शिवसेना के सांसद संजय राउत की नई किताब बोध कीर्तन का विमोचन कल ठाकरे बंधुओं की मौजूदगी में होने जा रहा है. इस किताब में राउत ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों, अलगअलग लोगों से हुई मुलाकातों और उनके पढ़े हुए लेखों से जुड़े विचारों को शामिल किया है. किताब के कुछ अंश सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है.

विजय माल्या को लेकर राउत की अलग राय

किताब में संजय राउत ने कारोबारी विजय माल्या को लेकर अपनी राय रखी है. राउत के मुताबिक, वह माल्या को व्यक्तिगत रूप से जानते थे. संसद और सेंट्रल हॉल में दोनों अक्सर आसपास बैठते थे. उन्होंने माल्या को मिलनसार, हंसमुख और प्रभावशाली व्यक्तित्व वाला व्यक्ति बताया है.

राउत का मानना है कि माल्या की आलीशान जीवनशैली को लेकर लोगों ने गलत धारणा बना ली थी. उनके मुताबिक, यह जीवनशैली उनके कारोबारी तौरतरीकों का हिस्सा हो सकती थी. राउत ने माल्या को देशप्रेमी, उदार और साफ दिल इंसान बताते हुए लिखा है कि उनकी मंशा किसी को धोखा देने की नहीं थी.

‘सरकार से माल्या को नहीं मिली राहत’

राउत ने माल्या को भगोड़ा कहे जाने पर भी असहमति जताई है. उनका कहना है कि जब माल्या का कारोबार मुश्किल में आया और बैंकों का कर्ज बकाया रह गया, तब बैंकों को उनकी मदद करनी चाहिए थी. राउत ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि पिछले दस वर्षों में कई उद्योगपतियों को कर्ज के मामले में राहत दी गई, जबकि माल्या को भी कुछ राहत मिल सकती थी. उनके मुताबिक, परिस्थितियों ने माल्या को देश छोड़ने के लिए मजबूर किया. इसी आधार पर राउत ने उन्हें फ्रॉड मानने से इनकार किया है.

दीपस्तंभ अध्याय में पीएम मोदी के भाषण की तारीफ

संजय राउत ने अपनी किताब के दीपस्तंभ नाम के अध्याय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों का भी जिक्र किया है. उन्होंने लिखा है कि प्रधानमंत्री के राजनीतिक भाषण भले ही उन्हें ज्यादा प्रभावशाली या अर्थपूर्ण नहीं लगते, लेकिन उनके गैरराजनीतिक भाषण काफी अच्छे होते हैं.

राउत ने अयोध्या के दीपोत्सव के दौरान भगवान राम पर प्रधानमंत्री मोदी के भाषण की विशेष रूप से तारीफ की है. उन्होंने उस भाषण को शब्दों का भावुक दीपोत्सव बताया है. राउत के मुताबिक, भगवान राम के आदर्श हर भारतीय के लिए दीपस्तंभ यानी मार्गदर्शक रोशनी की तरह हैं.

एक तरफ विजय माल्या को लेकर राउत की टिप्पणी और दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी के गैरराजनीतिक भाषणों की तारीफ, इन दोनों बातों ने उनकी नई किताब बोध कीर्तन को विमोचन से पहले ही चर्चा में ला दिया है.