हिमाचल प्रदेश सरकार ने राजधानी शिमला में बेलगाम और तेजी से कराए जा रहे निर्माण कार्य पर अंकुश लगाने के लिए एक बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया है. सुक्खू कैबिनेट ने शिमला के सबसे भीड़भाड़ वाले ‘कोर एरिया’ के अधिकांश हिस्से को ‘नो कंस्ट्रक्शन जोन’ घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.

इस फैसले के लागू होने के बाद राजधानी के शिमला के बेहद अहम और संवेदनशील क्षेत्रों में नए निजी मकानों या व्यावसायिक भवनों के निर्माण पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग जाएगा. आम लोगों की सुविधा के लिए बनने वाले सरकारी भवनों और पुराने पड़ चुके मकानों को उनके मूल स्वरूप के अनुसार इन्हें फिर से बनाने को इस पाबंदी से बाहर रखा गया है.
अब इन इलाकों में निर्माण की इजाजत नहीं
नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग इस पर मसौदा अधिसूचना जारी कर आम जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगेगा. हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रस्ताव के अनुसार संजौली सड़क के ऊपर का पूरा क्षेत्र, कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज , लक्कड़ बाजार, रिज मैदान, रानी झांसी पार्क, मॉल रोड, इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, क्लार्क्स होटल, ओक ओवर, छोटा शिमला और वापस संजौली तक का व्यापक इलाका नए निर्माण प्रतिबंध के दायरे में आएगा. इन क्षेत्रों में अब निजी स्तर पर नए भवनों के निर्माण की अनुमति नहीं मिलेगी.
कैबिनेट के फैसले पर नगर और ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि इस पाबंदी का मकसद शिमला की हरियाली को बचाना है. लोग शहर में इसके जंगलों और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने आते हैं, न कि कंक्रीट के जंगल को देखने के लिए आते हैं.
शिमला के जिन ज्यादातर इलाकों में निर्माण कार्य पर रोक लगाई जा रही है, वे असल में उन 17 ‘नोकंस्ट्रक्शन ग्रीन बेल्ट’ का हिस्सा थे, जिन्हें ‘शिमला डेवलपमेंट प्लान2041’ के तहत जरूरतआधारित निर्माण के लिए खोला गया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस प्लान को 11 जनवरी, 2024 को मंजूरी दी थी.
शिमलाः प्रतिबंधित सड़कों पर परमिट फीस कम
दूसरी ओर, हिमाचल सरकार ने कल बुधवार को शिमला की सील की गई और प्रतिबंधित सड़कों पर निजी गाड़ियों के लिए परमिट फीस कम कर दी और पहली बार 6 महीने के परमिट की सुविधा भी दी. राज्य सरकार ने शिमला में निजी गाड़ियों के मालिकों की सुविधा के लिए ‘शिमला रोड यूजर्स एंड पेडस्ट्रियंस अमेंडमेंट ऑर्डिनेंस, 2026’ लागू कर दिया.
बिना परमिट के सील की गई और प्रतिबंधित सड़कों पर गाड़ियों को चलने की इजाजत नहीं है. इनमें से अधिकतर सड़कें शिमला के अलगअलग हिस्सों से शहर के मुख्य इलाके यानी मॉल रोड तक पहुंचने का रास्ता देती हैं. सील की गई और प्रतिबंधित सड़कों में कुछ प्रमुख सड़कें हैं नवबहार से रिज, छोटा शिमला से मॉल और रिज, IGMC से रिज, AG ऑफिस से CTO, और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडी होते हुए बोइलोगंज से विधानसभा तक.
नए अध्यादेश के तहत, सील की गई सड़क पर निजी गाड़ियों के लिए सालाना परमिट फीस 15,000 रुपये से घटाकर 8,000 रुपये कर दी गई है, जबकि प्रतिबंधित सड़क के लिए सालाना फीस 5,000 रुपये से घटाकर 3,000 रुपये कर दी गई है. साथ ही पहली बार, गाड़ी के मालिक 6 महीने के परमिट का विकल्प भी चुन सकते हैं. सील की गई सड़क के लिए इनकी फीस 4,500 और प्रतिबंधित सड़क के लिए 2,000 रुपये तय की गई है.



