नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता में पहला विशेष थाना खोला है. यह थाना न्यू टाउन स्थित एनबीसीसी भवन में बनाया गया है. इससे पश्चिम बंगाल से जुड़े एनआईए मामलों की प्राथमिकी अब कोलकाता में ही दर्ज की जा सकेगी. हालांकि, यह फैसला यह थाना नहीं करेगा कि किस मामले की एफआईआर यहां दर्ज होगी और किसकी नहीं? इसके लिए पहले से प्रॉसेस तय है.

आइए, समझते हैं कि एनआईए कौनकौन से मामलों की जांच करती है? कैसे काम करती है? कोलकाता में पहला विशेष थाना क्यों स्थापित किया गया?
क्या है नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी?
राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी, देश की प्रमुख आतंकवाद रोधी जांच एजेंसी है. इसका गठन साल 2008 में हुआ था. मुंबई आतंकी हमलों के बाद ऐसी केंद्रीय एजेंसी की जरूरत महसूस हुई थी. इसका उद्देश्य उन गंभीर अपराधों की जांच करना है, जिनका असर देश की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता पर पड़ता है.
नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी यानी NIA ऐसे मामलों की जांच करती है, जिनके तार एक से अधिक राज्यों या दूसरे देशों से जुड़े होते हैं. कई बार स्थानीय पुलिस किसी मामले की शुरुआती जांच करती है. बाद में केंद्र सरकार उस मामले को एनआईए को सौंप सकती है. इसके बाद एजेंसी अपने स्तर पर जांच आगे बढ़ाती है.
एनआईए का गठन क्यों किया गया?
भारत में आतंकवाद और संगठित अपराध का स्वरूप लगातार बदल रहा है. कई घटनाओं की योजना एक राज्य में बनती है. इसका पैसा दूसरे राज्य से आता है. हथियार किसी अन्य स्थान से पहुंचते हैं. कई बार इन घटनाओं के तार विदेशों से भी जुड़े होते हैं. ऐसे मामलों में केवल स्थानीय पुलिस की जांच पर्याप्त नहीं होती. जांच के लिए अलगअलग राज्यों में जाना पड़ता है. विदेशी एजेंसियों से भी संपर्क करना पड़ सकता है. इसलिए एक ऐसी केंद्रीय एजेंसी की आवश्यकता थी, जो राष्ट्रीय स्तर पर जांच कर सके. इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम, 2008 बनाया गया. इस कानून के तहत एनआईए की स्थापना हुई. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। इस एजेंसी को देश के अलगअलग हिस्सों में जांच करने का अधिकार मिला.
आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच
एनआईए का सबसे प्रमुख कार्य आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच करना है. इसमें आतंकी हमले, बम विस्फोट और आतंकी साजिश शामिल हैं. एजेंसी यह पता लगाती है कि घटना के पीछे कौन लोग हैं. इसके लिए वह संदिग्धों के संपर्क, धन के स्रोत और हथियारों की सप्लाई की जांच करती है. एजेंसी यह भी देखती है कि घटना का संबंध किसी आतंकी संगठन से है या नहीं. आतंकी संगठनों को धन देने, उनके लिए भर्ती करने और उन्हें छिपने में मदद करने वाले लोगों की भी जांच की जा सकती है. ऑनलाइन कट्टरपंथ और आतंकी प्रचार से जुड़े मामलों पर भी एनआईए कार्रवाई करती है.
हथियार और विस्फोटक की तस्करी
एनआईए हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी से जुड़े मामलों की जांच करती है. ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। यदि हथियारों की सप्लाई किसी आतंकी संगठन या उग्रवादी समूह तक पहुंच रही हो, तो मामला एनआईए के दायरे में आ सकता है. एजेंसी हथियारों के स्रोत का पता लगाती है. वह यह भी जांचती है कि हथियार किस रास्ते से लाए गए. इस नेटवर्क में कौनकौन लोग शामिल हैं, इसकी जानकारी जुटाई जाती है. विस्फोटक पदार्थों का अवैध भंडारण और परिवहन भी गंभीर मामला है. यदि इसका संबंध आतंकी गतिविधि से हो, तो एनआईए जांच कर सकती है.
नकली भारतीय मुद्रा के मामले
उच्च गुणवत्ता वाली नकली भारतीय मुद्रा की तस्करी भी एनआईए के अधिकार क्षेत्र में आती है. नकली नोटों के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया जा सकता है. ऐसे मामलों में एजेंसी नोट छापने वाले नेटवर्क की जांच करती है. वह यह पता लगाती है कि नकली मुद्रा कहां से आई. इसे भारत में किसने पहुंचाया और किन लोगों ने इसे बाजार में चलाया, इसकी भी जांच की जाती है. यदि इस काम के पीछे किसी विदेशी नेटवर्क या आतंकी संगठन का हाथ हो, तो मामला और अधिक गंभीर हो जाता है.
सीमा पार से होने वाली गतिविधियां
सीमा पार से घुसपैठ और तस्करी से जुड़े मामलों की जांच भी एनआईए कर सकती है. इसमें आतंकियों की भारत में घुसपैठ, हथियारों की आपूर्ति और आतंकवाद के लिए धन भेजना शामिल है. कई बार सीमा पार बैठे लोग भारत में अपने सहयोगियों के जरिए गतिविधियां चलाते हैं. वे मोबाइल ऐप, वर्चुअल नंबर और गुप्त संचार माध्यमों का इस्तेमाल कर सकते हैं. एनआईए ऐसे मामलों में देश के भीतर और बाहर मौजूद नेटवर्क को जोड़कर देखती है. एजेंसी का उद्देश्य पूरी साजिश का पता लगाना होता है.
वामपंथी उग्रवाद और अलगाववादी गतिविधियां
देश के कुछ हिस्सों में वामपंथी उग्रवाद से जुड़े मामले भी एनआईए की जांच में आते हैं. इनमें प्रतिबंधित संगठनों के लिए धन जुटाना, हथियार उपलब्ध कराना और हिंसक गतिविधियों में मदद करना शामिल हो सकता है. अलगाववादी गतिविधियों से जुड़े मामलों की जांच भी एनआईए कर सकती है. यदि किसी संगठन का उद्देश्य देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाना है, तो उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में कार्रवाई हो सकती है.
परमाणु और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों से जुड़े अपराध
परमाणु संयंत्रों और परमाणु सामग्री से जुड़े अपराध भी एनआईए के दायरे में आते हैं. देश की महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाने की साजिश की जांच भी एजेंसी कर सकती है. ऐसे मामलों में संवेदनशील सूचनाओं की चोरी, तोड़फोड़ और सुरक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश शामिल हो सकती है.
अंतरराष्ट्रीय समझौतों से जुड़े अपराध
भारत ने कई अंतरराष्ट्रीय संधियों और समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं. इनसे जुड़े कुछ अपराधों की जांच भी एनआईए कर सकती है. मानव तस्करी, आतंकवाद, विमान सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी होता है. यदि किसी अपराध का संबंध ऐसे समझौतों से हो, तो केंद्र सरकार उसे एनआईए को सौंप सकती है.
कोलकाता में एनआईए का विशेष थाना क्यों खोला गया?
पश्चिम बंगाल में एनआईए का क्षेत्रीय कार्यालय पहले से मौजूद था, लेकिन वहां अलग पुलिस थाना नहीं था. इसलिए राज्य से जुड़े मामलों की प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए एजेंसी को दिल्ली मुख्यालय पर निर्भर रहना पड़ता था. अब कोलकाता में विशेष थाना खुलने के बाद यह प्रक्रिया आसान होगी. एनआईए के अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों की एफआईआर स्थानीय स्तर पर दर्ज की जा सकेगी. जांच की शुरुआती प्रशासनिक कार्रवाई भी कोलकाता से होगी. यह थाना न्यू टाउन स्थित एनबीसीसी भवन में बनाया गया है. इसी भवन में एनआईए का क्षेत्रीय कार्यालय भी है.
पहले क्या परेशानी होती थी?
पहले पश्चिम बंगाल से जुड़े एनआईए मामलों में कई औपचारिकताएं दिल्ली के जरिए पूरी होती थीं. इससे समय अधिक लगता था. दस्तावेजों के आदानप्रदान में भी देरी हो सकती थी. जांच अधिकारियों को कई मामलों में दिल्ली मुख्यालय के साथ लगातार समन्वय करना पड़ता था. अब राज्य में ही पुलिस थाना होने से यह काम अधिक व्यवस्थित हो सकेगा. यह व्यवस्था जांच को तेज करने में मदद कर सकती है. अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर काम करने के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी. संवेदनशील मामलों में शुरुआती कार्रवाई भी जल्दी शुरू हो सकेगी.
पश्चिम बंगाल के किन मामलों पर असर पड़ेगा?
पश्चिम बंगाल में एनआईए पहले से कई संवेदनशील मामलों की जांच कर रही है. इनमें बेलडांगा दंगा, मालदा के मोथाबाड़ी की घटना और राज्य के अलगअलग हिस्सों में हुए विस्फोटों से जुड़े मामले शामिल बताए गए हैं. नए थाने से इन मामलों की प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया को सुविधा मिल सकती है. भविष्य में यदि कोई मामला एनआईए को सौंपा जाता है, तो उसकी प्राथमिकी कोलकाता में दर्ज की जा सकेगी. हालांकि, किसी मामले की जांच एनआईए को सौंपने का निर्णय केवल थाना खुलने से नहीं होता. इसके लिए कानूनी प्रक्रिया और केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी होती है.
क्या यह सामान्य पुलिस थाने जैसा है?
एनआईए का विशेष थाना सामान्य पुलिस थाने की तरह प्राथमिकी दर्ज कर सकता है. यहां अधिकारी, उपनिरीक्षक और अन्य कर्मचारी तैनात रहते हैं. लेकिन इसका काम सामान्य अपराधों की जांच करना नहीं है. यह थाना केवल उन मामलों पर काम करेगा, जो एनआईए के कानूनी अधिकार क्षेत्र में आते हैं. स्थानीय अपराध, चोरी, मारपीट या सामान्य विवाद की जांच स्थानीय पुलिस ही करेगी.



