Meerut News: मेरठ जिला कारागार इन दिनों पति की हत्या के आरोप में बंद पांच महिला बंदियों को लेकर चर्चा में है. दामिनी, मुस्कान, रबीता, अंजली और कोमल अपनेअपने मामलों में न्यायिक अभिरक्षा में जेल में बंद हैं. इन सभी पर अपने पतियों की हत्या करने का आरोप है. जेल प्रशासन के अनुसार, इन महिलाओं से मिलने उनके परिजन भी बहुत कम या बिल्कुल नहीं आ रहे हैं. ऐसे में ये महिलाएं कानूनी लड़ाई के साथसाथ मानसिक और भावनात्मक अकेलेपन का भी सामना कर रही हैं.

पांचों महिलाएं न्यायिक हिरासत में
जेल में बंद दामिनी, मुस्कान, रबीता, अंजली और कोमल अलगअलग मामलों में आरोपी हैं. सभी के खिलाफ अपने पति की हत्या का मामला दर्ज है और फिलहाल उनके मामलों की सुनवाई अदालत में चल रही है. अंतिम फैसला अदालत द्वारा सुनाया जाना बाकी है.
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मुस्कान से मिलने नहीं आया कोई परिजन
सबसे चर्चित मामलों में शामिल मुस्कान पर आरोप है कि उसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या की और शव को नीले ड्रम में छिपा दिया. जेल प्रशासन के अनुसार, मुस्कान पिछले लंबे समय से जेल में बंद है, लेकिन उससे मिलने अब तक कोई परिजन नहीं पहुंचा. बताया जाता है कि वह अब जेल के माहौल में अपनी दिनचर्या के अनुसार रह रही है.
दामिनी को बेटे की याद कर देती है भावुक
हाल ही में चर्चा में आए दामिनी मामले में उस पर पति की सांप से कटवाकर हत्या कराने का आरोप है. वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा के अनुसार, जेल आने के बाद दामिनी मानसिक रूप से काफी परेशान थी. शुरुआत में उसने खाना भी नहीं खाया, लेकिन बाद में अन्य महिला बंदियों के समझाने पर उसने भोजन करना शुरू कर दिया.
जेल अधिकारियों का कहना है कि दामिनी बारबार अपने बेटे मानिक को याद करती है और कई बार भावुक होकर रो पड़ती है. उसने अपने बेटे से मिलने की इच्छा भी जताई है. मानसिक तनाव कम करने के लिए उसने जेल की लाइब्रेरी से एक धार्मिक पुस्तक भी पढ़ने के लिए ली है.
दामिनी और मुस्कान की हुई मुलाकात
सोमवार सुबह जेल परिसर में गिनती के दौरान दामिनी और मुस्कान की मुलाकात हुई. जेल प्रशासन के मुताबिक, दोनों के बीच करीब डेढ़ मिनट तक बातचीत हुई. इस दौरान दोनों ने एकदूसरे का हालचाल पूछा और संक्षिप्त बातचीत के बाद अपनीअपनी बैरक में लौट गईं.
प्रेमी से मिलने की नहीं जताई इच्छा
जेल प्रशासन का कहना है कि दामिनी ने अब तक अपने प्रेमी तुषार से मिलने की कोई इच्छा व्यक्त नहीं की है. हालांकि, यदि अदालत से अनुमति मिलती है तो तय नियमों के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या अन्य कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से मुलाकात कराई जा सकती है.
परिजनों की दूरी बनी बड़ी चुनौती
जेल अधिकारियों के अनुसार, इन पांचों महिला बंदियों के लिए कानूनी प्रक्रिया के साथसाथ सामाजिक और पारिवारिक दूरी भी बड़ी चुनौती बन गई है. परिजनों के नहीं आने से वे मानसिक रूप से अकेलापन महसूस कर रही हैं. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। फिलहाल सभी महिला बंदी अदालत के फैसले का इंतजार कर रही हैं, जबकि जेल प्रशासन उनकी काउंसलिंग और आवश्यक देखभाल का भी ध्यान रख रहा है.



