देश में पेट्रोल के साथ इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर पिछले कुछ समय से खूब बवाल मचा हुआ है. एक तबके का आरोप रहा है कि सरकार ने बिना पर्याप्त तैयारी और बिना उपभोक्ताओं को भरोसे में लिए E20 पेट्रोल को एकाएक पूरे देश में लागू कर दिया, जिससे गाड़ियों के इंजन खराब होने, माइलेज घटने और तकनीकी दिक्कतें आने की शिकायतें सामने आईं. इसी विवाद के बीच अब सरकार ने संसद में विस्तार से अपना पक्ष रखा है. लोकसभा में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने साफ किया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर जो भी फैसले लिए गए, वे वैज्ञानिक अध्ययन और तकनीकी परीक्षण के आधार पर ही लिए गए हैं, और अब तक करीब 3 करोड़ गाड़ियों की जांच में कोई गड़बड़ी सामने नहीं आई है.

क्या प्रीमियम पेट्रोल को इथेनॉल से छूट मिली है?
सरकार ने साफ किया है कि देश में बिकने वाला सामान्य पेट्रोल अधिकतम 20% इथेनॉल मिश्रण यानी E20 के साथ बेचा जा रहा है, लेकिन प्रीमियम और हाईऑक्टेन पेट्रोल के लिए नीति अलग है. सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने बताया कि इंडियन ऑयल का XP100, हिंदुस्तान पेट्रोलियम का Power100 और भारत पेट्रोलियम का Speed100 पेट्रोल पूरी तरह इथेनॉलमुक्त यानी E0 है. हालांकि इस प्रीमियम पेट्रोल की हिस्सेदारी कुल पेट्रोल बिक्री में मात्र 0.5% ही है, यानी बाकी 99.5% बाजार में E20 पेट्रोल ही बिक रहा है.
क्या अब E25 या E27 लागू होने वाला है?
E20 के बाद इथेनॉल मिश्रण और बढ़ाए जाने की अटकलों पर भी सरकार ने विराम लगाया है. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। मंत्रालय ने संसद में कहा कि फिलहाल पेट्रोल में 20% से अधिक इथेनॉल, यानी E25 या E27 जैसी ब्लेंडिंग लागू करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है. सरकार का कहना है कि भविष्य में अगर इस दिशा में कोई कदम उठाया जाता है, तो उससे पहले वैज्ञानिक शोध, तकनीकी परीक्षण और ऑटोमोबाइल कंपनियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों तथा शोध संस्थानों के साथ व्यापक विचारविमर्श किया जाएगा. यानी फिलहाल के लिए 20% की सीमा ही बरकरार रहेगी.
क्या E20 से इंजन खराब होने के सबूत मिले हैं?
यही सबसे विवादित सवाल रहा है. मंत्रालय के अनुसार, E20 की ओर बढ़ना चरणबद्ध, सलाहमशविरे पर आधारित और वैज्ञानिक रूप से परखा हुआ कदम था. इसके लिए ऑटो कंपनियों, ARAI, SIAM और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों से व्यापक विचारविमर्श किया गया और रोलआउट से पहले मैटेरियल कम्पैटिबिलिटी, इंजन दुर्बलता, ईंधन प्रणाली, ड्राइविंग परफॉर्मेंस व उत्सर्जन जैसे पहलुओं का आकलन हुआ.
आंकड़ों के हिसाब से, एक प्रमुख OEM ने FY26 में 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें 1.5 करोड़ वाहन शुरू में E20 के लिए प्रमाणित भी नहीं थे फिर भी जंग या असामान्य घिसाव का कोई मामला नहीं मिला. एक प्रमुख 2व्हीलर कंपनी का अनुभव भी ऐसा ही रहा. एक अन्य OEM के 1.4 करोड़ E20 वाहनों के लंबे डेटा में भी इथेनॉल से नुकसान का सबूत नहीं मिला. ARAI ने भी पुष्टि की कि हर वाहन बाजार में आने से पहले अंतरराष्ट्रीय मानकों पर कड़ा परीक्षण झेलता है. देशभर में 3 करोड़+ कारें और 20 करोड़+ दोपहिया E20 पर चल रहे हैं, और कंपनियां इनकी वारंटी भी बिना रुकावट जारी रखे हुए हैं.
पेट्रोल पंपों पर अलग लेबलिंग क्यों नहीं?
एक बड़ा सवाल यह भी उठता रहा है कि जब बाजार में E0, E10 और E20 तीन तरह का पेट्रोल मौजूद है, तो पेट्रोल पंपों पर इनकी अलगअलग लेबलिंग क्यों नहीं की जा रही. ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। इस पर सरकार का तर्क है कि वर्तमान में सार्वजनिक क्षेत्र के पेट्रोल पंपों पर बिकने वाला सामान्य पेट्रोल पूरी तरह E20 ही है, जबकि E0 या E10 पेट्रोल की अलग से बिक्री हो ही नहीं रही. ऐसे में जब विकल्प मौजूद ही नहीं है, तो अलगअलग लेबल लगाने का कोई औचित्य नहीं बनता, इसलिए फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव भी नहीं है. हालांकि सरकार ने यह जरूर स्पष्ट किया कि जहां 85% इथेनॉल मिश्रित E85 पेट्रोल बेचा जाता है, वहां इसे साफ तौर पर प्रदर्शित किया जाता है, क्योंकि यह ईंधन सिर्फ फ्लेक्सफ्यूल वाहनों के लिए ही निर्धारित है और आम वाहनों के लिए नहीं है.
सरकार का कुल मिलाकर क्या रुख है?
कुल मिलाकर सरकार का रुख यह है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर उठाए गए सारे कदम वैज्ञानिक आधार पर, चरणबद्ध तरीके से और पर्याप्त परीक्षण के बाद ही उठाए गए हैं. न तो प्रीमियम पेट्रोल की आड़ में कोई भेदभाव किया जा रहा है, न ही फिलहाल इथेनॉल की मात्रा और बढ़ाने की कोई योजना है, और न ही E20 से इंजन को नुकसान पहुंचने का कोई सत्यापित प्रमाण मिला है. संसद में दिए गए इस जवाब से सरकार ने विवाद पर विराम लगाने की कोशिश की है, हालांकि विपक्ष और उपभोक्ता संगठनों की तरफ से इस पर आगे भी सवाल उठते रह सकते हैं.



