दुनिया में भारत के बासमती चावल की मांग बढ़ रही है. साल 202425 ने दुनियाभर के 154 देशों में 60.65 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल निर्यात हुआ. भारत के बासमती चावल का सबसे बड़ा खरीदार सऊदी अरब है. इसके बाद इराक, ईरान, यमन और यूएई हैं. बासमती के कुल निर्यात का 61 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ इन्हीं पांच देशों को भेजा गया है. आंकड़े बताते हैं, खासकर पश्चिम एशिया में भारत के बासमती चावल की मांग कितनी ज्यादा है. भारत के कई हिस्सों में इसकी पैदावार होती है, लेकिन हरियाणा का करनाल बासमती चावल की राजधानी कहलाता है.

भारत का बासमती चावल खुशबू, लंबे दाने और इसके स्वाद के लिए जाना जाता है. हरियाणा का करनाल सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले बासमती चावल के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है. यह अपने कृषि अनुसंधान संस्थानों के लिए भी जाना जाता है जिन्होंने बासमती की किस्मों में सुधार लाने में योगदान दिया और यह उपलब्धि हासिल की. अब सवाल है कि करनाल कैसे बना बासमती चावल का गढ़ और कितने राज्य बासमती की पैदावार के लिए जाने जाते हैं?
करनाल कैसे बना बासमती चावल का गढ़?
करनाल को बासमती की राजधानी या गढ़ बनने के पीछे एकदो नहीं कई कारण हैं.
- जलवायुमिट्टी: करनाल की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी में बासमती चावल की खेती के लिए सबसे बेहतर है. इसके अलावा, यहां सुगंधित चावल के उत्पादन के लिए अनुकूल जलवायु है. ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। ये सब बासमती की खुशबू, लंबे दाने और उच्च गुणवत्ता के लिए आदर्श माने जाते हैं.
बासमती चावल सिर्फ एक कृषि उत्पाद नहीं, भारत की वैश्विक पहचान भी है. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है।
- राइस मिलिंग और निर्यात हब: करनाल भारत में प्रीमियम बासमती चावल के प्रमुख उत्पादकों में से एक हैं. जलवायु और मिट्टी ने इसकी पैदावार बढ़ाई और चावल की बड़ी मीलें और निर्यात करने वाली कंपनियों ने नेटवर्क बनाया. यही नहीं, करनाल बासमती चावल की प्रॉसेसिंग और व्यापार का प्रमुख केंद्र है. यहां से बासमती चावल मध्य पूर्व, यूरोप, अमेरिका और अन्य देशों में भेजा जाता है.
- रिसर्च और डेवलपमेंट: यहां के रिसर्च इंस्टीट्यूट चावल की उन्नत किस्सें और बीज के बेहतर विकास के लिए जाने जाते हैं. इनमें से कुछ महत्वपूर्ण संस्थानों में भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान , ICARभारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान और राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो शामिल हैं.
बासमती चावल का सबसे बड़ा खरीदार सऊदी अरब है.
- किसानों का विशेष अनुभव: इस क्षेत्र के किसानों को दशकों का अनुभव है और वे आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ उच्च गुणवत्ता वाली बासमती चावल की खेती करते हैं.
देश में कहांकहां पैदा होता है बासमती चावल?
अगर पूरे क्षेत्र की बात करें तो हरियाणा और पंजाब को भारत का बासमती बेल्ट कहा जाता है. देश के अधिकांश उच्च गुणवत्ता वाले बासमती चावल का उत्पादन इसी क्षेत्र में होता है. वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, सहारनपुर और बिजनौर जैसे जिले भी बासमती उत्पादन के बड़े केंद्र हैं और भारत के निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.
सऊदी के बाद भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा आयातक इराक है.
निर्यात में बढ़ोतरी
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 202425 में भारत ने दुनिया भर में 60.65 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल का निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत 50,312 करोड़ रुपए रही. यह पिछले साल के मुकाबले काफी बेहतर प्रदर्शन है और मात्रा के लिहाज से इसमें 15.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है.
इन आंकड़ों से साफ है कि वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारतीय बासमती की मांग कमज़ोर नहीं पड़ी, बल्कि इसका बाज़ार और फैला है. एक साल के भीतर भारत ने अपने निर्यात का दायरा 150 देशों से बढ़ाकर 154 देशों तक पहुंचा दिया.
बासमती चावल की सबसे बड़ी ताकत उसकी खुशबू है.
दरअसल, भारतीय बासमती चावल सिर्फ एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक पहचान का हिस्सा बन चुका है. सऊदी अरब जैसे देशों में इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. इसकी वजहें साफ हैं बेहतरीन स्वाद और खुशबू, खानपान संस्कृति से मेल, भरोसेमंद गुणवत्ता, बड़ी प्रवासी आबादी और भारत की मजबूत सप्लाई चेन.
भारत का बासमती निर्यात इस समय मज़बूत स्थिति में है. आने वाले समय में बासमती चावल भारत के लिए विदेशी मुद्रा का एक बड़ा और भरोसेमंद स्रोत साबित हो सकता है.



