निर्मातानिर्देशक करण जौहर कई बार बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री और स्टार्स को सपोर्ट करते हुए नजर आते हैं। हालांकि बहुत बार वह उतना ही खुलकर उनकी कमियो के बारे में भी बात करते हैं। अब हाल ही में डायरेक्टर ने बॉलीवुड के जरूरत से ज्यादा पीआर करने के तरीके की जमकर आलोचना की। करण ने कहा कि अब हर तारीफ की एक कीमत होती है, जिससे असली और बनावटी तारीफ के बीच फर्क करना मुश्किल हो गया है।

हाल ही में ‘द वीक’ से बात करते हुए करण जौहर ने बॉलीवुड की नई प्रमोशन रणनीतियों के बारे में सवाल किया गया। सवाल में उदाहरण दिया गया कि जान्हवी कपूर ने अपनी फिल्म ‘परम सुंदरी’ के लिए ‘सुंदरी’ लिखी हुई शर्ट पहनी, जबकि शनाया कपूर ने ‘तू या मैं’ के प्रमोशन के लिए मगरमच्छ वाले स्टंट जैसे अलगअलग तरीके अपनाए।
यह भी पढ़ें:
पीआर स्टंट पर क्या बोले करण जौहर
इस पर दर्शक ने करण से पूछा कि क्या बॉलीवुड अब हॉलीवुड की तरह ऐसे प्रमोशनल तरीकों को अपना रहा है और क्या आगे चलकर इस तरह के पब्लिसिटी स्टंट और ज्यादा देखने को मिलेंगे। इसके जवाब में करण ने राय दी कि हिंदी सिनेमा को अपनी पीआर एक्टिविटीज थोड़ी कम कर देनी चाहिए, क्योंकि वे अब बहुत ज्यादा हो गई हैं।
करण ने कहा, “मुझे लगता है कि बॉलीवुड को पीआर करना बंद कर देना चाहिए। यह ज्यादा बेहतर होगा। उन्हें अपनी उपलब्धियों को खुद बोलने देना चाहिए, क्योंकि अफसोस की बात है कि आजकल ज्यादातर पीआर पैसे देकर कराया जाता है। अगर आप चाहते हैं कि कोई कहे आप बहुत खूबसूरत लग रहे हैं, तो उसके लिए भी पैसे देने पड़ते हैं। अगर आप चाहते हैं कि कोई आपको दुनिया का सबसे बेहतरीन अभिनेता बताए, तो उसके लिए भी पैसे देने पड़ते हैं।”
पीआर के कारण फर्क करना हुआ मुश्किल
इस मुद्दे पर आगे बात करते हुए करण ने कहा कि ऐसी स्थिति में असली और पैसे देकर कराई गई तारीफ के बीच फर्क करना मुश्किल हो गया है, यहां तक कि उनके लिए भी। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि पीआर के मामले में हम हद से ज्यादा आगे बढ़ गए हैं। अब कोई मेथड मार्केटिंग’ कर रहा है या नहीं, ये उतना जरूरी नहीं है। असली बात ये है कि लोगों को खुद की मार्केटिंग कम करनी चाहिए और अपने काम को ही अपनी पहचान बनने देना चाहिए।”
लास्ट में निर्मातानिर्देशक ने यह साफ किया कि वह खास तौर पर जान्हवी कपूर या शनाया की बात नहीं कर रहे थे, बल्कि सभी के बारे में सामान्य तौर पर बोल रहे हैं। उन्होंने कहा, “मेरा मतलब सब से है… मुझे लगता है कि पीआर अब जरूरत से ज्यादा बढ़ गया है। इसे करने का एक सही तरीका होना चाहिए। पब्लिसिटी और मार्केटिंग बहुत जरूरी काम हैं और इन्हें उसी तरह गंभीरता से लिया जाना चाहिए।”
करण ने आगे कहा, “अब हर चीज पैसे देकर कराई जा सकती है और यही बात परेशान करने वाली है। ऐसे में यह समझना मुश्किल हो जाता है कि लोगों को सच में क्या पसंद आ रहा है और क्या नहीं। अब हर चीज देखकर लगता है कि क्या लोग सच में इसे पसंद कर रहे हैं या उन्हें इसके लिए पैसे दिए गए हैं। कई बार तो मैं खुद भी समझ नहीं पाता, यह मेरे लिए भी कन्फ्यूजिंग है, क्योंकि कभीकभी मैं भी इसके लिए पैसे देता हूं।”
यह भी पढ़ें:



