सोने और चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली है. आंकड़ों को देखें तो दो दिनों में सोना 3300 रुपए तक सस्ता हो चुका है. जहां मंगलवार को सोने की कीमत में 1800 रुपए की गिरावट देखने को मिली थी. जबकि बुधवार को कीमतों में 1500 रुपए की गिरावट देखने को मिली है. वहीं दूसरी ओर बुधवार को चांदी की कीमत में 500 रुपए की बढ़ोतरी देखने को मिली है. वैसे मंगलवार को चांदी की कीमत में बड़ी गिरावट देखी गई थी और दाम 2.50 लाख रुपए से नीचे आ गए थे.

दिल्ली में दो दिनों में 3300 रुपए सस्ता हुआ सोना, अब इतनी हो गई कीमत
दिल्ली में दो दिनों में 3300 रुपए सस्ता हुआ सोना, अब इतनी हो गई कीमत

एक्सपर्ट के अनुसार मिडिल ईस्ट टेंशन की वजह से कच्चे तेल के दाम में इजाफा देखने को मिला है और महंगााई का संकट खड़ा हो गया है. जिसकी वजह से सोने के दाम में दबाव देखने को मिल रहा है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर सोने और चांदी के दाम कितने हो गए हैं.

सोने के दाम लगातार दूसरे दिन गिरावट

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में बुधवार को सोने की कीमत में 1,500 रुपए की गिरावट आई और यह 1.52 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम रहा. यह गिरावट मुनाफावसूली के कारण हुई, क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर के बारे में फैसले से पहले कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, हालांकि, चांदी की कीमतों में मामूली बढ़त दर्ज की गई.

यह 500 रुपए बढ़कर 2,44,500 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई. मंगलवार को यह 2,44,000 रुपए प्रति किलोग्राम पर थी. सर्राफा संघ के अनुसार 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 1,500 रुपए यानी एक प्रतिशत गिरकर 1,52,800 रुपए प्रति 10 ग्राम रह गया. पिछले कारोबारी सत्र में सोने की कीमत 1,54,300 रुपए प्रति 10 ग्राम रही थी.

क्यों सस्ता हुआ सोना?

सर्राफा कारोबारियों ने पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ऊर्जा की बढ़ती लागत पर गौर किया. इससे महंगाई ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है और केंद्रीय बैंकों को लंबे समय तक अपनी नीतियां सख्त बनाए रखने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. एलकेपी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषण विभाग के उपाध्यक्ष जतीन त्रिवेदी ने कहा कि बुधवार को सोने का कारोबार कमजोर रहा, क्योंकि लगातार मुनाफावसूली और कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ी महंगाई की चिंताओं ने इस कीमती धातु की कीमतों पर दबाव बनाए रखा.

उन्होंने कहा कि तेल की ऊंची कीमतें इस संभावना को और मजबूत कर रही हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी मौद्रिक नीति पर सख्त रुख बनाए रख सकता है. इससे डॉलर को मजबूती मिलेगी और सर्राफा की दरों में तेजी की गुंजाइश सीमित हो जाती है.

आई डब्ल्यूजीसी की रिपोर्ट

त्रिवेदी ने कहा कि कारोबारी अब फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले और चेयरमैन जेरोम पॉवेल की टिप्पणियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, ताकि उन्हें यह संकेत मिल सके कि अमेरिकाईरान के बीच जारी अनिश्चितता के माहौल में अधिकारी ब्याज दर के बारे में क्या सोच रहे हैं.

विश्व स्वर्ण परिषद के अनुसार, जनवरीमार्च तिमाही के दौरान भारत में सोने की मांग सालाना आधार पर 10 प्रतिशत बढ़कर 151 टन पर पहुंच गई. यह वृद्धि, कीमतों के ऊंचे स्तर पर होने के बावजूद, निवेश की मजबूत मांग के कारण हुई. अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर सोना 23.31 डॉलर यानी 0.51 प्रतिशत गिरकर 4,573.75 डॉलर प्रति औंस रह गया, जबकि चांदी 0.18 प्रतिशत टूटकर 72.99 डॉलर प्रति औंस पर रही.