सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर सिस्टम के जरिए सब्सिडी और कल्याणकारी लाभ पहुंचाने से सरकार को वित्त वर्ष 2025 में 83,064 करोड़ रुपए की लीकेज रोकने में मदद मिली. इससे इस रास्ते से केंद्र की कुल बचत 5.14 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है.

इस बचत से सरकार के फाइनेंस मैनेजरों को खर्च की क्वालिटी सुधारने और सरकारी खजाने पर बिना ज्यादा बोझ डाले योग्य लाभार्थियों को अतिरिक्त कल्याणकारी लाभ देने के लिए ज्यादा वित्तीय गुंजाइश मिली है. इस बचत के पैमाने को समझने के लिए, वित्त वर्ष 2015 और वित्त वर्ष 2025 के बीच DBT से जुड़ी कुल बचत, पिछले पांच वर्षों में प्रमुख ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना’ पर केंद्र के लगभग 4.5 लाख करोड़ रुपए के कुल खर्च से भी ज्यादा है.
पीडीएस और मनरेगा सबसे आगे
- अकेले वित्त वर्ष 2025 में, सरकार ने डुप्लीकेट, नकली और अस्तित्वहीन राशन कार्डों को हटाकर 63,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की बचत की. नकली और डुप्लीकेट मनरेगा जॉब कार्ड हटाकर 16,829 करोड़ रुपए की और बचत हुई. स्कॉलरशिप और अन्य सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों में अयोग्य लाभार्थियों की पहचान करने और उन्हें हटाने से अतिरिक्त बचत हुई.
- वित्त वर्ष 2015 में सत्ता में आने के बाद से, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस सरकार ने सभी प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं में DBT का दायरा बढ़ाया है. वित्त वर्ष 2026 में, 328 योजनाओं में DBT ट्रांसफर रिकॉर्ड 7.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. वित्त वर्ष 2015 से, बैंक खातों में नकद ट्रांसफर और अनाज व खाद जैसे सामान के रूप में लाभ पहुंचाकर लाभार्थियों को सीधे लगभग 51.5 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए हैं.
- DBT से हुई कुल 5.14 लाख करोड़ रुपये की बचत में से, पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के तहत 6.36 करोड़ नकली राशन कार्ड हटाने से 3.13 लाख करोड़ रुपए की बचत हुई, जो कुल बचत का लगभग 61 फीसदी है.
- 1.32 करोड़ नकली और डुप्लीकेट मनरेगा जॉब कार्ड हटाने से 74,888 करोड़ रुपए की बचत हुई. इसी तरह, 40.9 मिलियन नकली लाभार्थियों और 23.8 मिलियन बिना सब्सिडी वाले LPG ग्राहकों को हटाने से 31 मार्च, 2025 तक कुल 74,031 करोड़ रुपए की बचत हुई.
PMKISAN और फर्टिलाइजर
इसके अलावा, सरकार ने PMKISAN योजना से 21.17 मिलियन अयोग्य लाभार्थियों को हटाकर 22,106 करोड़ रुपये बचाए. रिटेलर्स को फर्टिलाइज़र की बिक्री में 158.06 लाख मीट्रिक टन की कमी से भी 18,700 करोड़ रुपये की बचत हुई.
DBT को अपनाने, समय पर फंड जारी करने और लीकेज पर सख्त नियंत्रण से सरकारी खर्च की कार्यक्षमता में काफी सुधार हुआ है. इससे महामारी के बाद के समय में केंद्र के कैपिटल एक्सपेंडिचर में कई गुना बढ़ोतरी हुई है और साथ ही उधार लेने की लागत को कम करने में भी मदद मिली है.



