान पर एक बार फिर सुक्खू और वीरभद्र गुट की अंदरूनी खींचतान बढ़ सकती है।
अब किमटा के बयान और उस पर सुरिंदर शर्मा की प्रतिक्रिया के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या कांग्रेस में पुराने गुटीय मतभेद नए रूप में सामने आ रहे हैं। फिलहाल इस बयान के पीछे किसी संगठित गुटीय रणनीति का प्रमाण सामने नहीं आया है। फिर भी, घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर अलग-अलग राजनीतिक धाराओं के बीच संभावित खींचतान को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।
क्या कांग्रेस हाईकमान करेगा हस्तक्षेप?
किमटा के बयान के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या पार्टी नेतृत्व इस मामले में कोई कदम उठाएगा। सुरिंदर शर्मा से जब पूछा गया कि क्या वह इस बयान को पार्टी के संज्ञान में लाएंगे या अनुशासनात्मक समिति के सामने कार्रवाई की मांग करेंगे, तो उन्होंने कहा कि मामला सभी के संज्ञान में है। हालांकि, उन्होंने किसी कार्रवाई की स्पष्ट मांग नहीं की और कहा कि आगे क्या करना है, यह संबंधित लोगों को तय करना है।
फिलहाल किमटा के बयान पर किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में निगाहें प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व और हाईकमान के रुख पर रहेंगी। पार्टी इस बयान को किसी नेता की व्यक्तिगत राय मानकर छोड़ती है या भविष्य में नेतृत्व संबंधी सार्वजनिक टिप्पणियों पर कोई संदेश देती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
2027 से पहले नेतृत्व की बहस कांग्रेस के लिए चुनौती
हिमाचल प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव दिसंबर 2027 में प्रस्तावित है। चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चा शुरू होना कांग्रेस के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक रूप से अहम है। मुख्यमंत्री सुक्खू के नेतृत्व में मौजूदा सरकार काम कर रही है, जबकि विक्रमादित्य सिंह कैबिनेट मंत्री के तौर पर अपनी भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में किसी नेता को भावी मुख्यमंत्री बताने वाला बयान पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे सकता है।



