सेकेंड हैंड कार खरीदना नई कार की तुलना में किफायती ऑप्शन हो सकता है, लेकिन इसमें कुछ जोखिम भी होते हैं. इनमें सबसे आम धोखाधड़ी ओडोमीटर फ्रॉड है. कई बार कार बेचने वाले गाड़ी की चली हुई दूरी कम दिखाने के लिए ओडोमीटर से छेड़छाड़ कर देते हैं. इससे कार कम इस्तेमाल की हुई लगती है और उसकी कीमत भी ज्यादा मिल जाती है. अगर आप कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें, तो इस तरह के फ्रॉड से आसानी से बच सकते हैं.

सिर्फ ओडोमीटर पर भरोसा न करें

अगर कार का ओडोमीटर बहुत कम दिखा रहा है, तो केवल उसी के आधार पर फैसला न लें. पहले कार की कुल स्थिति को ध्यान से देखें. अगर सीटें ज्यादा घिसी हुई हैं, स्टीयरिंग चमकने लगा है या गियर नॉब और पैडल काफी पुराने लग रहे हैं, तो हो सकता है कार ज्यादा चली हो.

सर्विस रिकॉर्ड जरूर देखें

कार खरीदने से पहले उसके मांगें. रजिस्टर्ड सर्विस सेंटर में हर सर्विस के दौरान किलोमीटर दर्ज किए जाते हैं. रिकॉर्ड और ओडोमीटर की रीडिंग में अंतर दिखाई दे तो सावधान हो जाएं.

टायर और पार्ट्स की जांच करें

कार के टायर, ब्रेक डिस्क और क्लच जैसे हिस्से भी बहुत कुछ बताते हैं. अगर ओडोमीटर कम किलोमीटर दिखा रहा है, लेकिन टायर काफी घिस चुके हैं, तो यह शक की बात हो सकती है. हालांकि, ध्यान रखें कि टायर बदले भी जा सकते हैं, इसलिए केवल इसी आधार पर फैसला न लें. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है।

डिजिटल स्कैन कराएं

आज की ज्यादातर कारों में इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट होती है. कई मामलों में असली माइलेज ECU में दर्ज रहता है. किसी भरोसेमंद वर्कशॉप से स्कैन करवाकर यह जानकारी हासिल की जा सकती है.

टेस्ट ड्राइव जरूर करें

कार चलाकर देखें. अगर इंजन की आवाज सामान्य नहीं है, गियर बदलने में दिक्कत हो रही है या सस्पेंशन से आवाज आ रही है, तो कार शायद ओडोमीटर में दिख रही रीडिंग से कहीं ज्यादा चल चुकी हो.

दस्तावेजों की जांच भी जरूरी

इंश्योरेंस, प्रदूषण प्रमाणपत्र और सर्विस बिल जैसे दस्तावेजों में दर्ज तारीख और किलोमीटर की जानकारी आपस में मिलाकर देखें. इससे कई बार गड़बड़ी आसानी से पकड़ में आ जाती है.

पुरानी कार खरीदते समय थोड़ी सावधानी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है. अगर किसी बात पर संदेह हो, तो जल्दबाजी में सौदा करने के बजाय किसी भरोसेमंद मैकेनिक या ऑटो एक्सपर्ट की राय जरूर लें.

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