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UP Police Transfers: लखनऊ l उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले पुलिस विभाग में बड़े स्तर पर फेरबदल की तैयारी शुरू हो गई है। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के बाद डीजीपी मुख्यालय ने भी प्रक्रिया शुरू कर दी है. डीजीपी मुख्यालय ने पुलिस कमिश्नरेट से सभी पुलिसकर्मियों का ब्योरा मांगा है. माना जा रहा है 20 से ज्यादा आईपीएस और 2000 राज्य पुलिसकर्मी के तबादले हो सकते हैं.

जानकारी के मुताबिक़, पुलिस मुख्यालय की स्थापना शाखा ने सभी पुलिस कमिश्नरेट और जिलों से संबंधित पुलिसकर्मियों की तैनाती का रिकॉर्ड मांगा है. जिससे उन पुलिसकर्मियों की पहचान की जायेगी. जिसने एक जिले में तीन या तीन साल से ज्यादा समय पूरा कर लिया है,

जिलों और कमिश्नरेट से प्राप्त ब्योरे के आधार पर पुलिसकर्मियों को तबादला किया जायेगा. अनुमान लगाया जा रहा है कि पूरे प्रदेश में 2000 से अधिक पुलिसकर्मी और 20 से ज्यादा आईपीएस के तबादले हो सकते हैं.

इन अफसरों का होना है तबादला

चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार, निर्वाचन संबंधी कार्यों से सीधे जुड़े ऐसे अधिकारी, जिन्होंने एक ही जनपद में 31 मई, 2027 तक तीन साल से तैनात है उन्हें निर्धारित स्थानांतरण नीति के तहत ट्रांसफर किया जाएगा. अधिकारियों के स्थानांतरण एवं तैनाती के संबंध में की गई कार्यवाही की रिपोर्ट 30 नवंबर, 2026 तक मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशक द्वारा भारत निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा.

पुलिस, आबकारी और परिवहन विभाग के अधिकारियो का होगा ट्रांसफर

पुलिस विभाग में उप निरीक्षक एवं समान रैंक के अधिकारियों सहित उनसे उच्च स्तर के अधिकारियों तथा आबकारी विभाग में उप निरीक्षक एवं समान रैंक के अधिकारियों सहित उनसे उच्च स्तर के अधिकारियों पर भी स्थानांतरण नीति लागू होगी.परिवहन विभाग के सब-इंस्पेक्टर एवं उनसे उच्च स्तर के क्षेत्रीय अधिकारियों के संबंध में भी आयोग के निर्देशों के अनुसार कार्यवाही की जानी है.

तबादलों में इन बातों का रखना होगा ध्यान

अधिकारियों का तबादला करते समय, राज्य सरकार के संबंधित विभागों को यह ध्यान रखना होगा कि उन्हें उनके गृह जनपदों में तैनात न किया जाए. साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाये कि किसी भी जिला निर्वाचन अधिकारी/रिटर्निंग ऑफिसर/सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, पुलिस इंस्पेक्टर/सब-इंस्पेक्टर या उससे ऊपर के अधिकारी को उस विधानसभा क्षेत्र या जनपद में वापस तैनात न किया जाए, या वहां बने रहने की अनुमति न दी जाए, जहां वे पिछले विधानसभा चुनाव या उसके बाद हुए किसी भी उपचुनाव के दौरान तैनात थे.

किन अधिकारियों को मिलेगी छूट?

राज्य मुख्यालयों में पदस्थ संबंधित विभागीय अधिकारियों, निर्वाचन कार्य से असंबद्ध तकनीकी कार्मिकों तथा सेक्टर ऑफिसर एवं जोनल मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात अधिकारियों को सामान्यतः इस नीति से छूट प्रदान की गई है. आब्जर्वर, मुख्य निर्वाचन अधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी एवं रिटर्निग ऑफिसर को करीबी नजर रखनी होगी. ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे अपने कर्तव्यों का पालन निष्पक्ष और पक्षपात रहित तरिके से कर रहे हो. इसके अलावा 31 मई, 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों को भी तबादलों में छूट मिलेगी, लेकिन वे निर्वाचन से जुड़े महत्वपूर्ण पदों के प्रभार में नहीं रहेंगे.